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MP election news: बहिष्कार के ‘मत’ पर अड़े ग्रामीण, ‘दान’ का दबाव बना रहा प्रशासन

प्राथमिक सुविधाओं को मोहताज ग्रामीण

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MP election news: satna jila ke in gaon me matdan ka bahiskar

MP election news: satna jila ke in gaon me matdan ka bahiskar

सतना। मैहर विधानसभा क्षेत्र का टिसकिली और अमरपाटन विस क्षेत्र के रामनगर का हरियरी गांव विकास के वादों और दावों की हकीकत बयां कर रहा है। गांव में आज तक सड़क, पानी और बिजली जैसी प्राथमिक सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। ये समस्याएं एका-एक नहीं, जनप्रतिनिधि और प्रशासन की कमी के कारण पैदा हुई हैं।

ग्रामीण इन समस्याओं से पार पाने के लिए हर उस चौखट तक गए जहां से उनको निदान की आशा थी। पर, हर जगह विवशता ही हाथ लगी। ऐसे में मजबूर ग्रामीण अब मतदान की जिद पर अड़े हैं। उनका कहना है कि प्रशासन हमें सुविधाएं मुहैया करा दे, हम खुशी-खुशी मतदान करेेंगे। पर, प्रशासन का अपना रुतबा है। वह समस्या हल करने की बजाय दबाव बनाकर अपना मतलब साधना चाहता है।

ये है मामला
रामनगर के हरियरी बांसी गांव के ग्रामीण 'उठ गया विश्वास, नहीं हुआ विकास, चाहे जो मजबूरी हो, हमारी मांग पूरी हो' जैसे स्लोगन के बैनर, पोस्टर हाथ में लिए अपनी मांग पूरी करने आवाज उठा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि 25 वर्ष से भी अधिक समय से सड़क, सिंचाई और बिजली देने की मांग की जा रही है। विद्युत कंपनी द्वारा गांव तक खंभे नहीं लगाए गए हैं।

बांस, बल्ली के सहारे घर तक कनेक्शन
लोगों को मजबूरी में बांस, बल्ली के सहारे घर तक कनेक्शन ले जाना पड़ रहा है। चुनाव के बहिष्कार की जानकारी लगते ही अधिकारियों की टीम गांव पहुंची। अधिकारियों सहित कांग्रेस, भाजपा, बसपा सहित अन्य प्रत्याशियों ने ग्रामीणों से संपर्क साधा, मतदान करने अनुरोध किया। लेकिन ग्रामीणों का कहना है किसी के झूठे आश्वासन में नहीं आएंगे। जब तक रोड नहीं बन जाती वोट नहीं डालेंगे।

सूचना मिलते ही पहुंचे गांव
बहिष्कार की सूचना मिलते ही सबसे पहले प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि अधिकारी समस्याओं को दूर करने की बजाय मतदान करने के लिए दबाव बना रहे थे। उनका कहना था कि अभी कोई वादा नहीं करेंगे। मतदान करो तब सोचेंगे। लगभग सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों गांव पहुंच चुनाव बाद समस्याओं के निराकरण का वादा किया।

जब तक रोड नहीं तो वोट नहीं
मैहर के टिसकिली गांव के भी ग्रामीण वर्षों से गांव तक पक्की सड़क की मांग पर अड़े हुए हैं। गली-चौराहो पर मतदान के बहिष्कार के बैनर, पोस्टर लगे हुए हैं। ग्रामीणों का आरोप है, पिछले विधानसभा चुनाव में भी मतदान का बहिष्कार किया गया था। जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों द्वारा चुनाव बाद सड़क निर्माण का वादा किया गया था। लेकिन हमारे साथ छल किया। ग्रामीण अब जिद पर अड़े हैं, आश्वासन से काम नहीं चलेगा। जब तक रोड नहीं तो वोट नहीं।