9 मई 2026,

शनिवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

भितरघाती के दांत: दिखाने के कुछ, खाने के कुछ और, प्रत्याशियों के मान-मनौव्वल के बाद भी प्रचार से काट रहे कन्नी

तब... टिकट के थे दावेदार, अब...कम ही नजर आ रहे साथ

2 min read
Google source verification

सतना

image

Suresh Mishra

Nov 23, 2018

MP election 2018: vidhan sabha chunav me bhitarghati pratyasi

MP election 2018: vidhan sabha chunav me bhitarghati pratyasi

सतना। चुनावी सियासी रंग परवान पर है। मतदान को महज पांच दिन बचे हैं। ऐसे में सभी प्रत्याशी और उनकी पार्टी के कार्यकर्ता जीत के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देना चाहते हैं। लेकिन, उनकी जीत की राह में कंटक बने हैं भितरघाती। भितरघाती वो हैं जो टिकट वितरण से पहले तक दावेदार थे। पार्टी द्वारा विश्वास नहीं जताने पर अब उनसे विश्वासघात का खतरा है। ये चुनावी चौसर में भी कम ही नजर आ रहे हैं। प्रत्याशियों के भारी मान-मनौव्वल के बाद भी प्रचार-प्रसार से कन्नी काट रहे हैं।

चित्रकूट
भाजपा के लिए विकट स्थिति है। टिकट की दावेदारी प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह के अलावा शंकरदयाल त्रिपाठी व सुभाष शर्मा डोली भी कर रहे थे। इन्हें नहीं मिली। शुरुआती दौर में सुभाष शर्मा मुखर हुए। लेकिन, चुप्पी साध गए। अब समर्थकों में नाराजगी देखने को मिल रही है।

रैगांव
कांग्रेस के लिए परिस्थितियां आसान नहीं हैं। पूर्व प्रत्याशी गया बागरी भी दावेदार थे। पार्टी ने नए चेहरे को मौका दिया। भाजपा भी असंतोष से जूझ रही है। वीरेंद्र सिंह वीरू दावेदार थे। टिकट नहीं मिलने के बाद मुखर हुए, लेकिन पार्टी ने समझा बुझाकर चुप करा लिया।

नागौद
भाजपा के पास दोहरी चुनौती है। बागी के रूप में डॉ. रश्मि सिंह मैदान में हैं। पूर्व प्रत्याशी गगनेंद्र सिंह के समर्थक भी नाराज हैं। दोनों पांच साल से सक्रिय रहे लेकिन पार्टी ने अनुभव पर भरोसा जताया। अब स्थिति विषम होते दिख रही है। भितरघात की संभावना प्रबल है।

रामपुर बाघेलान
कांग्रेस-भाजपा में दावेदार बहुत थे। मजबूत दावेदारी में उमेश प्रताप सिंह का नाम था। टिकट विक्रम सिंह को मिली। जातिगत ध्रुवीकरण की स्थिति बनी है। कांग्रेस में सज्जन सिंह तिवारी, बालेश गौतम, गेंदलाल भाई की भी दावेदारी रही। टिकट रामशंकर पयासी को मिली है।

अमरपाटन
भाजपा से अरुण द्विवेदी दावेदार रहे। टिकट पूर्व विधायक रामलखन को मिली। शुरुआती दौर में अरुण द्विवेदी ने इस्तीफा भी सौंपा। अब पार्टी के समझाने के बाद चुप हैं। लेकिन, पार्टी गतिविधियों से दूरी बनाए हुए हैं। इस तरह समर्थक पार्टी के लिए मुश्किल खड़ा कर सकते हैं।

सतना
भाजपा से ज्यादा कांग्रेस को भितरघात की चुनौती है। मनीष तिवारी, राजाराम त्रिपाठी, राजभान सिंह सहित आधा दर्जन दावेदार थे। टिकट के बाद मनीष के समर्थकों ने नाराजगी जाहिर की थी। अंतिम समय में समर्थक दावं बिगाड़ सकते हैं।

मैहर
भाजपा-कांग्रेस दोनों के लिए चुनौतियां कम नहीं। भाजपा के दावेदार चुप्पी साधे हैं। यही कारण है कि भाजपाध्यक्ष मैहर दौरे के दौरान स्थानीय कार्यकर्ताओं की बैठक लिए। कांग्रेस के बागी मनीष पटेल श्रीकांत की मुश्किल बढ़ाएंगे।