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Satna: जमीनों के रेट 20% कम, रजिस्ट्री की दर 2.2% और बढ़ाई

रियल एस्टेट में आधी खुशी आधा गम का माहौलस्टाम्प एवं पंजीयन सुधार पर कैबिनेट का निर्णयभू-अर्जन के मामलों में सरकार को होगा फायदा आम उपभोक्ताओं को राहत, बढ़ेंगे पंजीयन

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Land rate reduced by 20 percent, registry rate increased 2.2 percent

Land rate reduced by 20 percent, registry rate increased 2.2 percent

सतना. राज्य में रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्रों को बढ़ावा देने के नाम पर बुधवार को मंत्रिपरिषद ने स्टाम्प एवं पंजीयन को लेकर कई निर्णय लिए। जमीनों के रेट 20% कम किए गए तो रजिस्ट्री की दर 2.2% और बढ़ाई गई। इस निर्णय को लेकर मिलीजुली प्रतिक्रिया आ रही है। सामान्य उपभोक्ता वर्ग इस बात से खुश है कि उसे जमीन और मकान खरीदना अब सस्ता होगा। पंजीयन विभाग इस बात से खुश है कि संपत्तियों के अधिक मूल्यों के कारण इंकम टैक्स के दर से पंजीयन की संख्या घटी थी, लेकिन मूल्य कम होने से पंजीयन की संख्या में इजाफा होगा। लेकिन, विकास कार्यों के मामले में भू-स्वामियों के सामने चिंता की लकीर खिंच गई है। जमीनों के मूल्य कम करने से उन्हें मुआवजे की रकम कम मिलेगी। उधर इस बात पर कमोवेश हर वर्ग को नाराजगी है कि सरकार ने रजिस्ट्री पर शुल्क बढ़ा दिया। जमीन कारोबारियों की मानें तो सरकार ने सिर्फ अपना फायदा देखा है।

ये है कैबिनेट का निर्णय
- 20 फीसदी की कमी की जाएगी गाइड लाइन में

- 7.3 से बढ़ाकर 9.5 फीसदी किया जाएगा रजिस्ट्री पर कुल देय शुल्क
- 3 फीसदी अतिरिक्त शुल्क देय रहेगा नगरीय क्षेत्र में पूर्व की भांति

- अचल संपत्ति के हस्तांतरण में गाइड लाइन मूल्य से अधिक संव्यवहार मूल्य होने पर अंतर के मूल्य पर शुल्क/ फीस 2.1 फीसदी प्रभार्य होगी
- अभी पत्नी या पुत्री को संपत्ति में सह स्वामी के रूप में सम्मिलित करने के लिए मूल्यानुसार स्टांप शुल्क तथा पंजीयन फीस क्रमश: 1 फीसदी तथा 0.8 फीसदी है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के लिए ऐसे दस्तावेजों पर अब स्टाम्प शुल्क को अधिकतम 1000 रुपए तथा पंजीयन फीस को 100 की अधिकमत सीमा के अध्यधीन रखा जाएगा।

- पारिवारिक विभाजन में स्टांप शुल्क की वर्तमान दर 2.5 फीसदी से घटाकर 0.5 फीसदी की जाएगी।
यह होगा फायदा
- गाइड लाइन में 20 फीसदी की कमी होने से जमीन और मकानों की कीमत सस्ती होगी।

- कीमत कम होने से इंकम टैक्स के दायरे से बाहर होने की स्थिति ज्यादा बनने पर पंजीयन ज्यादा होंगे, जिससे दो नंबर कारोबार रुकेगा।
- रियल एस्टेट कारोबार में बढ़ोतरी होगी

यह होगा नुकसान

- गाइड लाइन में कमी होने से जमीनों की कीमत घटेगी। ऐसे में निर्माण कार्यों के लिए जिन जमीनों का भू-अर्जन किया जाएगा, वहां किसानों और भू-स्वामियों को कम मुआवजा मिलेगा।
- रजिस्ट्री खर्चा सामान्य तौर पर क्रेता वहन करता है। ऐसे में रजिस्ट्री की दरें बढ़ने से क्रेता को रजिस्ट्री की ज्यादा रकम भुगतान करनी पड़ेगी।

सतनावासी ऐसे समझें कैबिनेट का गणित

अभी अगर कोई जमीन 1,00,000 रुपए की है। इस पर रजिस्ट्री शुल्क 7.3 फीसदी और नगरीय क्षेत्र का 3 फीसदी अतिरिक्त शुल्क मिलाकर 10.3 फीसदी रजिस्ट्री का लगता है। अर्थात 10,300 रुपए रजिस्ट्री खर्च एक लाख रुपए की जमीन पर लगता है। ऐसे में क्रेता को 1,10,300 रुपए का खर्चा आता है। लेकिन जब गाइड लाइन में 20 फीसदी की कमी आ जाती है तो एक लाख की जमीन 80,000 में हो जाएगी। इस पर नई दरों के हिसाब से रजिस्ट्री पर देय 9.5 फीसदी और नगरीय क्षेत्र में 3 फीसदी अतिरिक्त शुल्क मिलाकर 12.5 फीसदी रजिस्ट्री खर्चा आएगा। अर्थात 80 हजार पर 10,000 रुपए रजिस्ट्री शुल्क पड़ेगा। ऐसे में नई व्यवस्था में उस जमीन पर क्रेता को 90,000 रुपए का खर्चा आएगा। इस लिहाज से क्रेता को 20,300 रुपए का लाभ हुआ। दूसरी ओर सरकार को मिलने वाला रजिस्ट्री खर्च का अंतर महज 300 हुआ। ऐसे में सरकार ने अपना लाभ तो लगभग यथावत रखा, लेकिन जमीन खरीददारों को राहत दे दी।
रियल एस्टेट सेक्टर खुशी
'' कैबिनेट ने गाइडलाइन में 20 फीसदी की कमी की है। उससे जमीन और मकान की कीमतें घटेंगी। इससे जरूरतमंद लोगों को अब जमीन खरीदना सस्ता होगा और रियल एस्टेट कारोबार में बढ़ोतरी होगी।''

- सौरभ सिंह सोमू , रियल एस्टेट कारोबारी

'' जमीनों के रेट में कमी का स्वागत है, लेकिन चिंता की बात यह है कि जब निर्माण कार्यों के लिए किसानों की जमीनें ली जाएंगी तो उन्हें मुआवजा कम मिलेगा। इस दिशा में सरकार को नए सिरे से सोचना चाहिए। ''
- इंद्रजीत पाठक, किसान नेता