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ऋण माफी तो हुई नहीं, दूसरे खाते से बिना सहमति बैंक ने निकाल ली पेंशन

बचत खाते से राशि तो निकाली ही साथ ही उसे माइनस भी कर दिया  

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No rin mafi, bank withdraw pension from other account without consent

No rin mafi, bank withdraw pension from other account without consent

सतना. एक ओर प्रदेश सरकार लगातार किसान हित के निर्णय ले रही है साथ ही अधिकारियों को अपनी ऋण माफी योजना का लाभ किसानों तक तत्काल पहुंचाने की बात भी कह रही है। दूसरी ओर स्थिति यह है कि किसान की ऋण माफी तो हो नहीं रही बल्कि उनके चालू खाते जिसमें पेंशन की राशि आती है उसे बिना उसकी सहमति से निकाल कर किसान क्रेडिट कार्ड खाते में जमा कर लिया गया। इतना ही नहीं किसान के बचत खाते को ऋणात्मक भी दिखा दिया गया। अब किसान बैंक के चक्कर लगाता घूम रहा है लेकिन बैंक मैनेजर उसे डांट डपट कर भगा रहे हैं। ऐसे में सवाल ऋण माफी योजना पर तो खड़े हो ही रहे हैं साथ ही किसान हितों की अनदेखी का सच भी सामने आ गया है। मामला रामनगर इलाहाबाद बैक का है।

जानकारी के अनुसार रामनगर विकासखंड के ग्राम कर्रा निवासी हीरालाल मिश्रा ने कृषि कार्य के लिये अपने किसान क्रेडिट कार्ड से डेढ़ लाख रुपये का ऋण लिया था। स्कूल शिक्षा विभाग में शिक्षक के पद से सेवा निवृत्ति के बाद वे खेती किसानी का काम कर रहे हैं। इसके लिये उन्होंने किसान क्रेडिट कार्ड (खाता नंबर 5024030303) बनवाया था और इसी से ऋण लिये थे। अप्रैल 2018 तक उन्होंने नियमित ऋण अदा किया। इसके बाद परिस्थितियां खराब होने से ऋण जमा नहीं कर सके। इस बीच कांग्रेस सरकार की ऋण माफी योजना आई। इस योजना के तहत उनका खाता नंबर पंचायत भवन में सफेद फार्म के लिये चस्पा हुआ। जिसमें 90 हजार तक का ऋण बकाया था। इस आधार पर उन्होंने 26 जनवरी 2019 को ऋण माफी का सफेद फार्म भी भर दिया।
बैठे रह गए आस लगाए

ऋण माफी का फार्म भरने के बाद वे इस आशा में बैठे रहे कि अब उनकी ऋण माफी हो जाएगी। इसके साथ ही शासन स्तर से इस आशय के निर्देश भी बैंकों को दिए गए कि जिन किसानों की ऋण माफी होनी है उनसे ऋण की वसूली न की जाए क्योंकि उनके ऋण का शटलमेंट होना है। लेकिन हीरालाल मिश्रा के होश तब उड़ गए जब इलाहाबाद बैंक शाखा रामनगर के बैंक मैनेजर ने उनके बचत खाता 22143140807 से उनकी पूरी पेंशन की राशि निकाल ली और खाते में ऋणात्मक बैंलेंस अंकित कर दिया। चौंकाने वाली बात तो यह रही कि इसके लिये बैंक मैनेजर ने तो ग्राहक हीरालाल मिश्रा को कोई सूचना दी न ही इस संबंध में उनकी सहमति प्राप्त की।
जानकारी लेने पर लगा रहे फटकार

हीरालाल मिश्रा ने बताया कि जब वे इस संबंध में बैंक मैनेजर के पास गए तो पहले उन्होंने सीधे मुंह बात नहीं की और कहते रहे कि हमारी मर्जी है ऋण लिये हो तो जहां से पाएंगे वहां से राशि ले लेगें। जब उन्हें बताया गया कि ऋण माफी का आवेदन दिया है और बिना सहमति के कैसे राशि निकाल ली गई तो बैंक मैनेजर का कहना रहा कि ऋण माफी के लिये सरकार से बात करों बैंक को इससे कोई मतलब नहीं है। वह अपना पैसा वसूलेगा चाहे जहां से वसूलना पड़े और डांट फटकार कर भगा दिया। अपनी सेवानिवृत्ति की पेंशन पर निर्भर हीरालाल मिश्रा अपने बचत खाते के ऋणात्मक हो जाने से न तो अपनी जरूरते पूरी कर पा रहे हैं और न ही उनकी कोई सुनवाई हो रही है।
यह अकेला मामला नहीं

सतना जिले में ऋण माफी के पात्र किसानों से जबरिया वसूली का यह पहला मामला नहीं है। इस तरह के सैकड़ों मामले आ चुके हैं तो कुछ मामले सीएम हेल्पलाइन में भी है। लेकिन अब न तो शासन इनकी सुन रहा है और न ही प्रशासन। इस मामले में रामनगर क्षेत्र से आने वाले कांग्रेस जिलाध्यक्ष दिलीप मिश्रा से बात की गई तो उन्होंने ऋण माफी के मामले में कुछ स्पष्ट न बोलते हुए खुद इस मामले को दिखवाने की बात कही है।

" हमारे द्वारा कुछ गलत नहीं किया गया है। लंबी अवधि से ऋण जमा नहीं कर रहे थे लिहाजा किसान के बचत खाते से राशि लेकर क्रेडिट कार्ड में डाली गई है।"
- बैंक मैनेजर इलाहाबाद बैंक शाखा रामनगर

" बिना सहमति के किसी खाते से राशि नहीं निकाली जा सकती है। लेकिन ऐसा किया गया है तो इसे दिखवाते हैं।"
- पीसी वर्मा, एलडीएम