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MP News: मध्य प्रदेश के सतना जिले में किसानों को खाद वितरण में पारदर्शिता लाने और कालाबाजारी रोकने के उद्देश्य से प्रदेश में लागू ई-विकास प्रणाली का क्रियान्वयन अधिकतर जिलों में नहीं हो रहा है। 'शासन की रिपोर्ट में सामने आया है कि नई व्यवस्था शुरू होने के बाद प्रदेश के 48 जिलों में बिना ई-टोकन के ही वितरित कर दी गई।
किसानों को घर बैठे टोकन बुकिंग की सुविधा देने के लिए 19 जनवरी से ई-विकास प्रणाली लागू की गई थी, ताकि खाद वितरण केंद्रों पर भीड़ कम हो और पारदर्शिता बनी रहे। लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो सका। प्रदेश में करीब 54 हजार मीट्रिक टन खाद ई-विकास प्रणाली से बाहर वितरित की गई। इनमें सतना जिले में ही 3199 मीट्रिक टन खाद बिना ई-टोकन के बांटी गई। नियमों को दरकिनार कर खाद होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी भी कोई कार्रवाई नहीं कर सके।
प्रदेश में सिर्फ 7 जिलों ई-टोकन व्यवस्था प्रभावी रही। इनमें भिंड, दमोह, मैहर, मऊगंज, निवाड़ी, पंधुरना और उमरिया शामिल हैं। यहां शासन के आदेश के अनुरूप ई-टोकन के जरिए ही खाद वितरण किया गया।
राज्य सरकार की नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के 48 जिलों में सहकारी समितियों से 8,468 मीट्रिक टन, मार्कफेड से 19,595 मीट्रिक टन, एमपी एग्रो से 517 मीट्रिक टन तथा निजी दुकानों से 25,755 मीट्रिक टन (कुल 54,337 मीट्रिक टन) खाद बिना ई-टोकन के बांटी गई। जिलों ने ई-टोकन लागू नहीं किया। पीओएस स्टाक 80,999 मीट्रिक टन होने के बावजूद ई-विकास से केवल 23,080 मीट्रिक टन का वितरण हुआ।
जिले में सेवा सहकारी समितियों से 134.28 मीट्रिक टन, मार्कफेड के माध्यम से 1719 मीट्रिक टन तथा निजी विक्रेताओं द्वारा 1345 मीट्रिक टन उर्वरक बिना ई-टोकन के किसानों को दी गई। जबकि संपूर्ण वितरण व्यवस्था ई-टोकन पर होनी थी।
मुख्यालय से बिना ई-टोकन खाद वितरण की जानकारी प्राप्त हुई है। जांच कर कार्रवाई की जाएगी। - आशीष पांडेय, उपसंचालक कृषि, सतना
Updated on:
18 Feb 2026 10:56 am
Published on:
18 Feb 2026 10:53 am
