26 मार्च 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

महापौर ने निगमायुक्त को हटाने खोला मोर्चा, सीएम के नाम सौंपा ज्ञापन

सतना। नगर निगम में महापौर योगेश ताम्रकार और निगमायुक्त शेर सिंह मीना के बीच चल रहा अंदरूनी विवाद अब सतह पर आ गया है। बुधवार की देर शाम सर्किट हाउस में महापौर ने पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ निगमायुक्त शेर सिंह को हटाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस को ज्ञापन […]

3 min read
Google source verification
mahapaur

सतना। नगर निगम में महापौर योगेश ताम्रकार और निगमायुक्त शेर सिंह मीना के बीच चल रहा अंदरूनी विवाद अब सतह पर आ गया है। बुधवार की देर शाम सर्किट हाउस में महापौर ने पार्षदों के प्रतिनिधिमंडल के साथ निगमायुक्त शेर सिंह को हटाने के लिए मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस को ज्ञापन सौंपा है। इसके साथ ही महापौर ने अब निगमायुक्त के खिलाफ खुली जंग का आगाज कर दिया है। इस ज्ञापन में निगमायुक्त को हटाने के समर्थन में 29 पार्षदों ने हस्ताक्षर किए हैं। ज्ञापन सौंपने के दौरान नगर निगम अध्यक्ष राजेश चतुर्वेदी पालन भी मौजूद रहे। उल्लेखनीय है महापौर और निगमायुक्त के बीच पहली कड़वाहट 17 दिसंबर को हुई एमआईसी बैठक में तब सामने आई थी जब एमआईसी के निर्णयों का पालन नहीं करने को लेकर महापौर एमआईसी की बैठक बीच में छोड़ कर चले गए थे। हालांकि इस विरोध से एमआईसी सदस्य आदित्य यादव की दूरी तमाम सवाल भी खड़े कर रही है।

देर शाम सर्किट हाउस में कलेक्टर से मुलाकात

जानकारी के अनुसार महापौर योगेश ताम्रकार ने सर्किट हाउस में नगर निगम अध्यक्ष और पार्षदों के साथ कलेक्टर से मुलाकात की। इस दौरान महापौर ने कलेक्टर को बताया कि 6 माह से निगमायुक्त पार्षदों की किसी तरह की फाइल नहीं कर रहे हैं। इसमें से कई ऐसी फाइलें भी शामिल हैं जिन्हें मैने व्यक्तिगत मार्क करके निगमायुक्त की ओर भेजा वे भी हस्ताक्षर के लिए लंबित हैं। इनमें से ज्यादातर प्रकरणों की फाइल बन चुकी हैं, वित्तीय स्वीकृति भी हो चुकी है, टेंडर में जाना शेष है और इसके लिए वे हस्ताक्षर नहीं कर रहे हैं। महापौर ने कहा कि शहर में 50 किलोमीटर डामर रोड के लिए फाइल लंबित रखी हुई है। शहर की सड़के गड्ढों में तब्दील है। लोग हमे गालियां दे रहे हैं और इधर निगमायुक्त फाइलों को दबा कर बैठे हैं। पूरा शहर परेशान हो रहा है।

परिषद में दी झूठी जानकारी

इस दौरान निगम अध्यक्ष ने कहा कि परिषद में गलत जानकारी दी गई कि वार्डों में बिजली के खंबे लगाने की फाइल तक नहीं हुई जबकि परिषद की बैठक में इस फाइल को कर देने की जानकारी दी गई। पार्षद पीके जैन ने कहा कि हरिकिशन दास वाटिका से अतिक्रमण हटाने का निर्णय कर दिया गया लेकिन आज तक अतिक्रमण नहीं हटाया जा सका है। आज जांच हो जाए तो 200 से ज्यादा फाइलें धूल खाती पड़ी हैं। पार्षद अभिषेक तिवारी ने कहा कि जब उन्हें ज्ञापन की जानकारी मिली तो कुछ पार्षदों को बुला-बुलाकर फाइल कर रहे हैं। अन्य पार्षदों ने भी कलेक्टर ने निगम की प्रशासनिक व्यवस्था की नाकामी की शिकायतें की।

नहीं उठाते निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की फाइलें

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे ज्ञापन में कहा गया है कि सभी वार्डों के विकास कार्यों की फाइलें 6-6 माह से कमिश्नर कार्यालय में लंबित है। निर्वाचित जनप्रतिनिधियों (पार्षदों) के फोन लगातार नहीं उठा रहे हैं। सीवर लाइन, पाइप लाइन एवं अन्य कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पूरा शहर अस्त व्यस्त है। जनता त्राहि त्राहि कर रही है। सीएम से अनुरोध किया गया है कि इन समस्याओं को विचार करते हुए आयुक्त शेर सिंह मीना को तत्काल प्रबाव से नगर निगम सतना से पृथक करने की कृपा करें।

आदित्य ने बदला पाला?

इस घटनाक्रम को लेकर जो ज्ञापन मुख्यमंत्री के नाम सौंपा गया है उसमें 29 पार्षदों के हस्ताक्षर हैं। लेकिन इसमें महापौर की अपनी काउंसिल के सदस्य आदित्य यादव के हस्ताक्षर नहीं है। यह विषय चर्चा में आ गया है कि आखिर क्या आदित्य ने पाला बदल लिया है? उधर हस्ताक्षर न करन के पीछे के तमाम कयास भी लगने शुरू हो गए हैं।

भोपाल रवाना हुए महापौर

कलेक्टर को ज्ञापन देने के बाद रेवांचल ट्रेन से रात को ही महापौर योगेश ताम्रकार भोपाल के लिए रवाना हो गये हैं। वहां वे मुख्यमंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात भी करने वाले हैं। उन्होंने पत्रिका को बताया कि "सतना के विकास में कमिश्नर बाधक हैं। उनका प्रशासनिक तरीका सही नहीं है। सभी पार्षदों की राय है कि तीन चौथाई पार्षदों की सहमति से इन्हें हटाने का प्रस्ताव लाया जाए। लेकिन इसके पहले मुख्यमंत्री को अवगत कराया जा रहा है। शहर का विकास कार्य बुरी तरह से प्रभावित है।"