
... Is Corona positive getting a clean chit from the wrong screening
सतना. अन्य प्रांतों से जिस भारी संख्या में इन दिनों प्रवासी आ रहे हैं उनमें से ज्यादातर सूरत, अहमदाबाद, नासिक, मुंबई जैसे कोरोना संभावित क्षेत्रों से ज्यादा हैं। इन आने वाले प्रवासियों में कोई कोरोना पॉजिटिव तो नहीं है इसकी प्राथमिक जांच का एक ही तरीका है 'स्क्रीनिंग'। स्क्रीनिंग का यह काम चिकित्सा अमले द्वारा किया जा रहा है। इसमें सबसे पहले संबंधित व्यक्ति का तापमान चेक किया जाता है। इसके लिये स्वास्थ्य विभाग ने विशेष थर्मल स्कैनिंग गन मंगाई है। जिसके माध्यम से बिना शरीर को छुए ही दूर से व्यक्ति के शरीर का तापमान जांचा जा सकता है। इसके लिये व्यक्ति की दोनों आंखों के बीच के हिस्से में माथे से तय दूरी पर यह गन रखी जाती है। ऐसा करने पर गन की स्क्रीन पर संबंधित व्यक्ति का तापमान नजर आने लगता है।
लेकिन सजगता बहुत जरूरी
इस गन के बाक्स में साथ आए पर्चे में गन के उपयोग का तरीका भी लिखा गया है। जिसमें स्पष्ट है कि गन को माथे से 0 से 3 सेन्टी मीटर दूर रखकर तापमान मापना है। ऐसा नहीं करने पर गन सही रिजल्ट नहीं देगी। लेकिन देखने में आ रहा है कि प्रशिक्षण के अभाव में या फिर लापरवाही में स्वास्थ्य अमला तापमान मापने के लिए दूरी को नजर अंदाज कर देता है। जानकारों का कहना है कि ऐसा करने पर शरीर का तापमान सही नहीं दर्ज होता है।
वातावरण का तापमान भी महत्वपूर्ण
थर्मन गन के उपयोग के दौरान आसपास का वातावरण भी तय किया गया है। यह गन 15 डिग्री से 40 डिग्री के बीच सही काम करती है। अर्थात स्पष्ट है कि जब शरीर का तापमान जांचा जाए उस वक्त वहां का तापमान 15 से 40 डिग्री के बीच होना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर सही रिजल्ट नहीं आएगा। लेकिन देखने में आ रहा है तेज गरमी के दौरान चेक पोस्ट पर वातावरण का तापमान 43 तक पहुंच रहा है। ऐसे में गन सही रिजल्ट देगी इस पर संदेह है।
तो नहीं पकड़ में आएगा कोरोना पॉजिटिव
थर्मल गन के विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर गन की शरीर से सही दूरी और सही वातावरण में तापमान नहीं नापा जा रहा है तो उससे सही रिजल्ट नहीं मिलेगा। ऐसे में गन या तो एरर मैसेज दे देगी या गलत तापमान बताएगी। इससे संभावना है कि कोरोना संदिग्ध व्यक्ति बच सकता है।
Published on:
15 May 2020 11:52 pm
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