
navratri puja vidhi hindi chaitra navratri 2018 kalash sthapana vidhi
1- पूर्व दिशा में ऐन्द्री (इंद्र शक्ति)
पूर्व दिशा की तरफ देवी की ऐन्द्री रूपी शक्ति हमारी रक्षा करती है। इन्हें इंद्र के समान शक्तियां प्राप्त हैं।
2- अग्निकोण में अग्निशक्ति
देवी पुराण और दुर्गा सप्तशती के अनुसार अग्निकोण वाली दिशा में माता की अग्नि शक्ति हमारी रक्षा करती है।
3- दक्षिण दिशा में वाराही
मां दुर्गा की वाराही रूपी शक्ति दक्षिण की दिशा तरफ से हमारी रक्षा करती है। कहा भी गया है कि दक्षिण की तरफ सिर करके नहीं सोना चाहिए, इससे आयु क्षीण होती है।
4- नैऋत्यकोण में खड्गधारिणी
नैऋत्यकोण में माता की खड्गधारिणी रूपी शक्ति हमारी रक्षा करती है। देवी ने हमारी रक्षा के लिए ही शस्त्र धारण किए हैं। दूसरे हाथ से वे वरमुद्रा के रूप में हमें दर्शन देती हैं।
5- पश्चिम दिशा में वारूणी
पश्चिम दिशा की ओर मां दुर्गा की वारूणी रूपी शक्ति हमारी रक्षा के लिए तैयार रहती है। मां दुर्गा के नौ रूप हमारी रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। भक्तों की रक्षा के लिए वे सदा आतुर रहती हैं।
6- वायव्यकोण में मृगधारिणी देवी
मृगधारिणी रूप में मां दुर्गा वायव्यकोण में हमारी रक्षा करती है। माता ने अपनी आठों भुजाओं में भक्तों की रक्षा के लिए ही शस्त्र धारण किए हैं। वे हर रूप में भक्तों को बचाती हैं।
7- उत्तर दिशा में कौमारी
उत्तर दिशा की ओर मां दुर्गा की कौमारी रूपी शक्ति हमारी सदैव रक्षा करती है। सिंह पर बैठी मां दुर्गा दैत्यों के नाश के लिए अलग-अलग रूपों में तत्पर खड़ी दिखाई देती हैं।
8- ईशान कोण में शूलधारिणी
ईशान कोण में मां दुर्गा की शूलधारिणी शक्ति हमारे लिए सदैव रक्षार्थ रहती हैं। दैत्यों का संहार करने के लिए देवताओं ने ही ये शस्त्र देवी को भेंट किए हैं।
9- ऊपर से ब्रह्माणी, नीचे की ओर से वैष्णोदेवी रक्षा करती हैं
मां दुर्गा के नौ रूपों में से ब्रह्माणी रूपी शक्ति हमारी ऊपरी भाग से तथा वैष्णोदेवी हमारी नीचे की ओर से रक्षा करती हैं।
भक्तों की रक्षा के लिए धारण किए नौ रूप
मां दुर्गा ने भक्तों की रक्षा के लिए नौ रूप धारण किए हैं। इन नौ स्वरूपों में वे शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंद माता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धि दात्री के रूप में पूजी जाती हैं। शस्त्र भी दैत्यों से हमारी रक्षा के लिए ही धारण किए हैं।
ऐसे करें पूजा, माता होंगी प्रसन्न
रोली, ज्वारे, चावल, भोग, ज्योत, रक्षासूत्र, व्रत, हवन, कन्या पूजन करने से मां दुर्गा की कृपा और प्रसन्नता हमें प्राप्त होगी। नौ दिन तक विधि-विधान से पूजन करें। यदि नौ दिन उपवास न कर सकें तो पहला और अंतिम उपवास जरूर करें। इससे माता की कृपा परिवार पर बनी रहती है।
हमारे इन अंगों की ये देवियां करती हैं रक्षा
वाम (बाएं) अंग की रक्षा अजिता देवी, दाएं अंग की रक्षा अपराजिता देवी, उद्योतिनी देवी शिखा की, मस्तिष्क की उमादेवी, ललाट की रक्षा मालाधारिणी, भौहों की यशस्विनीदेवी, नेत्रों और नथुनों की यमघंटादेवी, भगवती देवी कानों की, कालिका देवी होठों की, मां सरस्वती जिव्हा की, कौमारी दांतों की, चंडिका कंठ की, चित्रघंटा गले की, महामाया तालु की, कामाक्षी ठोढ़ी की, सर्वमंगला वाणी की, भद्रकाली ग्रीवा की, धर्नुधरी मेरूदंड की, खड्गिनी देवी दोनों कंधों की, वज्रधारिणी देवी भुजाओं की, अंबिका देवी अंगुलियों की, शूलेश्वरी नाखून की, कुलेश्वरी देवी पेट की, विंध्यवासिनी घुटनों की, ललिता देवी हृदय की, महाबला देवी पिंडलियों की, तैजसी देवी चरणों की, ऊध्र्वकेशिनी देवी केशों (बालों) की रक्षा करती हैं।
Published on:
17 Mar 2018 06:10 pm
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