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Big Breaking: सरकार का बड़ा फैसला, जाम छलकाना हुआ और मंहगा, 30 फीसदी बढ़ाए शराब के दाम

Big Breaking: सरकार का बड़ा फैसला, जाम छलकाना हुआ और मंहगा, 30 फीसदी बढ़ाए शराब के दाम

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liquor price list in mp

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सतना। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2017-18 की अपेक्षा वित्तीय वर्ष 2018-19 में देशी विदेशी शराबों के रेट बढ़ा दिए है। जिससे औसतन शराब के दाम 20 से 30 फीसदी तक महंगे हो गए है। बता दें कि, सतना जिले में शराब कारोबारियों ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के लिए ज्यादातर समूहों में 15 प्रतिशत राशि बढ़ाकर टेंडर अपने नाम किया गया। जिसके चलते कारोबारियों ने सिंडीकेट बनाकर शराब लगभग 30 फीसदी महंगी कर दी है। जिले में 23 समूह संचालित है।

जिसमें से 16 समूह रिनुअल टेंडर के तहत दुकानें अपने नाम की है। वहीं 9 समूहों के लिए टेंडर काल किए गए थे। जो कि अब गत वर्ष की राशि से ज्यादा मूल्य पर शराब कारोबारियों ने लिए है। इस निर्णय के कारण जाम छलकाने वालों की जेबें ठीली हो रही है। औने-पौने दाम चुकाकर महंगी शराब पीने के लिए रकम अदा करनी पड़ रही है।

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इसलिए शराब कारोबारियों ने दिखाई दिलचस्पी
इस वर्ष मध्यप्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव के मददेनजर शराब कारोबारियों ने मोटी रकम खर्च की है। और 15 प्रतिशत राशि बढ़ाकर शराब की दुकानें खरीदी है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि हर मतर्वा चुनावी वर्ष में देशी-विदेशी मदिरा की खपत अन्य वर्षों की अपेक्षा ज्यादा होती रही है। इसी मुनाफे की लालच में ठेकेदारों ने बड़ी पूंजी आबकारी विभाग को दी है। और राज्य सरकार को टैक्स में भी बढ़ावा मिला है।

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ठेका कंपनियां हुई एकजुट
सिंडीकेट के तहत इस मतर्वा जिले के सभी समूहों के ठेकेदारों ने एक जुट होकर कारोबार करने की ठानी है। इसीलिए अंदरूनी तौर पर विगत दिनों शहर के एक प्रतिष्ठित होटल में बैठक भी आयोजित हुई थी। जिसमे सभी ने एक मत से निर्णय लिया कि जिले की हर दुकान में एक ही मूल्य पर शराब दी जाएगी। जिससे कारोबार की सेहत में फर्क न पड़े और गत वर्ष हुए घाटे के सौदे को मुनाफे में परिवर्तित किया जा सके।

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एक रेट पर शराब
बताया गया कि कुछ वर्षों पहले तक बॉर्डर के राज्यों और दूसरे जिले की सीमा पर स्थित दुकानों पर कम रेट पर शराब मिला करती थी। लेकिन सिंडीकेट लागू होने के बाद गांव से लेकर शहर तक और दूसरे राज्यों की सीमा से लेकर जिलों की सीमा पर बनी दुकानों पर ये नियम अपनाया जा रहा है।

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शराबबंदी का वादा हुआ फीका
प्रदेश सरकार ने जनता से वादा किया था कि रहवासी क्षेत्रों में शराब दुकानें नहीं संचालित होंगी। लेकिन इस वर्ष सभी दुकानें अपने पुरानी जगहों पर संचालित हो रही है। सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को तार-तार किया जा रहा है। सरकार ने जनता को भरोसा दिलाया था कि धीरे-धीरे प्रदेश में शराबबंदी की जाएगी लेकिन ऐसा कुछ दिखाई नहीं दे रहा है। सभी दुकानें यथावत रहवासी क्षेत्रों में चल रही है। प्रशासन सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन को भूल गया है।