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थाने के मालखाने में छिपे थे मंदाकनी से निकले भगवान

पुलिस ने दिखाई वेशकमीती मूर्ति की जब्ती, थाना प्रभारी पर गिरी लापरवाही की गाज

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God came out of the Mandakani hidden in the station house

God came out of the Mandakani hidden in the station house

सतना. मंदाकनी नदी की सफाई के दौरान मिली जिस वेशकीमती मूर्ति की शोर चित्रकूट से सटे दोनों राज्यों में हो रहा था उसका पर्दाफास हो गया। भगवान की मृर्ति थाने के मालखाने में रखी होना बताया गया है। सोमवार को पुलिस ने मूर्ति सबके सामने कर दी और बताया कि उसकी जब्ती 10 जून को करने के बाद एसडीएम समेत पुरातत्व विभाग को सूचना भेजी गई है। हालांकि मृर्ति की बात थाना प्रभारी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों से छिपाई इसलिए उन पर कार्रवाही की गाज गिर गई। अब इस प्रकरण की जांच का जिम्मा एसडीओपी चित्रकूट वीपी सिंह और डीएसपी मुख्यालय आइपीएस हितिका वासल को सौंपा गया है।
सांसद तक पहुंची बात
मंदाकनी नदी से केवटों को मिली वेशकीमती प्रतिमा को सोमवार को पुलिस सामने लाई। जिसमें दर्शाया गया है कि प्रतिमा की जब्ती २५ पुलिस एक्ट के तहत 10 जून 2020 को की गई। इस मामले को लेकर नारायण केवट, रामप्रसाद निषाद और उनके साथी उप्र के बांदा सांसद आरके सिंह पटेल तक लेकर गए। उप्र की मीडिया ने इस बात को उछाला भी लेकिन नयागांव थाना पुलिस मूर्ति मामले को दबाए रही। यह प्रतिमा 2 जून को छह केवटों को रामघट से लगे तुलसी चबूतरा के पास मिली थी। केवटों के बीच बंटवारे को लेकर हुए विवाद के बाद पुलिस को भनक लगी। जिसके बाद 4 जून को नयागांव थाना पुलिस उसे केवटों के घर से ले गई थी।
डीआइजी ने एसपी को बताया
एसपी रियाज इकबाल ने बताया कि उन्हें मूर्ति के संबंध में दो दिन पहले ही डीआइजी रीवा जोन ने पूछा था। तब वह इस मामले में सक्रिय हुए और मूर्ति के बारे में जानकारी जुटाई। एसपी का कहना है कि थाना स्टॉफ से जानकारी लेने पर पता चला है कि सभी की जानकारी में यह बात थी कि मूर्ति मालखाने में रखी है। लेकिन वरिष्ठ अधिकारियों को इसके बारे में किसी ने सूचना नहीं दी।
आखिर कहां से आई मूर्ति
अब यह सवाल उठ रहा है कि मंदाकनी नदी में आखिर यह वेशकीमती मूर्ति कहां से आई? यह मूर्ति आखिर किस मंदिर की है। किसने इसे चोरी किया और फिर नदी में कैसे पहुंची? इन सवालों के जबाव मिलना बाकी हैं।
गौरतलब है कि अष्टधातु की वेशकीमती मूर्ति के ही एक मामले में रीवा जिले में भी थाना प्रभारी पर निलंबन की गाज गिरी थी। जब बदमाशों के कब्जे से बरामद मूर्ति को थाना प्रभारी संदीप अयाची ने अपने पास रख लिया था और उसके बारे में वरिष्ठ अधिकारियों से बात छिपाई थी।