
Ground Report MP: rampur baghelan vidhan sabha chunavi lahar
राजीव जैन@रामपुर बाघेलान। मंत्री हर्ष सिंह और उनके परिवार की परंपरागत सीट रही है। कभी दादा अवधेश प्रताप सिंह विंध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। इसके बाद चुनाव जीतकर पिता गोविंद नारायण सिंह मुख्यमंत्री बने। हर्ष सिंह खुद चार बार विधायक (दो बार कांग्रेस, एक बार समानता दल और एक बार भाजपा) रहे हैं। अब इसी परिवार की चौथी पीढ़ी से उनके बेटे विक्रम सिंह मैदान में है। 1985 के बाद से जीत को तरस रही कांग्रेस ने इस ब्राह्मण बाहुल्य सीट पर स्थानीय ब्राह्मण रामशंकर पयासी को उतारकर मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है।
1985 में भी यह सीट कांग्रेस के लिए हर्ष सिंह ने ही जीती थी। बसपा के पूर्व विधायक रामलखन सिंह पटेल अपने प्रभाव और जातिगण समीकरण के भरोसे फिर मैदान में हैं। वे 2008 में हर्ष को हरा चुके हैं, इसलिए न तो उन्हें प्रत्याशी हल्के में ले रहे हैं, न मतदाता। पिछले तीन चुनाव में यहां मुकाबला भाजपा और बसपा के बीच ही रहा है।
चर्चा कम और जातियों की ज्यादा
क्षेत्र में विकास, स्थानीय को रोजगार प्रमुख मुद्दे हैं। इलाके में इनकी चर्चा कम और जातियों की ज्यादा है। रीवा और सतना के बीच हाइवे पर बसे रामपुर बाघेलान के लोग तो दस साल से ज्यादा से बनते हुए हाइवे और उड़ती धूल से आजिज आ चुके हैं। अब तो यह हाल है कि सड़क तो उनके लिए मानों कोई मुद्दा ही नहीं है। सज्जनपुर के अमृतलाल ने बताया कि खाद-बीज की कीमत खूब बढ़ी है, नहरों में समय पर पानी नहीं छोड़ा जा रहा। परिवर्तन की लहर है, बाकी देखिए क्या होता है। रघुनाथपुर के उग्रसेन सिंह ने कहा कि किसानों के लिए सरकार ने योजनाएं तो चलाई, पर वाजिब लोगों को लाभ नहीं मिला। कांग्रेस ने कर्जमाफी का वादा किया, लेकिन यहां उसकी जमीन मजबूत नहीं है।
बारिश में पैदल निकलना भी दूभर
रजरवार के देवशंकर पयासी ने कहा, गांव की सड़क जर्जर है। बारिश में पैदल निकलना भी दूभर हो जाता है। अबेर के मृगेन्द्र सिंह कहते हैं क्षेत्र में परिवर्तन की लहर है। लोगों में नाराजगी है, फिर भी विक्की भइया (विक्रम) से लोग खुश हैं। लोग जाति देखकर मतदान करते हैं। खोहर के विक्रम सिंह का कहना है कि क्षेत्र में सीमेंट फैक्ट्रियां हैं, पर स्थानीय युवाओं को रोजगार नहीं मिलता। वादा था कि 80 फीसदी कर्मचारी स्थानीय रखे जाएंगे, पर ऐसा नहीं हुआ।
मुरुम डालकर चलने लायक बना दिया
पिछले कई चुनाव में कांग्रेस कमजोर रही, अब देखना है कि बदलाव की ये बयार किसे फायदा पहुंचाती है। कर्रा के कमलेश कुशवाहा ने कहा, गांव की सड़क जर्जर है। पुलिया टूट गई थी तो दूसरी बनाने की बजाय मुरुम डालकर चलने लायक बना दिया। गाड़ा के कृष्णपाल दाहिया कहते हैं कि दस साल हो गए पर आज भी एनएच-७५ का काम चल रहा है, मंत्री कुछ खास नहीं कर पाए। कांग्रेस भी कमजोर विपक्ष के रूप में दिखी।
सरकार की हर योजना को अंतिम छोर तक पहुंचाया है। ग्रामीण सड़कों के निर्माण के मामले में रामपुर बाघेलान विधानसभा प्रदेश के टॉप फाइप क्षेत्र में शामिल है।
विक्रम सिंह, भाजपा प्रत्याशी
विकास के मामले में भाजपा सरकार लापरवाह रही। मंत्री का गृह क्षेत्र होने के बाद भी विकास कोसों दूर है। स्कूल, शिक्षा, अस्पताल, सड़क क्षेत्र के लिए बेमानी साबित हो रहे हैं। जनता इनसे त्रस्त है।
रामशंकर पयासी, कांग्रेस प्रत्याशी
दो बार लोगों ने मेरे काम को देखा है। वो जानते हैं कि मैं हमेशा जनता के बीच रहता हूं। रामपुर किसी एक परिवार तक सिमट कर नहीं रह सकता है। जनता पर भरोसा है कि वो जमीनी नेता को चुनेगी।
रामलखन सिंह, बसपा प्रत्याशी
15 साल में ये रहे विधायक
- 2013 हर्ष सिंह, भाजपा
- 2008 रामलखन पटेल, बसपा
- 2003 हर्ष सिंह, समानता दल
Published on:
24 Nov 2018 03:48 pm
