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औद्योगिक नगरी का ताज खतरे में: बंद हो गए कृषि उद्योग, नहीं खुला एक भी कारखाना

15 साल में साकार नहीं कर पाए फूड पार्क का सपना
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सतना

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Suresh Mishra

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Updated: 7 Oct 2018, 11:40 AM IST

industrial area satna madhya pradesh

industrial area satna madhya pradesh

सतना। औद्योगिक नगरी के कृषि उद्योग एक-एक कर दम तोड़ रहे हैं। जबकि सतना के उद्यमों से प्रदेश सहित कई राज्यों को दाल व तेल की आपूर्ति होती रही है। लेकिन, वर्तमान स्थिति में कृषि आधारित उद्योग काफी खराब दौर से गुजर रहे हैं। अगर यही हालात रहे, तो जिले को मिला औद्योगिक नगरी का ताज खतरे में पड़ जाएगा। इसका अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि गत एक दशक में जिले की 80 फीसदी दाल और तेल मिलों पर ताले लटक चुके हैं।

वहीं दूसरी ओर जिले में एक भी औद्योगिक क्षेत्र शासन विकसित तक नहीं कर पाया है। जबकि जिले में बढ़ते कृषि उत्पादन और गुणवत्ता युक्त सब्जी व फलों की खेती को देखते हुए प्रदेश सरकार ने फूड पार्क बनाने की घोषणा की थी। ताकि किसानों को उनकी फसल का उचित दाम मिल सके और युवाओं को रोजगार उपलब्ध हो। ये फूडपार्क मैहर में स्थापित होना था। लेकिन 15 वर्ष बीत जाने के बाद भी सपना साकार नहीं हो सका।

28 दाल व 12 तेल मिल बंद
जिले के गल्ला करोबारियों का कहना है कि दस साल पहले तक शहर में 35 दाल मिल व 17 तेल मिल थी। पर शहर में नो इंट्री लगने, सरकार व प्रशासन से आर्थिक मदद न मिलने के कारण अधिकांश संचालक अपना करोबार समेट दूसरे जिलों में शिफ्ट हो गए। इसका अनुमान इससे लगाया जा सकता है कि बीते दस साल के अंदर शहर में स्थित 28 दाल मिल व 12 तेल मिलों में ताले लटक चुके हैं। जो मिले संचालित हैं, वो भी प्रशासन से आपेक्षित सहयोग न मिलने के कारण बंद होने की कगार पर हैं।

सीमेंट उद्योग ने तोड़ी लघु उद्योगों की कमर
मिल संचालक व गल्ला व्यापारियों का कहना है कि सरकार ने पूरा ध्यान जिले में सीमेंट उद्योग विकसित करने में लगाया। जिले में एक के बाद एक कई सीमेंट उद्योग खुलने से लघु उद्योगों में कार्यरत श्रमिक पलायन कर गए। छोटे उद्योगों को बढ़ावा देने में प्रशासन और सरकार ने मदद नहीं की। छोटे उद्योगों को पर्याप्त कच्चा माल और सुविधाएं न मिलने से यह घाटे में चले गए। बची कसर नो एंट्री ने पूरी कर दी।

आकार नहीं ले सका मटेहना औद्योगिक क्षेत्र
शहर विकास को देखते हुए शहर से लगी मटेहना की सरकारी जमीन को अद्योगिक क्षेत्र के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई थी। इससे जिले के मिलर व उद्योगपतियों में आस जगी थी कि शहर के बाहर सर्व सुविधायुक्त आद्यौगिक क्षेत्र विकसित होने से कई उद्योग लगेंगेे। लेकिन जिला प्रशासन की अनदेखी और जन प्रतिनिधियों की खीचतान के चलते मटेहना औद्योगिक क्षेत्र भी आकार नहीं ले सका। प्रशासन की पूरी कवायद व्यापारियों को प्लाट आवंटित करने से आगे नहीं बढ़ पाई।

उजड़ गया शहर का इकलौता औद्योगिक क्षेत्र
शहर का पहला और इकलौता सिंधी कैंप औद्योगिक क्षेत्र सरकार से आपेक्षित सहयोग न मिलने एवं जन प्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते विकसित होने से पहले ही उजड़ चुका है। औद्योगिक क्षेत्र में उद्यमियों को सुविधाएं न मिलने से उद्योगों में ताले लग रहे हैं। जिस औद्योगिक क्षेत्र में उद्योग विभाग द्वारा 97 लघु उद्योग संचालित होने का दावा करता है। उसकी जमीनी हकीकत यह है कि आद्यौगिक क्षेत्र में महज दो दर्जन कारखाने ही चल रहे हैं। अंधाधुंध अतिक्रमण के कारण पूरा औद्योगिक क्षेत्र रहवासी क्षेत्र में तब्दील हो चुका है।

राहुल गांधी ने उठाया था मुद्दा
विंध्य में अपनी चुनावी कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने विंध्य के उद्योगों की दुर्दशा का मुद्दा उठाया था। भले ही उनका भाषण राजनीतिक था, लेकिन सतना के उद्यमों के लिए कटु सत्य है।

ये उठाने होंगे कदम
- समस्याओं को चिह्नित कर निराकरण के लिए उठाने होंगे कदम।
- उद्यम हाइवे किनारे स्थापित हों और नो-एंट्री जैसी व्यवस्था का असर न हो।
- कृषि उत्पादन के मद्देनजर उद्यम लगे। तेल व दाल मिलों को बढ़ावा दिया जाए।
- बड़े उद्यमों के सहयोग के लिए लघु उद्यम स्थापित हों।
- औद्योगिक क्षेत्रों में मूलभूत संसाधन विकसित किए जाएं।
- फूडपार्क को तत्काल विकसित किया जाए।
- बंद उद्यमों को चालू करने ठोस नीति लाई जाए।

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