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Old Tales Madhya Pradesh: CM बनने के 24 घंटे बाद राजीव गांधी ने मांग लिया था अर्जुन सिंह का इस्तीफा

यादों के पिटारे से: शपथ ग्रहण करने के अगले दिन ही तत्कालीन पीएम राजीव गांधी ने जारी किया था फरमान

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सतना

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Suresh Mishra

Nov 23, 2018

Old Tales Madhya Pradesh: 24 ghante ke mukhyamantri arjun singh

Old Tales Madhya Pradesh: 24 ghante ke mukhyamantri arjun singh

ओपी पाठक@सीधी। अर्जुन सिंह मप्र के तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं पर इस बात की चंद लोगों को ही जानकारी है कि अर्जुन सिंह दूसरी पारी में सिर्फ 24 घंटे के ही सीएम रहे। शपथ ग्रहण के अगले ही दिन उन्हें पद से त्यागपत्र देना पड़ा था। त्यागपत्र देना इतना आसान नहीं था पर तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के फरमान के आगे झुकना पड़ा और वे त्यागपत्र देकर जलते पंजाब की ओर कूच कर गए।

कहानी की पटकथा 1977 में लिखी गई

कहानी की पटकथा 1977 में लिखी गई थी। अर्जुन सिंह मप्र विस के नेता प्रतिपक्ष चुने गए। विपक्ष की भूमिका उन्होंने राजनीति के उस माहिर खिलाड़ी की तरह अदा की कि सत्ता पक्ष को तत्कालीन तीन मुख्यमंत्री कैलाशचंद जोशी, वीरेंद्र कुमार सकलेचा और सुंदरलाल पटवा को इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया था। तीन वर्ष बाद ही 1980 में हुए चुनाव में कांग्रेस को भारी बहुमत मिली।

मुख्यमंत्री पद की शपथ 11 मार्च को

कांग्रेस से अर्जुन सिंह का नाम मुख्यमंत्री के लिए प्रस्तावित किया गया। अर्जुन सिंह 9 जून 1980 से 10 मार्च 1985 तक मुख्यमंत्री बने रहे। 1985 में फिर विधानसभा का चुनाव अर्जुन सिंह के नेतृत्व में हुआ। फिर कांग्रेस को बहुमत मिली और अर्जुन सिंह को मुख्यमंत्री चुना गया। उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ 11 मार्च को ली और अगले दिन 12 मार्च 1985 को त्यागपत्र देना पड़ गया।

और बना दिया था पंजाब का राज्यपाल
1985 में पंजाब राज्य में खूनखराबा व विरोध का स्वर आतंकवाद का रूप ले चुका था। इससे निपटने के लिए राजीव गांधी के समक्ष चुनौती खड़ी हो गई थी। कृदंत है कि पंजाबी व सिख समुदाय के लोग अपने आपको क्षत्रिय वर्ग के ज्यादा नजदीक महसूस करते हैं। ऐसे में पंजाब के आतंकवाद को सुलझाने के लिए राजीव गांधी को वहां के राज्यपाल बनाए जाने के लिए क्षत्रिय, कूटनीतिक नेता की तलाश थी।

कार्यभार संभालने के लिए पंजाब भेज दिया

उनके सिपह-सलाहकारों ने मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह का नाम सुझाया। तब प्रधानमंत्री राजीव गांधी राजी होकर अर्जुन सिंह को मुख्यमंत्री की शपथ ग्रहण करने के अगले दिन ही त्यागपत्र दिलवा कर पंजाब के गवर्नर जनरल का कार्यभार संभालने के लिए पंजाब भेज दिया। उनकी जगह कांग्रेस द्वारा मोतीलाल बोरा को मुख्यमंत्री की कुर्सी पर आसीन कराया गया था।