
mp vidhan sabha election 1985 Interesting Tales in sirmour assembly
मृगेंद्र सिंह@रीवा। भाजपा के स्थापना के बाद कई वर्षों तक ऐसी स्थिति रही कि चुनाव लडऩे के लिए प्रत्याशी ढूंढ़े नहीं मिलते थे। उस दौरान चुनाव में होने वाले खर्च के लिए चंदा देने को भी कोई तैयार नहीं होता था। समाजवादियों का गढ़ रहे इस क्षेत्र में कांग्रेस ने अपनी पैठ जमाई। उस दौरान जनता दल सहित अन्य कई दूसरे दलों की भी पकड़ बनी रही। बात 1985 के विधानसभा चुनाव की है। भाजपा ने जिले में कई बड़ी सभाएं की थीं।
पार्टी ने जमीनी स्तर पर मेहनत की
अटल बिहारी वाजपेयी, कुशाभाऊ ठाकरे, कैलाश जोशी, सुंदरलाल पटवा सहित कई बड़े नेताओं की सभाएं हुईं थीं। उम्मीद थी कि इस बार पार्टी अच्छा प्रदर्शन करेगी। सिरमौर विधानसभा सीट से कांग्रेस के राजमणि पटेल को हराने के लिए पार्टी ने जमीनी स्तर पर मेहनत की। ठाकरे ने चौखंडी में पार्टी नेताओं की बैठक में स्थानीय नेता फूलचंद का नाम तय कर दिया। इसके बाद पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी भी अधिकृत तौर पर घोषित कर दिया।
पार्टी के लोग रिश्तेदार के यहां भी पहुंचे
अधिसूचना जारी होने के बाद नामांकन फॉर्म जमा करने की प्रक्रिया शुरू हुई। निर्धारित तिथि को भाजपा के घोषित प्रत्याशी जब फार्म जमा करने नहीं पहुंचे तो पार्टी के नेता उनके घर चौखंडी गए। वहां परिजनों ने बताया कि वह चुनाव नहीं लडऩा चाहते। इसलिए रिश्तेदार के यहां चले गए हैं। पार्टी की छवि पर इसका असर न पड़े, इस वजह से पार्टी के लोग रिश्तेदार के यहां भी पहुंचे।
इसी तरह दूसरी सीटों पर भी स्थितियां थीं
वहां से भी वह गायब हो गए। दो दिन शेष रह गए थे, इस कारण दूसरे प्रत्याशी को सिंबल देने का निर्णय लिया और फार्म भराया। इसी तरह दूसरी सीटों पर भी स्थितियां थीं। कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं मिल पा रहा था जो स्वयं चुनाव का खर्च वहन कर सके। इस कारण कई कार्यकर्ताओं को ही मैदान में उतारा गया था। उस बार मऊगंज-मनगवां सीट पर प्रदर्शन ठीक रहा।
जब कुशाभाऊ ठाकरे ने कुर्ता उतार कर दिया था भाषण
भाजपा ने 1980 में चुनाव प्रबंधन और संगठन को बढ़ाने के लिए रेवांचल बस स्टैंड के पास पहली बार पार्टी का कार्यालय खोला था। कार्यालय के ठीक नीचे होटल था, जहां पूरे दिन भट्ठी जलती थी। जून के महीने में कुशाभाऊ ठाकरे आए और कार्यालय का उद्घाटन करने पहुंचे। पार्टी की हालत ऐसी थी कि पंखा लगाने का भी बजट नहीं था।
बनियान पहने ही भाषण शुरू
काफी देर बाद जब ठाकरे के भाषण का नंबर आया तब तक वे गर्मी से बेहाल हो चुके थे। उन्होंने कुर्ता उतार दिया और बनियान पहने ही भाषण शुरू कर दिया। कुछ देर तक किसी कार्यकर्ता ने हाथ पंखा (बेना) से हवा की। बाद में उन्होंने उसे हाथ में ले लिया और पूरा भाषण समाप्त किया।
(जैसा कि भाजपा के संस्थापक सदस्य एवं लंबे समय तक जिलाध्यक्ष रहे राजेन्द्र पाण्डेय ने बताया।)
Published on:
27 Oct 2018 12:31 pm
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