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बांधवगढ़ सफारी पिकनिक मनाने गए प्रेक्षकों पर कार्रवाई की मांग को लेकर स्मरण पत्र, आगे जानिए…

चेक लिस्ट पर भी उठाए सवाल

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सतना

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Suresh Mishra

Nov 22, 2018

IAS officer picnic spot Bandhavgarh article in Madhya Pradesh Election

IAS officer picnic spot Bandhavgarh article in Madhya Pradesh Election

सतना। विधानसभा चुनाव के लिए नियुक्त प्रेक्षकों की पिकनिक मामला ठंडा होता नजर नहीं आ रहा है। जबलपुर, शहडोल और रीवा संभाग के करीब 19 प्रेक्षकों की बांधवगढ़ में सरकारी सुविधा पर पिकनिक मामले में आरटीआइ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने चुनाव आयोग को स्मरण पत्र भेज कर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही प्रेक्षकों को प्रदेश सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाओं की चेक लिस्ट पर भी सवाल खड़े किए हैं।

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और निर्वाचन आयुक्त को लिखे स्मरण पत्र में अजय दुबे ने कहा कि मध्यप्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए नियुक्त चुनाव प्रेक्षकों के माध्यम से निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव करवाने के आयोग के दावों और कोशिशों को हाल में ही जबलपुर, शहडोल और रीवा संभाग के करीब 19 प्रेक्षकों के द्वारा बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में अवांछित सरकारी सुविधा से पर्यटन लाभ, अमर्यादित आचरण और आपत्तिजनक गतिविधियों से गहरा आघात पहुंचा है।

सप्रमाण सूचना पर आयोग ने कलेक्टर सतना से जांच करवाई। कलेक्टर की जांच रिपोर्ट में शिकायत सही पाई गई है और प्रमाणों की पुस्टि भी हुई है। पर आज दिनांक तक विधिसम्मत कार्रवाई दोषियों के विरुद्ध नहीं की गई है। इससे आयोग की छवि पर गलत असर पड़ रहा है।

गहराई से कराई जाए जांच
दुबे ने आयोग से अपेक्षा की है कि सतना जिले के 4 प्रेक्षकों के अलावा वहां रुके शेष प्रेक्षकों के विरुद्ध भी गहराई से जांच करवाकर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहां शासकीय वेटरनरी डॉक्टर ने प्रेक्षकों के रुकने के खर्च का भुगतान किया है, यह भी गंभीर अनियमितता है। इसकी भी जांच होनी चाहिए। साथ ही प्रेक्षकों के लिये मप्र सरकार की मप्र पर्यटन विकास निगम, बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन और स्थानीय पुलिस की ताला पर्यटन चौकी ने टाइगर रिजर्व भ्रमण हेतु वाहन इत्यादि की व्यवस्था प्रायोजित की थी। टाइगर रिज़र्व प्रबंधन, पुलिस, स्थानीय एसडीएम और पुलिस चौकी प्रभारी वीरेंद्र यादव से पूछताछ और अभिलेख देखकर समूचे मामले की निष्पक्ष जांच की भी बात कही गई है।

सोडा-ड्राइ फ्रूटपर सवाल
आरटीआइ एक्टिविस्ट ने आयोग को बताया है कि मप्र सरकार ने प्रेक्षकों की सुविधाओं की जारी चेक लिस्ट में आवश्यक वस्तुओं के अलावा सोडा और ड्राइ फ्रूट का जिक्र भी है। इसे अनुचित बताते हुए कहा कि चुनाव जैसे संवेदनशील विषय से जुड़े प्रेक्षकों को यह सुविधाएं देना उनको प्रभावित करने की कोशिश है।