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बांग्लादेश में जन्म और भारत में रखी संगीत की नींव, फिर ऐसे उस्ताद बने अलाउद्दीन खां

उस्ताद अलाउद्दीन खां का जन्म 1862 में नबीनगर उपजिला बांग्लादेश में हुआ था।

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legend musician story of ustad allauddin khan

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सतना। उस्ताद अलाउद्दीन खां का जन्म 1862 में नबीनगर उपजिला बांग्लादेश में हुआ था। अलाउद्दीन खां एक बहुप्रसिद्ध सरोद वादक थे जिन्हें अन्य वाद्य यंत्रों को बजाने में भी महाराथ हासिल थी। बाबा 20वीं सदी के सबसे महान संगीत शिक्षकों में से एक माने जाते हैं। सन् 1935 में पं. उदय शंकर के बैले समूह के साथ खां साहब ने यूरोप का दौरा किया। इसके बाद काफी लंबे समय तक उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित 'उदय शंकर इंडिया कल्चर सेंटर' से जुड़े रहे। अपने जीनन काल में उन्होंने कई रागों की रचना की और विश्व संगीत जगत में विख्यात बाबा ने मैहर राजघराने की नींव रखी। उस्ताद अलाउद्दीन खां का निधन 6 सितंबर 1972 को हुआ था।

पद्म भूषण से सम्मानित
उस्ताद अलाउद्दीन खां को कला के क्षेत्र में सन् 1958 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। इससे पहले उन्हें साल 1954 में संगीत नाट्य अकादमी ने अपने सबसे बड़े सम्मान 'संगीत नाट्य अकादमी फैलोशिप' से नवाज़ा, ये सम्मान उत्तर प्रदेश राज्य से था। बाबा ने कई एलबम भी चर्चित रहे है। उनकी सबसे खास रिकॉर्डिंग्स ऑल इंडिया रेडियो के साथ 50 से 60 के दशक में की गई जो रिकॉर्डिंग्स सबसे अधिक प्रसिद्ध हैं।

ग्रैमी अवार्ड धारी पं. रवि शंकर के रहे हैं गुरू
अलाउद्दीन खां साहब मशहूर सरोद वादक अली अकबर खां और अन्नपूर्णा देवी के पिता हैं, साथ ही राजा हुसैन खां के चाचा भी। इतना ही नहीं बाबा अलाउद्दीन खां ग्रैमी अवार्ड धारी पं. रवि शंकर, निखिल बनर्जी, पन्नालाल घोष, बसंत राय, बहादुर राय आदि सफल संगीतकारों के गुरू भी रहे। उन्होंने स्वयं गोपाल चंद्र बनर्जी, लोलो और मुन्ने खां जैसे संगीत के महारथियों से संगीत की दीक्षा ली। इतना ही नहीं उन्होंने कड़ी मेहनत के बाद मशहूर वीणा वादक रामपुर के वजीर खां साहब से भी संगीत के गुर सीखे थे।

मैहर वाद्य वृंद की मनाई जा रही स्वर्ण जयंती
उस्ताद अलाउद्दीन खां द्वारा स्थापित मैहर वाद्य वृंद के 100 साल पूर्ण होने पर दो दिवसीय कार्यक्रम 25 और 26 नवंबर को मैहर खेल मैदान में आयोजित होगा। जिसमें देशभर के नामचीन संगीतकार भाग लेंगे। संगीत नाट्य अकादमी नई दिल्ली, मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग आयोजक होगा।

दो दिवसीय कार्यक्रम

दो दिवसीय कार्यक्रम में पहले दिन 25 नवंबर को नित्यानंद हल्दीपुरी का बांसुरी वादन, राजेश अली अकबर खां का सरोद वादन, शिराज अली के हाथों सरोद वादन और मैहर वाद्य वृंद की ओर से शास्त्रीय संगीत की प्रस्तुति दी जाएगी। 26 नवंबर को नई दिल्ली के राजेंद्र प्रसन्ना का शहनाई वादन, नई दिल्ली के सुभेंद्र राव का सितार वादन, भुवनेस कोकलली का गायन देवास तथा मैहर वाद्य वृंद की प्रस्तुति होगी।