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फर्जी आदेश से निजी हो गई मास्टर प्लान की सरकारी जमीन, IAS ने भी अपने नाम कराया था प्लाट

आईएएस आर पूना ने भी इस जमीन का एक हिस्सा खरीदा था जांच के बाद भी अफसरशाही के चलते सरकारी नहीं हो सकी जमीन

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Government land of master plan became private by fake order

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सतना. जिले में सरकारी जमीनों के फर्जीवाड़े के बड़े मामले लगातार सामने आ रहे हैं। स्थिति यह है कि यहां पर लोगों ने राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से फर्जी तरीके से सरकारी जमीनें अपने नाम करवा ली। मिलीभगत का खेल ऐसा रहा कि सरकारी जमीनें अचानक से खसरे में आदेश का हवाला देते हुए निजी स्वामित्व की हो गईं लेकिन सरकारी अभिलेखों के अनुसार संबंधित आदेश कभी हुआ ही नहीं। यह सब कुछ जांच में सामने आया भी। लेकिन बाद में मामला अधिकारी बदलने के साथ ही ठंडे बस्ते में चला गया। ऐसा ही मामला सतना शहर के सबसे पाश इलाके मास्टर प्लान का सामने आया है। यहां ऐसे ही फर्जी आदेश के सहारे तत्कालीन कलेक्ट्रेट से लगी बेशकीमती म्युनिस्पलिटी की 2 एकड़ सरकारी जमीन निजी स्वामित्व में हो गई।

यह है मामला

पुराने कलेक्टर कार्यालय से लगे मास्टर प्लान सिविल लाइन सतना की आराजी क्रमांक 49 जिसका रकवा 7 एकड़ था, यह भूमि आबादी नगर पालिका सतना शासन म.प्र. के भू-स्वामित्व की जमीन थी। अर्थात शासकीय भूमि थी। लेकिन इस आराजी के दो अंश भाग फर्जी अलाटमेंट करते हुए खसरे में फर्जी तरीके से इंट्री कर दी गई। एक हिस्सा 49/1 अलग करते हुए रामप्रसाद श्रीवास्तव के नाम कर दिया गया। दूसरा अंशभाग 49/2 अंकित कर आरपूना आईएएस कलेक्टर के नाम चढ़ाया गया। जबकि जिस आदेश का हवाला देकर खसरे में जमीन सरकारी से निजी की गई वास्तव में ऐसा कोई आदेश जारी ही नहीं किया गया था।

जांच में भी साबित हुआ था फर्जीवाड़ा

इस मामले की जांच तत्कालीन कलेक्टर मनीष रस्तोगी के आदेश पर एसडीएम रघुराजनगर ने की थी। इसके लिये तहसीलदार को अभिलेख परीक्षण का जिम्मा दिया गया था। तहसीलदार की जांच रिपोर्ट के बाद एसडीएम रघुराजनगर ने अपने प्रतिवेदन में इसे स्पष्ट रूप से फर्जीवाड़ा निरूपित किया था। एसडीएम ने लिखा था कि मास्टर प्लान स्थित आराजी नं. 49/1 रकवा 7.00 एकड़ में 2.00 एकड़ रकवा कम किया जाकर रामप्रसाद श्रीवास्तव के नाम खाता कायम किया गया है। लेकिन इस खाता कायमी के समय अभिलेख पर किसी भी आदेश का कोई हवाला दर्ज नहीं है। इस प्रकार रामप्रसाद श्रीवास्तव के नाम अवैधानिक तरीसे से भूमि का खाता बगैर किसी सक्षम आदेश के कायम किया गया है।

कलेक्टर ने भी अपने नाम कराई जमीन

तत्कालीन कलेक्टर कार्यालय से लगी इस जमीन पर एक आईएएस अधिकारी की भी नजर थी। खसरे के अनुसार इस आराजी का अंश भाग 49/2 आर पूना आईएएस कलेक्टर वल्द गंगा दयाल हाल मुकाम सतना मुकाम रायगढ़ के नाम पर ही चढ़ा दिया गया था। लेकिन यह जमीन किस आदेश से उनके नाम हुई इसका भी कोई हवाला होना नहीं पाया गया है। अर्थात ऐसा कोई आदेश शासकीय अभिलेखों में नहीं पाया गया। हालांकि बाद में वे अपनी यह जमीन बेचकर चलते बने।

' मामला गंभीर है। अगर जांच रिपोर्ट में बंटन संबंधी सक्षम आदेश नहीं होने की बात कही गई है तो इन जमीनों को शासकीय होना चाहिए था। इस मामले को अगले दिन दिखवाया जाएगा। '

- अजय कटेसरिया, कलेक्टर