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मानसून की पहली झमाझम से ही इंतजामों को चुनौती, शहर के 40 फीसदी हिस्से में जलभराव की आशंका

आधे-अधूरे निर्माण व नालियों का चोक होना बनेगा मुसीबत, निगम ने माना आधे ही नाले हुए साफ

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सतना

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Suresh Mishra

Jun 12, 2018

Monsoon Challenge arrangements in satna nagar nigam

Monsoon Challenge arrangements in satna nagar nigam

सतना। दो दिन पहले रीवा में झमाझाम बारिश हुई, उसके बाद पूरा शहर गंदे पानी से पट गया। शहर के अधिकतर हिस्से में जलभराव की स्थिति निर्मित हो गई। इसके पीछे कारण था कि कागजों में ही प्री-मानसून तैयारियों को अंजाम दिया गया। कुछ ऐसे हालात सतना में भी देखने को मिल रहे हैं कि मानसून की पहली बारिश ही शहर को डूबा देगी।

अगर, झमाझम बारिश होती है, तो शहर का 40 फीसदी हिस्से में जलभराव की स्थिति देखने को मिलेगी। बस स्टैंड से लेकर भरहुत नगर तक पानी निकासी होना मुश्किल होगा। कम से कम दो दर्जन ऐसे मोहल्ले हैं, जहां जलभराव होना तय है। इसके पीछे कारण है कि निगम के दावे और व्यवहारिक हकीकत में अंतर है।

अधिकतर नाले पर अतिक्रमण

शहर से पानी निकासी के लिए बने अधिकतर नाले पर अतिक्रमण है और उनकी सफाई तक नगर निगम ने नहीं कराई है। वहीं गली मोहल्ले की नालियां चोक पड़ी हुई हैं। दूसरी ओर विकास के नाम पर खोदे गए गड्ढ़े स्थिति को और दुश्वार करेंगे। आलम ये है कि नगर निगम द्वारा ज्यादा बारिश होने पर उससे निबटने के लिए कोई प्लान तैयार नहीं है। सिर्फ कागजी और दिखावे की तैयारी सामने हैं। यहीं कारण था कि २ साल पहले बाढ़ की स्थिति से शहर जूझा था। उसकी यादें आज भी लोगों के जेहन में हैं। बहरहाल यदि शहर को जलभराव से बचाना है, तो शहर सरकार को जल्द से जल्द चेतना होगा।

खुदाई गंभीर समस्या
शहर में विकास के नाम पर जहां तहां खोद कर रख दिया गया है। रीवा रोड से लेकर गली-मोहल्ल तक में खुदाई की गई है। सड़क पर चलना मुश्किल हैं। ऐसे में अगर बारिश होती है, तो हालात और बिगड़ जाएंगे। रहवासी अपने ही घर व मोहल्ले में कैद हो जाएंगे।

हालात से निबटने इंतजाम नहीं
बारिश व बाढ़ के हालातों से निबटने के लिए निगम प्रशासन के पासकोई तैयारी नहीं है। न तो कंट्रोल रूम बनाया गया है, न ही संसाधन जुटाए गए हैं। नाव तक की व्यवस्था नहीं की गई। इसके अलावा सफाई सामग्री में भी बढ़ोतरी नहीं की गई। निगम पूरी तरह से जिला प्रशासन के आपदा प्रकोष्ठ के भरोसे निर्भर है।

प्रमुख नाले पर अभी भी पेंच
शहर का प्रमुख भरहुत नगर से खेरमाई नाला होते हुए नजीराबाद तक की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। 75 में से73 अतिक्रमण हटाने का दावा किया जा रहा है। लेकिन जीवन ज्योति के पास फिर से नाले पर कब्जा कर लिया गया है। इस बात को पार्षद पुष्पराज कुशवाहा भी स्वीकार रहें हैं।

नहीं उठाया निगम ने कदम
नेता प्रतिपक्ष शैलेंद्र सिंह गुड्डृू कहते हैं कि वर्ष 2016 में शहर बाढ़ की चपेट में आ गया था। उसके बाद एनडीआरएफ की टीम बुलाई गई थी। उसकी रिपोर्ट पर अमल तक नहीं किया गया। जल निकासी की ठोस व्यवस्था नहीं है। नाले के अतिक्रमण को शत-प्रतिशत नहीं हटाया गया। नदियों का पानी शहर में न घुसे, इसके लिए भी काम नहीं किया गया।

जलभराव के 6 डेंजर जोन
- भरहुत नगर को जलभराव का डेंजर जोन माना जाता है। ज्यादा बारिश पर सबसे पहले यही क्षेत्र प्रभावित होता है। इससे गुजरने वाला नाला अतिक्रमण मुक्तनहीं किया गया।
- जवान सिंह कॉलोनी प्रमुख नाले की समीप बस्ती। जब भी तेज बारिश होती है, पानी लोगों के घरों में घुस जाता है। हर साल इस क्षेत्र में नुकसान होता है।
- बजरहा टोला में नालियां चोक होने से पंजाबी कॉलोनी तक बारिश का पानी सड़कों व नालियों पर बहता है। निगम ने इसे खतरनाक माना है।
- नजीराबाद में भी नाले का अतिक्रमण न हटने की वजह से पानी निकलना मुश्किल होता है। शहर में कही भी बारिश हो, क्षेत्र में जलभराव की आशंका बनी रहती है।
- सिटी कोतवाली से धवारी को मिलाने वाली सड़क में अंडरब्रिज में जमकर जलभराव होता रहा है। आवागमन के दौरान लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- रीवा रोड स्थित होटल पार्क के मैदान में बड़े पैमाने पर जलभराव होता है। इसके अलावा संग्राम कालोनी, जीवन ज्योति कॉलोनी व कृष्ण नगर में भी हालात बेकाबू हो जाते हैं।

ये हैं सुझाव
- ननि द्वारा फिल्टर प्लांट में फायर ब्रिगेड कार्यालय में कंट्रोल रूम की स्थापना
- 3 पालियों में 8-8 घंटे कर्मचारियों की तैनाती
- बाढ़ से निबटने के लिए सफाई दल के साथ तकनीकी कर्मचारियों की तैनाती
- बाढ़ से निपटने के लिए कम्युनिटी हाल, रैन बसेरा, शासकीय विद्यालयों की चाक चौबंद व्यवस्था
- अस्थायी कैंप के लिये जगह सुनिश्चित
- निचली बस्तियों का निरिक्षण, जहां पहले भी बाढ आ चुकी है।
- नगर के शेष जर्जर भवन को गिराने का काम
- दवाओं व चिकित्सक बल की व्यवस्था
- पशु चिकित्सा सेवा
- उपकरणों का पूरा व्यौरा
- जनशक्ति एंव खोज व बचाव दल के प्रशिक्षण
- सांप पकडऩे वालों के मोबाइल नंबर
- लकड़ी व लोहा काटने के औजार तैयार रखे जाएं
- सड़कों की पैचिंग करवाई जाये।

शहर के प्रमुख नाले
- सहकार भवन के पास जीवन ज्योति कॉलोनी का मुख्य नाला- १ किमी
- भरहुत नगर से सतना नदी- 7 किमी
- सर्किट हाउस चौक से सेमरिया चौक- 3 किमी
- सिविल लाइन से फौजदार फर्म तक- आधा किमी
- खूंथी नाला- 800 मीटर
- पुराना पावर हाउस- 450 मीटर
- डिसलरी के पास भैसा खाना के पीछे तक- 1 किमी
- सिटी कोतवाली से बजरहा टोला- 850 मीटर
- गोशाला चौक से बजरहा टोला- 700 मीटर
- नजीराबाद रेल्वे लाइन के किनारे- 900 मीटर
- नवरंग पार्क से भरहुत नगर- 1 किमी
- औद्योगिक क्षेत्र नाला- 800 मीटर
- कृष्णा कालोनी नाला- 400 मीटर
- मास्टर प्लान रेल्वे लाइन किनारे- 400 मीटर
- बाढ़ उन्मुख की श्रेणी में टमस और सतना नदी शामिल हैं।