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मलेरिया का कहर: पिपरा में एक युवक की मौत, हिरौंदी में हर तीसरे घर में एक बीमार

मझगवां विकासखंड में बुखार का कहर: 50 से अधिक ग्रामीण बीमार

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सतना

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Suresh Mishra

Sep 17, 2018

malaria treatment in hindi

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सतना। मझगवां विकासखंड के गांवों में मलेरिया बुखार तेजी से फेल रहा है। कारीगोही के पास स्थित पिपरा गांव में जहां मलेरिया से एक युवक की मौत हो गई, वहीं गांव में आधा सैकड़ा लोग मलेरिया बुखार से पीडि़त हैं। उधर, कोठी-चित्रकूट मार्ग स्थित हिरौंदी गांव में मलेरिया के मच्छर का डंक बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में हर तीसरे घर में मलेरिया का एक मरीज है। इसके बावजूद अभी तक स्वास्थ्य विभाग द्वारा गांवों मों मलेरिया के डंक से बचाने कोई उपाय नहीं किया गया।

जानकारी के अनुसार, सभापुर थाना क्षेत्र अंतर्गत पिपरा गांव निवासी पप्पू सिंह गोड़ पिता कमला सिंह (28) को कई दिन से बुखार आ रहा था। उसे परिजनों ने इलाज के लिए बिरसिंहपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में भर्ती कराया था। खून की जांच में मलेरिया पॉजिटिव आया तो चिकित्सक में मलेरिया का इलाज शुरू किया। लेकिन मरीज की हालत गंभीर होने के कारण रविवार को इलाज के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।

जेडी ने मझगवां स्वास्थ्य केंद्र की टटोली नब्ज...
ज्वाइन डायरेक्टर स्वास्थ्य सेवा रीवा संभाग डॉ. एसके सालम ने रविवार को मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने अस्पतल के अंदर वार्डों में जाकर वहां की स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता परखी और चिकित्सकों से केंद्र में आने वाले मरीजों की जानकारी ली। सालम ने मरीजों से चर्चा कर इलाज में होने वाली परेशानी को जाना और अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के निर्देश दिए।

न दवा मिली न दवा का छिड़काव हुआ
मलेरिया से एक की मौत के बाद पिपरा तथा उसके आसपास के गांवों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया है। ग्रामीणों ने बताया कि पिपरा सहित तराई अंचल के एक दर्जन गांवों में बुखार का प्रकोप है। इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देने के बाद भी अभी तक विभाग का कोई भी अधिकारी-कर्मचारी गांव नहीं पहुंचा। क्षेत्र के गांवों में एक आधा सैकड़ा से अधिक लोग बुखार की चपेट में हैं।

आदिवासी गांवों में मच्छरों का प्रकोप

ग्रामीणों ने बताया कि तराई अंचल के आदिवासी गांवों में मच्छरों का प्रकोप चरम पर है। लेकिन अभी तक न तो स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले द्वारा इन गांवों में मच्छररोधी दवा का छिड़काव किया गया और न ही लोगों को को दवा का वितरण किया गया। स्वास्थ्य विभाग की यह मनमानी मझगवां के आदिवासी गांवों पर भारी पड़ रही है।