
national camera day special articles in satna
सतना। शब्दों की महत्ता पर कैमरे के अविष्कार ने अमूलचूल असर डाला और तब यह बात हर जुबान पर चढ़ गई थी कि एक हजार शब्दों के बराबर होती है एक फोटो। यह कैमरा ही था जिसकी एक फोटो एक हजार शब्दों पर भारी पड़ती थी। इस वैज्ञानिक युग में बदलती तकनीक ने कैमरों की विशिष्टता पर भी व्यापक असर डाला है। दो दशक पहले तक फोटोग्राफर और उसका कैमरा उसके रुतबे को बताता था, लेकिन आज हर हाथ में आए मोबाइल ने उन कैमरों की महत्ता और विशिष्टता को आम बना दिया है। आज इसी बदलाव को नेशनल कैमरा डे पर साझा कर रहे हैं।
कई दिन इंतजार के बाद मिलती थी फोटो
प्रकृति के करीब हों या दूर, हम हमेशा तस्वीरों में दर्ज होना चाहते हैं, उसका हिस्सा बनना चाहते हैं और इस चाहत को पूरा करता है कैमरा। दो दशक पहले तक जब कैमरों में डिजिटल क्रांति नहीं आई थी तब जीवन के हर महत्वपूर्ण पलों को अमिट बनाने का एक ही साधन हुआ करता था एनालाग कैमरा। इस कैमरे की कहानी रील से लेकर डार्क रूम तक चलती थी और दो दिन के इंतजार के बाद फोटो मिला करती थी। तब घर के छोटे-छोटे फंक्शन हों या फिर पूजा पाठ का आयोजन कैमरा मैन की पूछ परख खूब होती थी। फोटो के शौकीन लोग बाजार में, मेलों में स्टूडियो में जाकर अपनी फोटो खिंचवाते थे।
अब हर हाथ में कैमरा
आज के दौर में मोबाइल ने इसे गुजरे जमाना साबित कर दिया है। अब हर हाथ में कैमरा है। कोई भी पल हो या नजारा हो अब तुरंत कैमरे में कैद हो जाता है। फिर सेल्फी ने तो कैमरों की महत्ता ही खत्म सी कर दी है। तुरंत आपकी खींची फोटो आपके सामने होती है जिसे आप जब तक चाहें सुरक्षित रख सकते हैं। फोटोग्राफर वीरेन्द्र तिवारी बताते हैं कि पहले कैमरा अपने आप में एक संस्था थी। तब फोटो खींचना बच्चों का खेल नहीं होता था। एनालॉग कैमरे से फोटोग्राफी पेशेवर काम होता था।
फोटोग्राफी बच्चों का खेल
उस वक्त जिसके पास कैमरा होता था वह शहर की शान होता था। लेकिन अब डिजिटल युग में फोटोग्राफी वाकई बच्चों का खेल हो गया है। लेकिन इसने एक बहुत बड़े तबके का रोजगार खत्म कर दिया है। पहले 10 हजार की छोटी सी लागत में लोग फोटोग्राफी से अपनी रोजी रोटी आसानी से चला लेते थे। लेकिन मोबाइल कैमरे ने उनका यह रोजगार खत्म कर दिया। लेकिन इसके साथ ही एक बूम भी इस पेशे में आया है। आज नए कैमरों ने फोटोग्राफी की नई परिभाषा दी है।
1952 से कैमरे का साथ
कृष्णकला स्टूडियो के संचालक प्रेमचंद गुप्ता बताते हैं कि वे 1952 से फोटोग्राफी के पेशे में है। 40 साल से ज्यादा हो गए उन्हें सरकारी और निजी क्षेेत्र में फोटोग्राफी करते हुए। बताया कि उनके स्टूडियो में कई फोटोग्राफरों ने फोटोग्राफी सीखे जो आज नामवर फोटोग्राफर है। उन्होंने अपने पुराने सहेज कर रखे गए कैमरे दिखाते हुए बताया कि ये उस दौर की फोटोग्राफी की महत्ता और जलवे के गवाह है। इसलिए इन्हें संभालकर रखा हुआ है।
बढ़े रोजगार के अवसर
वीरेन्द्र बताते हैं कि हिन्दुस्तान में 90 फीसदी कैमरे से संबंधित जॉब वेङ्क्षडग फोटोग्राफी पर निर्भर है। ऐसे में आज के डिजिटल कैमरों ने इसे एक बड़ा बाजार दिया है। लिहाजा इस कारोबार ने बदले कैमरे के साथ एक बड़ा बाजार भी पैदा कर दिया है जिसमें लाखों कमाए जा सकते हैं। लेकिन आज कैमरे के बदलाव ने फोटोग्राफी की तकनीक को कमजोर कर दिया है। पहले कैमरा चलाना सिद्धहस्त का ही काम होता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसके साथ ही मशीनों में भी निर्भरता बढ़ी है। इसलिए डार्क रूम अब बीते जमाने की बात हो गए हैं। उनकी जगह कम्प्यूटर ने ले ली है।
मोबाइल ने फैशन फोटोग्राफी को दी नई पहचान
दिल्ली में फैशन फोटोग्राफी कर रहे सतना के फोटोग्राफर अक्षत मोंगिया बताते हैं कि निश्चित तौर पर मोबाइल क्रांति ने कैमरे का जलवा कम किया है। इतना ही नहीं आज तो मोबाइल ने फैशन फोटोग्राफी में भी अपनी उपयोगिता साबित कर दी है। कई फोटोग्राफर तो मोबाइल कैमरे से ही फैशन फोटोग्राफी को नए आयाम देने लगे हैं। लेकिन मोबाइल कैमरों के प्रभाव के म²ेनजर अब डिजिटल कैमरों में भी काफी क्रांति आ गई है।
कहां की है ये फोटो
आज के युग को कैमरा युग कहें तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। आसमान से पाताल तक खोजबीन और निगरानी में कैमरे की तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। कैमरा डे पर स्टिल कैमरा की एक तकनीक से आपको रूबरू करवा रहे है। पत्रिका फोटो जर्नलिस्ट सजल गुप्ता ने फुल फ्रेम एसएलआर कैमरा के जरिए सर्किट हाउस चौराहे के ऊपर से रात को लिया गया फोटो। इसमें आवागमन कर रहे वाहनों की हैड लाइट को कैमरे की तकनीक से अलग-अलग रंगों में दर्शाने का प्रयास किया है। इसमें लाल धारियां वाहनों के पीछे लगी लाइटों से बन रही है। जबकि सफेद धारियां वाहनों की हैड लाइटों से बन रही है। कैमरे को स्थित और गतिमान चीजों को कवर करने के मोड पर किया है। सर्किट हाउस चौराहे का वास्तविक चित्र दिख रहा है, जबकि गतिमान वाहनों और रोशनी अलग से रंगों में नजर आ रही है।
Published on:
29 Jun 2018 01:56 pm
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