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बेतरतीब विकास: बदहाल सड़कों से परेशान शहरी बोले, सफेद कपड़े पहनकर निकलना गुनाह

1000 करोड़ के निर्माण में उलझा शहर का विकास, धूल फांक रही जनता

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सतना

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Suresh Mishra

Oct 19, 2018

jar jar road in satna city

jar jar road in satna city

सतना। शहर सहित जिले भर की जर्जर सड़कें लोगों के लिए मुसीबत बन चुकी हैं। शहर की सड़कों की हालत तो एकदम से खस्ता है। चाहे रीवा रोड हो या फिर कॉलोनियों की सड़कें, राहगीरों का पैदल चलना मुश्किल हो जाता है। बड़े-बड़े गड्ढे, उड़ती धूल और निकले सरिया ही इन सड़कों की पहचान है। गुरुवार को पत्रिका ने सड़कों को लेकर कुछ राहगीरों से बात की तो अधिकांश ने कहा, इन सड़कों पर सफेद कपड़े पहनकर निकलना गुनाह है।

ये है मामला
रीवा रोड पर पैदल जा रहे एक सज्जन ने अपनी धूल से सनी शर्ट दिखाते हुए कहा कि साहब, अब तो विकास की बात ही मत करिए। शहर की सड़कों पर सफेद कपड़े पहनना मुश्किल हो गया है। हमारी छोडि़ए, इन बेचारे व्यापारियों से पूछिए जो बीते तीन साल से रात दिन विकास की धूल खा-खा कर मोटे हो गए हैं। धंधा आखिरी सांस गिन रहा है। इनकी किस्मत में विकास की एेसी धूल बैठी कि छंटने का नाम नहीं ले रही।

एक हजार करोड़ से अधिक के विकास कार्य
बता दें कि स्मार्ट हो रहे शहर में एक हजार करोड़ से अधिक के विकास कार्य प्रगति पर है। पर इनकी धीमी चाल ने शहर को अस्त व्यस्त कर दिया है। २४ घंटे पानी उपलब्ध कराने जलावद्र्धन योजना , सीवर लाइन, फ्लाइओवर जैसे बड़े कार्य प्रगति पर हैं। लेकिन इनकी आड़ में ठेका एजेंसियों ने जो बेतरतीब निर्माण किए हैं। उनसे पूरा शहर बेहाल है। गली से लेकर मुख्य मार्ग तक सड़कें चलने लायक नहीं बचीं। गड्ढों में तब्दील सड़कों पर हिचकोले खाती जनता को विकास की जगह शहर में सिर्फ धूल नजर आ रही है।

एेसा विकास किस काम का
होटल सवेरा के पास चाय-समोसे की गुमटी में चाय की चुस्की ले रहे लोगों से यह पूछा कि पांच साल में शहर में कितना विकास हुआ तो सबने बेकाबी से अपनी राय दी। त्रिलोचन शुक्ला ने कहा कि विकास तो खूब हुआ, लेकिन कहीं दिखाई नहीं दे रहा। अनुरूप सिंह ने कहा कि विकास के नाम पर नेता एवं नगर निगम जनता को -बेवकूफ बना रहा है। चार साल में रीवा रोड के गड्ढे भर नहीं पाए और क्या विकास करेंगे।

फुटपाथ बनाने के नाम पर खदेड़ा
चाय बेच रहे दद्दू भाई ने बताया कि दो साल में दस बार गुमटी हटा चुके हैं। कभी फुटपाथ बनाने के नाम पर खद़ेड़ा जाता है तो कभी नाला के नाम पर। हम फुटपाथी दुकानदार भी इसी शहर के हैं। सरकार हमें भी दुकान लगाने सड़क किनारे जमीन उपलब्ध कराए। तभी वहां बैठे ज्ञान सिंह ने कहा, रीवा रोड पर तो काम चल रही रहा है। कॉलोनियों की सड़कों की हालत भी खराब है। जहां सड़कें सही हैं, वहां जलावद्र्धन के ठेकेदार खोदकर सत्यानाश कर रहे हैं।

जलावर्धन योजना
300 करोड़ की इस महत्वाकांक्षी योजना की नींव जनवरी 2015 में रखी गई थी। तब निगम प्रशासन ने दावा किया था कि 2017 तक शहर के हर घर में पानी पहुंचाएंगे। लेकिन, तीन साल गुजरने के बाद भी योजना अधूरी है। पाइप लाइन बिछाने के नाम पर ठेका एजेंसी ने शहर को छलनी कर दिया। पानी की योजना ने लोगों का राह चलना मुश्किल कर दिया है।

सीवर लाइन
200 करोड़ की लागत के इस प्रोजेक्ट का कार्य कछुआ गति से आगे बढ़ रहा है। सीवर लाइन डालने के नाम पर कॉलोनियों की सड़कें खोदी जा रही हैं। लेकिन फीडिंग का कार्य गुणवत्ताहीन होने के कारण वाहन सड़क में धंस रहे हैं। जनता का सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है। यह विकास भी लोगों को परेशान कर रहा है।

फ्लाइओवर
60 करोड़ की लागत से सेमरिया चौक पर निर्माणाधीन फ्लाइओवर का कार्य भी समय पर पूरा नहीं हो सका। फ्लाइओवर के मनमानी कार्य के चलते रीवा रोड खाई में तब्दील हो चुकी है। सर्विसलेन का पता नहीं और ठेकेदार ने पुल खड़ा कर दिया। सड़क संक्रीर्ण एवं जर्जर होने से दिनभर जाम की स्थिति बनती है।

स्मार्ट सिटी
शहर के देश के 100 स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल हुए एक वर्ष का समय बीत चुका है। लेकिन स्मार्ट सिटी अभी तक सरकार की फाइल से बाहर नहीं आई। जबकि सतना के साथ स्मार्ट सिटी में शामिल दूसरे शहरों में स्मार्ट सिटी आकार लेने लगी है।