
new smart city satna
सतना। स्मार्ट शहरों की सूची में शामिल अपना शहर महानगरों की तर्ज पर विकास की उड़ान भरने की तैयारी में है। शहर को स्मार्ट बनाने के लिए अधिकारी प्रतिदिन पसीना बहा रहे हैं। लेकिन, शहर विकास की जमीनी सच्चाई यह है कि यहां स्मार्ट सिटी का कंट्रोल सेंटर भले ही खुल गया हो पर नगर निगम प्रशासन शहर में आज तक एक जन शिकायत केंद्र नहीं खोल पाया जहां जनता फोन लगाकर अपनी शिकायत दर्ज करा सके।
शिकायतों का 24 घंटे में निदान हो सके। नगर निगम कार्यालय में जनता के लिए कोई हेल्पलाइन नंबर नहीं होने के कारण पानी, बिजली एवं साफ-सफाई जैसी मूल सुविधाओं के लिए भी जनता को सीएम हेल्पलाइन (181) में शिकायत दर्ज करानी पड़ रही है। शहर की छोटी-छोटी समस्याओं के निराकरण के लिए सीधे सीएम हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराने से जहां लोगों को सहायता देरी से मिलती है, वहीं नाली साफ कराने व मृत पशु उठाने जैसी शिकायतें एल-4 लेवल तक जाने से शहर सरकार की साख को बट्टा लग रहा है।
ऑफलाइन मोड पर शहर सरकार
एक ओर निगम प्रशासन शहर को स्मार्ट एवं डिजिटल बनाने के दावे कर रहा है, वहीं नगर निगम की व्यवस्थाएं अभी भी कागज पर टिकी हुई हैं। नगर निगम में टैक्स जमा करने से लेकर सभी सरकारी कामकाज ऑफलाइन हो रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि यदि किसी के घर पानी नहीं आया तो उसे इसकी शिकायत दर्ज कराने निगम कार्यालय जाना पड़ता है, क्योंकि नगर निगम में घर बैठे शिकायत दर्ज कराने और उसके समाधान की आज तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। नाली साफ काराने व स्ट्रीट लाइन बंद होने की शिकायत के लिए भी निगम के अधिकारी-कर्मचारी जनता से एक पन्ने का आवेदन पत्र मांगते हैं।
अधिकारी नहीं उठाते फोन
शहर की जनता समस्या होने पर सीधे विभाग प्रमुख से शिकायत कर सके, इसके लिए निगम प्रशासन ने सभी अधिकारियों को सरकारी मोबाइल नंबर अलॉट किए हैं, लेकिन निगम के अधिकांश अधिकारी या तो अपना सरकारी नंबर बंद रखते हैं या फिर जनता की कॉल रिसीव नहीं करते। एेसे में मूलभूत सुविधाओं के लिए मोहताज जनता समस्या के समाधान के लिए 181 पर निर्भर है।
Published on:
05 Jul 2018 11:22 am
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