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सतना। नगर पंचायत रामनगर में 269 लाख रुपए का घोटाला सामने आया है। मास्टरमाइंड नगर पंचायत अध्यक्ष रामसुशील पटेल रहे। घोटाले में अध्यक्ष का साथ तत्कालीन सीएमओ रमेश सिंह यादव, तत्कालीन सीएमओ अमर सिंह एवं कन्सल्टेंट अभिषेक पटेल ने दिया। सभी ने मिलकर दस्तावेजों में हेरफेर करते हुए अपात्रों को प्रधानमंत्री योजना का लाभ दे डाला।
घोटाले के पत्रिका के पास मौजूद दस्तावेजों के अनुसार रामनगर में अपात्रों को लाभ देने के लिए सभी नियम कानूनों को तिलांजलि दी गई। ऐसे हितग्राही जिन्हें अपात्रता के आधार पर उनके नाम पर गोला बनाकर क्रॉस तक कर दिया गया था उन्हें नगर पंचायत अध्यक्ष, सीएमओ और कंसल्टेंट ने न केवल पात्र माना बल्कि उनके खाते में प्रधानमंत्री आवास योजना की पहली किस्त के रूप में एक लाख रुपये तक डाल दिए गए। ऐसे लोगों की संख्या 12 के लगभग है।
बीएलसी घटक में भी खेल
योजना के बीएलसी घटक में उन्हीं लोगों को योजना का लाभ दिया जा सकता है जिनके निजी पट्टे में आवास बने हुए हैं। लेकिन रामनगर में 60 के लगभग ऐसे अपात्र हितग्राहियों को लाभ दे दिया गया जिनके द्वारा सरकारी जमीन में आवास का निर्माण कराया गया है। यहां पर नगर पंचायत ने कलेक्टर को भी गुमराह करने का काम किया और ऐसे अपात्र लोगों के नाम का अनुमोदन कलेक्टर से भी करवा लिया। इसमें अपात्रों से शपथ पत्र भी भरवाए गए। इसमें यह स्पष्ट लिखा था कि उनके द्वारा सरकारी जमीन पर कच्चा मकान बना कर निवास किया जा रहा है और इसी आवास में निर्माण करेगा। इतना स्पष्ट लेख होने के बाद भी उन्हें बीएलसी घटक के तहत आवास की स्वीकृति देते हुए इनके खाते में प्रथम किस्त के रूप में एक-एक लाख रुपये डाल दिये गए।
सूची से बाहर के नामों को दिया लाभ
अध्यक्ष और सीएमओ ने कलेक्टर द्वारा अनुमोदित सूची के बाहर के नामों को भी लाभ दे दिया। ऐसे लगभग डेढ़ सौ अपात्रों को भी उनके खाते में योजना के तहत पहली किस्त का भुगतान कर दिया गया। जबकि नियमानुसार योजना का लाभ उन्ही लोगों को दिया जा सकता था जिनके नाम कलेक्टर की अनुमोदित सूची में है।
पक्के मकान वालों को बताया पात्र
नपं अध्यक्ष, सीएमओ और कन्सल्टेंट की जोड़ी ने ऐसों को भी योजना का लाभ दिया जिनके पूर्व में पक्के मकान 1000 वर्ग फीट या उससे अधिक क्षेत्रफल के बने थे। जबकि ऐसे लोग योजना के लिये पात्र नहीं है। इससे इन लोगों के नाम कलेक्टर की अनुमोदित सूची में भी नहीं थे। ऐसे अपात्र लाभार्थियों की संख्या ३५ से ज्यादा पाई गई है।
ग्रामीण हितग्राहियों को भी बांटे पैसे
नपं द्वारा हद तो यह कर दी गई कि ऐसे लोगों को लाभ दे दिया गया जो ग्राम पंचायत के निवासी हैं। मसलन गफ्फार पिता सत्तार जो ग्राम पंचायत देवरा का निवासी है और वहां उसका पक्का मकान बना है तथा दूसरा रमेश कोरी पिता बिहारीलाल जो नौगांव का निवासी है। जबकि उन्हीं लोगों को लाभ देना था जो नगरीय क्षेत्र के अंतर्गत हैं। इन्हें भी एक-एक लाख रुपये पहली किस्त के रूप में बांटे गए।
269 अपात्रों को बांटे एक-एक लाख
इस तरह 269 अपात्रों को अध्यक्ष, सीएमओ और कंसल्टेंट ने रकम बांटी। किसी नपं में जिले में पीएम आवास के रूप में किया गया यह सबसे बड़ा घोटाला है।
किसी भी अपात्र को लाभ दिया जाना गंभीर मामला है। इसके लिए दोषी किसी को भी छोड़ा नहीं जाएगा चाहे कोई भी हो।
प्रवीण सिंह अढ़ायच, प्रभारी पीओ डूडा
Published on:
19 Oct 2018 02:41 pm
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