
satna family planning
सतना. जिले में राष्ट्रीय परिवार कल्याण कार्यक्रम में जमकर गफलत की जा रही है। परिवार नियोजन के लक्ष्य को महिलाओं के भरोसे पूरा करने आंकड़ों की बाजीगरी की जा रही है। किसी भी ब्लाक में पुरुष नसबंदी का 10 प्रतिशत लक्ष्य पूरा नहीं किया जा सका है। जिलेभर में एक वर्ष में महज 128 एनएसवी किए गए। परिवार कल्याण कार्यक्रम में लापरवाही को स्वास्थ्य महकमे की रिपोर्ट खुद ही उजागर कर रही है। महकमे के जिम्मेदार भी लापरवाही पर कार्रवाई करने की बजाय उल्टे पर्दा डाल रहे हैं।
निजी अस्पताल भी दिखा रहे ठेंगा
स्वास्थ्य महकमे के निर्देश को जिले के निजी चिकित्सा संस्थान भी ठेंगा दिखा रहे हैं। निजी अस्पतालों की मनमनी का आलम यह है कि सालभर में एनएसवी का महज एक ऑपरेशन किया गया। 224 महिलाओं के नसबंदी ऑपरेशन किए गए हैं। जिम्मेदार राष्ट्रीय कार्यक्रम में निजी संस्थानों का लक्ष्य तय नहीं कर पाए हैं।
50 फीसदी भी लक्ष्य पूरा नहीं
महकमे को कुल बीस हजार नसबंदी का लक्ष्य सौंपा गया था। दिसबंर तक 7140 ऑपरेशन ही किए जा सके। जो सौंपे गए कुल लक्ष्य का महज 44 फीसदी ही है। लापरवाही के चलते महकमा पचास फीसदी भी लक्ष्य हासिल नहीं कर पाया है। परिवार कल्याण कार्यक्रम में प्रत्येक वर्ष लापरवाही सामने आती है लेकिन कार्रवाई महज नोटिस तक ही सिमट कर रह जाती है।
प्रेरित करने में नाकाम
परिवार नियोजन के लक्ष्य को स्वास्थ्य महकमा महिलाओं के भरोसे पूरा करने की बाजीगरी कर रहा है। पुरुषों को प्रेरित करने में महकमा नाकाम साबित हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अप्रेल से दिसंबर १७ तक महिलाओं के 7012 ऑपरेशन किए गए, पुरुषों के महज 128 ऑपरेशन हुए। जिले को तीन हजार से अधिक पुरुष नसबंदी का लक्ष्य सौंपा गया था। कार्यक्रम की समीक्षा भी नहीं की जाती है, जिसके चलते जिले से लेकर ब्लॉक स्तर तक जमकर लापरवाही की जा रही है।
सभी ब्लॉक फिसड्डी
विकासखंडों को तीन से छह सौ पुरुष नसबंदी का लक्ष्य दिया गया था। लेकिन सभी विकासखंड फिसड्डी साबित हुए। किसी भी विकासखंड द्वारा लक्ष्य हासिल नहीं किया जा सका है। अब एक माह में साल भर का लक्ष्य कैसे पूरा हो पाएगा यह बड़ा सवाल है।
Published on:
23 Feb 2018 10:06 am
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