
रीवा-सतना पर 6 अरब का बोझ (फोटो सोर्स : पत्रिका)
MP News: प्रदेशभर में बैंकों द्वारा दिए गए ऋण की वसूली को लेकर गंभीर स्थिति बनी हुई है। संस्थागत वित्त संचालनालय द्वारा हाल ही में आयोजित समीक्षा में यह तथ्य सामने आया कि प्रदेश के 43 जिलों में बैंकों की बकाया राशि बड़ी मात्रा में वसूली के लिए लंबित है। सबसे अधिक बकाया इंदौर और भोपाल जिलों में पाया गया है। रीवा संभाग के महज 3 जिलों में 6 अरब से ज्यादा की वसूली नहीं हो सकी है। इस संबंध में आयुक्त, संस्थागत वित्त ने सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि लंबित आरआरसी प्रकरणों की तत्काल समीक्षा कर वसूली सुनिश्चित कराएं।
दरअसल, बैंक जब किसी खाताधारक को ऋण देता है और वह समय पर भुगतान नहीं करता, तो खाता एनपीए घोषित हो जाता है। इसके बाद बैंक ब्रिस्क पोर्टल पर संबंधित खाता धारक की जानकारी और वसूली योग्य राशि दर्ज करते हैं। इससे आरआरसी नंबर जनरेट होता है। यह नंबर कलेक्टर की लॉगिन में दिखने लगता है। परीक्षण के बाद कलेक्टर इसे तहसीलदार को भेजते हैं, जो मांग पत्र जारी करता है। इस बीच अगर खाता धारक राशि जमा करता है तो तहसीलदार आरआरसी क्लोज कर देता है।
बैंक द्वारा वसूली गई राशि का 1.5% हिस्सा शासन के ब्रिस्क खाते में राजस्व के रूप में जमा होता है। लेकिन, मांग पत्र के बाद भी राशि जमा न होने पर तहसीलदार कुर्की की कार्रवाई करता है, जिससे बैंक की बकाया वसूली होती है। यहां राजस्व अधिकारियों की अनदेखी के कारण न सिर्फ बैंक वसूली से वंचित रह रहे हैं, बल्कि शासन को मिलने वाला राजस्व भी प्रभावित हो रहा है। वित्त विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह स्थिति गंभीर है और शीघ्र सुधार की आवश्यकता है। वसूली को लेकर हर जिले में सक्रियता बढ़ाने पर बल दिया गया है ताकि बैंकों की देनदारियां समय पर पूरी हो सकें और शासन को भी उसका राजस्व प्राप्त हो।
एलडीएम गौतम शर्मा बताते हैं कि बैंक आरआरसी बैंकिंग सिस्टम का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। लोन लेने के बाद जो राशि जमा नहीं की जाती है और इस वजह से जो खाते एनपीए हो जाते हैं, उनकी वसूली भू-राजस्व बकाया के रूप में की जाती है। यह अधिकार राजस्व अधिकारियों के पास होता है। अगर यह बकाया राशि जमा नहीं होती है तो बैंक आगे लोन देने में हिचकिचाहट महसूस करते हैं। अब तो नियम भी सत हो गए हैं। जिस सेक्टर में 5 फीसदी से ज्यादा लोन एनपीए हो जाता है तो उस सेक्टर में लोन बंद कर दिया जाता है। सतना जिले में इलाहाबाद बैंक ने इस आधार पर ऑटो, वेयर हाउस, कोल्ड स्टोरेज को लोन देना बंद कर दिया था। आज की स्थिति में सतना जिले के बैंकों का एनपीए 605.39 करोड़ रुपए पहुंच गया है। इसमें सबसे ज्यादा 154.89 करोड़ रुपए जिला केन्द्रीय सहकारी बैंक का है, जो सतना जिले के कुल एनपीए का 25.59 फीसदी है।
इंदौर जिले में बैंक आरआरसी की सबसे ज्यादा राशि वसूली के लिए लंबित है। यहां के 91818 खाता धारकों पर 20,05,12,00,838 रुपए की बैंक आरआरसी वसूली बकाया है। इसके बाद भोपाल जिले के 93389 खाताधारकों से 18,54,73,43,761 रुपए की वसूली बकाया है। धार जिले में 62416 खाता धारकों से 12,35,88,52,718 रुपए की वसूली बकाया है। खरगोन जिले में 46821 खाता धारकों से 9,30,91,89,048 रुपए तथा सीहोर जिले में 37188 खाता धारकों से 9,22,97,22,419 रुपए की बैंक आरआरसी वसूली बकाया है।
रीवा जिले में 18459 खाताधारकों से 3,30,43,47,788 रुपए की बैंक आरआरसी वसूली लंबित है। सतना में 21463 खाता धारकों से 3,38,82,15,368 रुपए तथा मऊगंज में 6 खाताधारकों से 11,87,340 रुपए की बैंक आरआरसी बकाया वसूली लंबित है। हालांकि सतना जिले में 9383 खाताधारकों की आरआरसी वसूली के लिए प्रकरण तहसीलदारों को भेजे जा चुके हैं। 4802 खाताधारकों को मांग पत्र जारी हो चुके हैं। संचालनालय संस्थागत वित्त से के अनुसार सतना जिले में 1 जनवरी 2024 से सितंबर 2025 तक बैंकों द्वारा कुल 6044 बैंक आरआरसी जारी की गई हैं। इसके विरुद्ध 1,68,02,02,740 रुपए की वसूली होनी है।
एलडीएम शर्मा ने बताया कि बैंकों से लोन लेने के बाद जब कोई व्यक्ति डिफाल्टर हो जाता है तो उसकी गिरवी रखी संपत्ति पर कब्जा पाने बैंकर्स सरफेसी एक्ट के तहत कलेक्टर के यहां प्रकरण दर्ज करते हैं। सतना जिले में लगभग 98 प्रकरण कलेक्टर न्यायालय में लंबित थे। कलेक्टर डॉ सतीश कुमार एस ने आने के बाद इन मामलों को गंभीरता से लिया और अब तक 74 प्रकरणों का निराकरण कर चुके हैं। इससे बैंकों को बड़ी राहत मिली है। एलडीएम ने इसे विगत एक दशक में सरफेसी एक्ट के तहत किसी कलेक्टर द्वारा की जाने वाली यह सबसे तेज कार्रवाई बताया।
सभी तहसीलदारों की नए सिरे से ब्रिस्क पोर्टल पर आईडी जनरेट करवाई गई है। सभी को निर्देशित किया है कि बैंक आरआरसी की वसूली तेजी से की जाए। मांग पत्र बकायादारों को जारी करें और वसूली की कार्रवाई करें।- डॉ सतीश कुमार एस, कलेक्टर
Published on:
21 Sept 2025 02:44 pm
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