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यहां GST बेअसर,आज भी कच्चे बिल पर हो रहा 80% कारोबार

जिला मुख्यालय में हर माह लाखों की जीएसटी चोरी महकमा नहीं दे रहा ध्यान

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सतना. जीएसटी यानी वस्तु एवं सेवा कर देश में लागू होने से पहले केन्द्र सरकार ने इसके कई फायदे गिनाए थे। उसमें एक लाभ यह भी था की जीएसटी लागू होने के बाद ग्राहकों को कच्चे बिल से मुक्ति मिल जाएगा। हर दुकानदार ग्राहक को पक्का बिल देगा। लेकिन जीएसटी लागू होने के दो वर्ष बीत जाने के बाद भी पक्के बिल की अवधारणा सतना जिले में लागू नहीं हो सकी। जिले में आज भी ८० फीसदी व्यापार कच्चे बिल पर दौड़ रहा है वह भी बिना रोक टोक के। परचून की दुकान हो या गारमेंट की, कपड़े की दुकान हो या इलेक्ट्रिक का सामान, होटल हो या रेस्टेरेंट। जिले में प्रतिदिन करोड़ों का कारोबार करने वाले हार्ड वेयर ,बालू गिट्टी एवं सरिया के कारोबारी भी उपभोक्ताओं को कच्चा बिल थमाकर हर माह सरकार को लाखों रुपए टैक्स का चुना लगा रहे हैं।

अलग से जीएसटी जोड़कर कर रहे गुमराह
कच्चे बिल पर एक लाख की सरिया खरीदने वाले एक ग्राहक से जब यह जानकारी ली गई कि आप ने दुकानदार से पक्का बिल क्यों नहीं लिया तो उन्होंने बताया की पक्का बिल मागने पर व्यापारी १८ फीसदी जीएसटी अलग से जोड़कर बिल बना रहा था। इसलिए कच्चा बिल लेना पड़ा। यह कहानी किसी एक ग्राहक की नहीं जिले में पक्का बिल मागने वाले हर उपभोक्ता को व्यापारी बिल में अलग से जीएसी जोड़ कर डरा रहे हैं। इसलिए उपभोक्ता चाह कर भी पक्का बिल लेने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। व्यापारियों का अलग से जीएसटी चार्ज जोडऩे का यह फंडा टैक्स चोरी का कारण बन रहा है। डिस्काउंट का मिलता है लालच
खरीदारी के वक्त टैक्स बचाने के लिए कई दुकानदार डिस्काउंट का ऑफ र भी देते हैं। ग्राहक मिल रही खुली रियायत को फायदा समझ बिल लेने के बजाय उत्पाद लेकर ही संतोष कर लेते हैं। इससे जहां एक ओर सरकार को टैक्स की चपत लगती है वहीं इसका खामियाजा ग्राहकों को सामग्री में शिकायत आने के बाद भुगतना पड़ता है,जब सर्विस सेंटर वारंटी देने से इनकार कर देता है।
ग्राहक में जागरूकता जरूरी
टैक्स चोरी रोकने के लिए सरकार विज्ञापन व कई माध्यमों से प्रचार-प्रसार कर रही है। इसके बावजूद लोगों में जागरूकता की कमी है। ग्राहक खरीदारी के वक्त वस्तु की गुणवत्ता व बिलिंग को लेकर तत्पर रहेंगे तो उनके द्वारा की जा रही खरीदारी का लाभ सिर्फ दुकानदारों को मिलने के बजाय सरकार को भी होगा। राज्य कर सेवा के अधिकारियों का कहना है जब तक ग्राहण जीएटी व पक्का बिल लेने के लाभ को नहीं समझेगे तब टैक्स चोरी रोकना संभव नहीं हैं।
मुद्दे की बात
किसी भी वस्तु के एमएसपी रेट के साथ उस पर लगने वाले सभी टैक्स जुड़े होते हैं। इसलिए कोई भी दुकानदार पक्का बिल देते समय ग्राहक से उस वस्तु में दर्ज मूल्य से अधिक पैसा नहीं ले सकता।
वर्जन
जीएसटी लागू होने के बाद शहर में टैक्स कलेक्शन बढ़ा है। लेकिन अभी भी कई व्यापारी कच्चे बिल पर व्यापार कर जीएसटी की चोरी कर रहे हैं। एेसे व्यापारियों को चिन्हित किया जा रहा है। जल्द ही दुकानों में सर्वे का जीएसटी चोरी की जानकारी ली जाएगी।
शीतल मिश्रा,सीटीओ शहर सर्किल