
MP election 2018: Not benefit government plan in satna Transporters
सतना। जिले के बस ऑपरेटर, ट्रांसपोर्टर, कार तथा ऑटो चालक हर साल रोड और सर्विस टैक्स के रूप में 300 करोड़ रुपए की राशि सरकारी खजाने में जमा करते हैं। बावजूद उन्हें वाहन चलाने के लिए अच्छी सड़क और टैक्स के बदले सरकारी योजना का लाभ नहीं मिल रहा। हर साल लाखों रुपए टैक्स जमा करने के बाद भी वाहन मालिक जर्जर सड़कों पर हिचकोले खाने को मजबूर हैं।
क्योंकि, वाहन मालिकों से हर साल अरबों रुपए कमाने वाली सरकार रोड टैक्स का पैसा सड़क बनवाने की बजाय एेसी योजनाओं पर खर्च कर रही है जिनसे वाहन मालिकों का दूर-दूर तक कोई सरोकार नहीं। शहर के ट्रांसपोर्टर, बस ऑपरेटर्स से चर्चा की गई तो उन्होंने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बताया। कहा, टैक्स कोई और भरे और लाभ किसी और को मिले। यह टैक्सदाताओं के साथ अन्याय है।
परिवहन नीति कारोबार के खिलाफ
सरकार की आरटीओ नीति को परिवहन कारोबार के खिलाफ बताते हुए ट्रांसपोर्टर्स ने सरकार के प्रति नाराजगी व्यक्त की। कहा, जिले के वाहन मालिक हर साल 300 करोड़ रुपए रोड टैक्स देते हैं। इसके बावजूद जिले की सड़कें चलने लायक नहीं। रोड टैक्स का पैसा दूसरी एेसी योजनाओं में खर्च किया जा रहा है जिनसे न तो जनता का भला हो रहा और न ही सड़कों का विकास।
हर माह एक हजार रुपए टैक्स जमा
हर साल 10 से 15 हजार रुपए रोड टैक्स भरने वाले गरीब ऑटो चालकों ने कहा कि यदि कोई भंडारे के लिए 100 रुपए चंदा देता है तो आयोजक उसे सम्मान के साथ भंडारे का प्रसाद देता है। पर, हम लोग हर माह एक हजार रुपए टैक्स जमा करने के बाद भी पुलिस का डंडा खाने को मजबूर हैं।
हर साल लाखों रुपए रोड टैक्स देने के बाद भी न चलने के लिए अच्छी सड़कें मिल रहीं और न कोई अन्य सुविधाएं। सरकार को टैक्स व्यापारी देते हैं पर उसका उपयोग किसी और के हितार्थ किया जा रहा है। रोड टैक्स की 50% राशि सड़क विकास मद में ही खर्च होनी चाहिए।
किशोर शर्मा, अध्यक्ष, मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन सतना
हम रोड टैक्स देते हैं, इसके बावजूद कोई सुविधा नहीं मिल रही। टैक्स हम भरें और लाभ किसी और को मिले, सरकार की यह नीति सही नहीं। हर माह रोड टैक्स देने के बाद भी सड़क पर वाहन चालकों से टोल टैक्स लिया जाता है। करदाताओं के प्रति सरकारी का रवैया ठीक नहीं। परिवर्तन होना चाहिए।
संजय गुप्ता, ट्रांसपोर्ट व्यवसायी
बस ऑपरेटर्स से हर माह टैक्स लिया जाता है। सतना आरटीओ से सालाना तीन सौ करोड़ रुपए टैक्स मिलता है। यदि इस राशि का उपयोग सरकार ईमानदारी से सड़क विकास एवं यात्रियों के हितार्थ करे तो जिले की सड़कें अमरीका से अच्छी हो जाएं। करदाताओं का पैसा गलत योजनाओं में खर्च किया जा रहा।
अशोक सिंह कछवाह, बस ऑपरेटर
टैक्स नीति सही नहीं। बदलाव होना चाहिए। करदाताओं का काम बंधुआ मजदूर की तरह हो गया है। सरकार का खजाना हम भरते हैं और उस पैसे से चल रही योजनाओं की मलाई कोई और खा रहा। योजनाएं चल रही हैं लाभ किसे मिल रहा? मॉनीटरिंंग भी हो। जो टैक्स देते हैं, उन्हें योजनाओं का लाभ भी मिलना चाहिए।
राजा चौहान, बस ऑपरेटर
ऑटो चालकों से भी हर साल टैक्स एवं बीमा के 15 हजार रुपए लिए जाते हैं। लेकिन न तो कोई सुविधा दी जा रही और न उनके हितार्थ कोई योजना चला रही। हम ऑटो चालक चाहते हैं कि ऑटो-रिक्शा से सरकार को जो टैक्स मिलता है उसका उपयोग ऑटो पार्किंग, सड़क तथा उनके लिए स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने में करनी चाहिए।
रमेश विश्वकर्मा, ऑटो चालक
ऑटो रिक्शा का टैक्स एवं बीमा इतना महंगा हो गया कि चलाना मुश्किल हो रहा। ऑटो रिक्शा चालकों से टैक्स वसूलना बंद किया जाए या जो टैक्स लिया जा रहा उसका पूरा उपयोग ऑटो चालक व परिवार के हितार्थ किया जाए। न चलने के लिए सड़क है और न पार्किंग। जब कोई सुविधा नहीं तो टैक्स किस बात का।
राहुल, ऑटो चालक
Published on:
24 Nov 2018 12:09 pm

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