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फिल्मी अंदाज में अपनी प्रेमिका को आजाद कराने पहुंचा लोको पायलट, सबके सामने भर दी मांग

सतना के लोको पायलट की प्रेम कहानी: लड़की के परिजन शादी का कर रहे थे विरोध, बना लिया था बंधक

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inter caste marriage in patna state women commission office

inter caste marriage in patna state women commission office

सतना। पश्चिम मध्य रेलवे के एक लोको पायलट की प्रेम कहानी इन दिनों पूरे बिहार सहित देशभर में छायी हुई है। अपने बचपन के प्यार को पाने के लिए लोको पायलट ने बिहार राज्य महिला आयोग की मदद ली। परिजनों द्वारा दो माह से बंधक बनाई गई प्रेमिका को मुक्त कराया। फिर महिला आयोग के दफ्तर में प्रेमिका की मांग में सिंदूर भरा और अपना बना लिया।

इस शादी से जहां दो प्रेमी परिणय सूत्र में बंध गए। वहीं इनकी अनोखी प्रेम कहानी अन्य प्रेमियों के लिए भी नजीर बन गई। शादी के बाद रेल चालक अपनी हम सफर के साथ ग्रहस्थ जीवन में प्रवेश कर चुका है। अब दोनों नव दंपति खुशी-खुशी अपनी प्रेम कहानी औरों को सुना रहे है।

ये है मामला
बिहार के रोहतास जिले के सासाराम निवासी विशाल विवेक कुशवाहा सतना में लोको पायलट हैं। उनका पड़ोस में रहने वाली उत्कर्षा से बचपन से प्रेम संबंध था। दोनों शादी के लिए भी राजी थे। लेकिन, उत्कर्षा का परिवार ऊंची जाति का था। ऐसे में शादी की अनुमति नहीं मिलनी थी, यह बात दोनों जानते थे। इसी डर से घरवालों को बताने की कभी हिम्मत नहीं जुटा पाए। जब विशाल विवेक कुशवाहा की रेलवे में नौकरी लग गई तो उन्होंने अपना प्रस्ताव उत्कर्षा के माध्यम से उसके परिजनों के सामने रखा। यह सुन परिजन नाराज हो गए।

केवल कमरे में खाना-पानी देते थे परिजन
उन्होंने उत्कर्षा को एक कमरे में बंधक बना दिया। किसी से मिलने पर पाबंदी लगा दी। केवल कमरे में खाना-पानी पहुंचा दिया जाता था। जब काफी समय हो गया तो विशाल विवेक ने उत्कर्षा को मुक्त कराने की ठानी। उन्होंने बिहार राज्य महिला आयोग को संपर्क किया। आयोग ने मामला संज्ञान लिया और स्थानीय प्रशासन के माध्यम से उत्कर्षा से संपर्क साधा गया। जब उत्कर्षा व विशाल विवेक की कहानी सही लगी तो आयोग ने उत्कर्षा को पटना बुलाया। परिजनों के नाराजगी के बावजूद आयोग दफ्तर में ही दोनों की धूमधाम से गुरुवार को शादी करा दी गई।

दो माह तक बंधक
विशाल विवेक व उत्कर्षा की प्रेम कहानी में कदम-कदम पर संघर्ष है। उन्हें पहले ही मालूम था कि अंतरजातीय विवाह होने के कारण परिजन नहीं मानेंगे। विशाल विवेक की नौकरी लगने तक दोनों परिजनों से छिपाते रहे। जब नौकरी लग गई तो दोनों की कोशिश थी कि परिजनों से छिपकर या भागकर शादी नहीं करेंगे। लिहाजा, परिजनों को बताने का निर्णय लिया। यह कदम दोनों के लिए चुनौती लेकर आया। करीब दो माह तक उत्कर्षा को परिजनों ने बंधक बनाकर रखा।