जिले से नहीं हुआ प्रारंभिक प्रकाशन
सतना। ग्राम पंचायत मझगवां को नगर परिषद के रूप में गठित करने का मामला महज झुनझुना साबित हुआ है। स्थिति यह है कि अभी तक इस संबंध में जिला प्रशासन द्वारा प्रारंभिक अधिसूचना का प्रकाशन ही नहीं किया गया और प्रकाशन का प्रारूप शासन को भेज दिया गया। उधर विभाग भी एक साल तक इस मामले में चुप्पी साधे बैठा रहा। अब जाकर उसे होश आया है तो कलेक्टर को प्रारंभिक प्रकाशन करने के लिए लेख कर खानापूर्ति कर दी गई।
ये है मामला
चित्रकूट उपचुनाव के कुछ समय पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहाने ने मझगवां की एक सभा में मझगवां को नगर पंचायत का दर्जा देने की घोषणा की थी। घोषणा के परिपालन में तय नियमानुसार जिला प्रशासन द्वारा ग्राम पंचायत मझगवां को नगर पंचायत बनाने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया। इस पर विभाग द्वारा 8 सितंबर 2017 को ग्राम पंचायत मझगवां को नगर परिषद बनाने के लिये कलेक्टर को प्रारंभिक प्रकाशन करने की अनुमति प्रदान की गई थी। लेकिन कलेक्टर ने प्रारंभिक प्रकाशन न करते हुए प्रकाशन का प्रारूप विभाग को भेज दिया।
विभाग ने वापस लौटाया
कलेक्टर द्वारा प्रारंभिक प्रकाशन का प्रारूप भेजे जाने को नियम संगत न मानते हुए 25 सितंबर 2017 को प्रकाशन का प्रारूप वापस जिला प्रशासन के पास भेज दिया। साथ ही विभाग ने कलेक्टर को यह निर्देश दिए गए कि प्रारंभिक अधिसूचना का प्रकाशन राजपत्र एवं स्थानीय दैनिक समाचार पत्रों में कराकर दावे आपत्तियां मांगी जाए। इसके बाद इनका निराकरण करने के उपरांत अंतिम प्रकाशन के लिये अधिसूचना के प्रारूप सहित प्रस्ताव नगरीय विकास एवं आवास विभाग मंत्रालय को भेजा जाए। लेकिन जिला स्तर पर शासन के इस पत्र को गंभीरता से नहीं लिया गया और मामले को हाशिये पर डाल दिया गया।
फिर मांगा प्रस्ताव
मामले को एक साल हो चुके हैं और विस चुनाव 2018 के लिए आचार संहिता लागू हो चुकी है तो एक बार फिर मझगवां को नगर पंचायत बनाने का जिन्न बोतल से बाहर निकल आया है। 8 अक्टूबर को पत्र क्रमांक एफ 1-39/2017/18-3 के माध्यम से मुख्यमंत्री की घोषणा से जुड़े इस मामले शीघ्र कार्रवाई कर प्रस्ताव चाहा गया गया है। लोकेश कुमार जांगिड़ उपसचिव के हस्ताक्षर से जारी इस पत्र के बाद अब यह भी साबित हो गया है कि मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार अभी तक मझगवां को नगर परिषद का दर्जा नहीं मिल सका है।