
Monthly Shivratri dates for satna madhya pradesh
सतना। मासिक शिवरात्रि का पर्व जिलेभर में धूमधाम से मनाया गया। शिवभक्त भगवान की एक छलक पाने के लिए मंदिरों में टूट पड़े। बेलपत्र, भांग, धतूरा, आम की गौर लेकर भक्तों ने शिवलिंगों में जल चढ़ाया। सबसे ज्यादा भीड़ सतना के बिरसिंहपुर गैबीनाथ धाम में जुटी। जहां अलसुबह से शाम तक दर्शन का सिलसिला चला। वहीं रीवा के महामृत्युंजय शिवलिंग और देवतलाब में भक्तों की आस्था टूट पड़ी। इसी तरह चित्रकूट के मत्स्यगयेंन्द्रनाथ, जसो के कर्दमेश्वर मंदिर, उचेहरा के प्राचीन गौरीशंकर मंदिर, भूतेश्वर महादेव, रमणी नदी शिव लिंग, काल भैरव मंदिर, पटपरनाथ मंदिर में पैर रखने के लिए स्थान नहीं था। हर एक मंदिर भोले के जयकारों से गूंजायमान हो रहा था।
मासिक शिवरात्रि का महत्व
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि को ही भगवान शिव -लिंग रूप में प्रकट हुए थे। माना जाता है कि इसी समय ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पहली बार शिवलिंग का पूजन किया गया था। परंतु एक वर्ष में एक महाशिवरात्रि और 11 शिवरात्रियां पड़ती हैं, जिन्हें मासिक शिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी पर शिवरात्रि मनाई जाती है, जिसे मासिक शिवरात्रि कहा जाता है। मान्यता है कि मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से भगवान शंकर प्रसन्न होते हैं और शास्त्रों के अनुसार देवी लक्ष्मी, सरस्वती, इंद्राणी, गायत्री, सावित्री, पार्वती और रति ने शिवरात्रि का व्रत किया था और शिव कृपा से अनंत फल प्राप्त किए थे।
भोर से लग गई थी लाइन
मासिक शिवरात्रि को मंगलवार के दिन गैवीनाथ धाम बिरसिंहपुर में पुरुषोत्तम मास के कारण अच्छी खासी भीड़ रही। बाबा की एक झकल पाने के लिए सतना, रीवा, सीधी सहित आसपास के भक्तों का तांता लग गया। शिव सरोवर में भोर 3 बजे स्नान करने के बाद भगवान के दर्शन के लिए मंदिर का पट अलसुबह 4 बजे खोला गया। सबसे पहले भगवान की पूजा हुई फिर बाद में श्रद्धालुओं ने बारी-बारी से भोलेनाथ का अभिषेक किए। इसके बाद हवन-पूजन आदि का कार्यक्रम शुरू हो गया। दूर-दराज से आने वाले भक्त भगवान भोलेनाथ की कथा सुनी। कई लोग बच्चों का मुंडन संस्कार के साथ भंडारा-प्रसाद भी बांटे।
Published on:
12 Jun 2018 06:17 pm
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