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SATNA: रसूख की बिल्डिंग धराशायी, निगम अध्यक्ष और सिटी मजिस्ट्रेट में हॉट-टॉक, हुई नारेबाजी

आरटीओ ने निरस्त किए सात बसोंं के परमिट423 बसों के पहिए थमे, यात्री हुए परेशान  

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Rasukh's building collapsed, sloganeering

Rasukh's building collapsed, sloganeering

सतना. माफियाराज खत्म करने को लेकर एक दिन पहले हुई बैठक में अधिकारियों को कलेक्टर का फ्री-हैण्ड मिलने के बाद गुरुवार को सुबह से ही जिला प्रशासन, नगर निगम और पुलिस प्रशासन की टीम बस स्टैण्ड परिसर पहुंच गई। यहां शासकीय भूमि के ग्रीन बेल्ट में अवैध तरीके से बने बस एसोसिएशन के कार्यालय को धराशायी कर दिया गया। हालांकि इस कार्यालय को गिराने में अफसरों को काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा। कार्रवाई को लेकर कई अफसर और नेता में हॉट टॉक भी हुई। इधर विरोध में बस ऑपरेटर्स ने बसों का संचालन पूरी तरह से ठप कर दिया। स्थिति को देखते हुए आरटीओ को बुलवाया गया। समझाइश के बाद भी जब बसे नहीं चली तो 7 बसों का परमिट निरस्त कर दिया। इसके बाद शाम 4 बजे से एसोसिएशन के अवैध कार्यालय को गिराने की कार्रवाई शुरू की गई। देर शाम तक कार्यालय पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया। इधर कार्रवाई के बाद भी बस एसोसिएशन अपनी जिद में अड़ा है और बसों के पहिये थमे हुए हैं।

यूं बनी भूमिका
माफियाराज खत्म करने के लिये बुधवार को कलेक्टर की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में निगमायुक्त अपनी पूरी तैयारी से पहुंचे थे। बैठक के बाद रसूखदारों के अवैध कब्जे की सूची कलेक्टर से साझा की गई। जिसमें पाया गया कि बस एसोसिएशन ने अवैध तरीके से सरकारी ग्रीन बेल्ट पर अपना कार्यालय बना रखा है। कई बार निगम का अमला इसे गिराने पहुंचा है लेकिन रसूख के चलते कार्यवाई नहीं हो पा रही थी। इस बीच एसोसिएशन न्यायालय की शरण में भी जा चुका है। लेकिन वहां से भी राहत नहीं मिली है। लिहाजा इस बिल्डिंग को गिराने का निर्णय लेते हुए कार्यवाई के आदेश जारी कर दिए गए। गुरुवार को जिला, ननि और पुलिस प्रशासन की संयुक्त टीम यहां पहुंची और पूरे बस स्टैण्ड परिसर के अवैध कब्जे हटाने के साथ ही शाम को बस एसोसिएशन के कार्यालय को धराशायी कर दिया।

दिनभर रहे गहमागहमी के हालात

बसस्टैंड परिसर की ग्रीन बेल्ट एरिया में अवैध रूप से खड़ी की गई बस ऑनर्स एसोसिएशन की बिल्डिंग को गिराने के लिए गुरुवार को प्रशासन को काफी मशक्कत करनी पड़ी। कई दौर की वार्ता और विरोध का क्रम जारी रहा। सुबह से शुरू हुई कार्रवाई देरशाम तक अंजाम में पहुंच सकी। शाम ६ बजे तक कार्यालय भवन ढहा दिया गया। इस बीच दोपहर को बसस्टैंड परिसर में अवैध कब्जे भी ढहाए गए। नाले के ऊपर बनाए गए अवैध निर्माण को गिराया गया। उधर कार्रवाई के विरोध में सतना बस ऑनर्स एसोसिएशन ने अनिश्चितकालीन बस हड़ताल की घोषणा कर दी है। दावा है कि 432 बसों के पहिए थम गए हैं।

गठित किया संयुक्त दल
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने बस स्टैंड परिसर के ग्रीन बेल्ड में अवैध रूप से बनाई गई बस एसोसिएशन की बिल्डिंग गिराने की कार्रवाई के लिए जिला और पुलिस प्रशासन से सहयोग मांगा था। पूर्व में कई बार इस भवन को गिराने की असफल कोशिश को देखते हुए कलेक्टर सतेन्द्र सिंह ने सहयोग के लिए एसडीएम पीएस त्रिपाठी, सिटी मजिस्ट्रेट संस्कृति शर्मा, तहसीलदार मानवेन्द्र सिंह को भेजा तो पुलिस प्रशासन की ओर से सीएसपी विजय प्रताप सिंह, डीएसपी ट्रैफिक हिमाली सोनी सहित कई थाना प्रभारी और बल संलग्न किया गया। सुबह लगभग 10 बजे निगम का अतिक्रमण दस्ता बस स्टैंड परिसर में भवन को गिराने के लिए पहुंचा। इनके साथ सहायक आयुक्त नीलम तिवारी और उपयायुक्त विशाल सिंह होम गार्ड के जवानों के साथ थे। जब कार्रवाई प्रारंभ की जाने लगी तो यहां मौजूद बस संचालक कार्रवाई का विरोध करने लगे। इस दौरान सूचना मिलने पर अपने कुछ पार्षद साथियों के साथ नगर निगम अध्यक्ष अनिल जायसवाल भी पहुंच गए। स्थिति को देखते हुए यहां तैनात सिटी मजिस्ट्रेट संस्कृति शर्मा ने मोर्चा संभाला। सिटी मजिस्ट्रेट संस्कृति शर्मा ने निगम अध्यक्ष सहित बस संचालकों को कार्य में बाधा नहीं डालने के लिए कहा। बताया कि इमारत अवैध है और इसे गिराया जाएगा। इस पर नगर निगम अध्यक्ष जायसवाल ने कार्रवाई का विरोध जारी रखा, तब निगम अध्यक्ष और सिटी मजिस्ट्रेट की जमकर हॉट टॉक हुई। हालांकि इसके बाद हुई वार्ता में एसोसिएशन को दस्तावेज प्रस्तुत करने का समय देते हुए कार्यालय को सील किया गया। तत्पश्चात बस स्टैण्ड परिसर के अन्य अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान बीच में वार्ता करने पहुंची सिटी मजिस्ट्रेट से बस संचालकों की वार्ता विफल हुई तो बस संचालकों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की।

एक मीटर दूर रह कर बात करें ...

एसोसिएशन का कार्यालय गिरने की सूचना मिलने पर नगर निगम अध्यक्ष अनिल जायसवाल, पार्षद कुदरत उल्ला बेग, नीरज शुक्ला के साथ मौके पर पहुंचे। यहां अवैध निर्माण को गिराने की तैयारी कर रहे उपायुक्त विशाल सिंह से निगम अध्यक्ष ने कहा कि तुम क्यों बवाल करा रहे हो। सब तुम्हारे कारण हो रहा है। तब सहायक आयुक्त नीलम तिवारी ने कहा कि अध्यक्ष्जी आप ऐसा क्यों बोल रहे हैं। जवाब में अध्यक्ष ने कहा कि मुझे जनता से वोट लेना है। तब नीलम ने कहा कि इस तरह से जनता वोट देती है क्या? इस कार्रवाई से जनता का क्या लेना देना? तैश में आए अध्यक्ष ने कहा कि निगम मैं चलाता हूं। नीलम का जवाब रहा कि क्या ऐसे निगम चलता है। यह देख वहां खड़ीं सिटी मजिस्ट्रेट संस्कृति शर्मा ने अध्यक्ष को समझाने के लिए दखल दिया और ननि अध्यक्ष को पीछे जाने कहा। इस पर अध्यक्ष ने कहा कि आपको क्या दिक्कत है। इस दौरान जायसवाल निकट खड़े रहे। यह देख सिटी मजिस्टे्रट ने उन्हें पीछे जाने कहा और तल्ख संवाद होता रहा। स्थिति देखते हुए सिटी मजिस्ट्रेट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आप जो भी हैं एक मीटर की दूरी तो बना कर ही रखें और पीछे जाएं। साथ ही उन्हें पीछे भी किया। इस दौरान कहा कि आप लोगों से पर्याप्त बात की जा चुकी है। अगर आपके कागज आ रहे हैं तो बहुत बढिय़ा अन्यथा कार्रवाई होगी। हम कार्रवाई करने आए हैं तो यहीं खड़े रहेंगे।
खड़ी की बसें, लगा मजमा
इस दौरान तक यहां काफी संख्या में बस संचालक और उनके सहयोगी पहुंच चुके थे। बस संचालकों के कहने पर यहां बसें खड़ी कर दी गईं। जिन बसों का नंबर था वे भी अपनी बस नहीं ले जा रहे थे। स्थिति को देखते हुए ट्रैफिक डीएसपी हिमाली सोनी ने मोर्चा संभाला। उन्होंने बसों को रवाना करवाने यातायात प्रभारी वर्षा सोनकर को भेजा। इस दौरान भी काफी तू-तड़ाक की स्थिति बनी। तभी यहां राजेश सिंह गहरवार भी पहुंच गए। उन्होंने अपने बस चालक को उतार कर वहां से भगा दिया। तब यातायात प्रभारी ने जानकारी सिटी मजिस्ट्रेट को दी। इस पर आरटीओ को मौके पर बुलाया गया। आरटीओ आए तो लेकिन उनका रवैया स्थल में प्रशासन के बहुत साथ नहीं दिखा। वे यह कहते दिखे कि बस संचालकों के सम्मान को बनाए रखा जाना चाहिए। तब यहां मौजूद तहसीलदार यह सुन तल्ख हो गए और कहा कि प्रशासन का सम्मान कौन बनाएगा? हालांकि अधिकारियों ने शासकीय कार्य में बाधा डालने और तय नंबर पर वाहन न ले जाने और अव्यवस्था फैलाने को देखते हुए इनके परमिट रद्द करने के निर्देश दिए। इस दौरान यहां अफरा तफरी का माहौल बना रहा। हालांकि इस दौरान बस संचालकों के दस्तावेज के इंतजार में अधिकारी कार्रवाई बीच में रोक कर बस स्टैण्ड में ही कुर्सी जमा कर बैठ गए।

हुई तल्ख बहस और फिर ढहाया भवन

चार बजे तक जब एसोसिएशन कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सका और उधर निगम कार्यालय से भी दोबारा दस्तावेज परीक्षण के बाद सब कार्रवाई की हरी झण्डी दी गई तो फिर कार्रवाई के लिए अफसर उठ खड़े हुए। इस दौरान बसों का संचालन प्रारंभ करने को लेकर एक बार फिर बस आपरेटर्स और सिटी मजिस्ट्रेट के बीच बहस हुई। फिर कार्यालय गिराने के निर्देश दिए गए। इस दौरान एसोसिएशन के लोगों को कार्यालय का सामान हटाने कहा गया लेकिन कोई सामने नहीं आया तब दो बुल्डोजर लगाकर भवन को धराशायी कर दिया गया। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल यहां तैनात रहा।
इधर कुछ के गिराए, कुछ को छोड़ा
बस स्टैण्ड परिसर के उत्तरी हिस्से में नाले के ऊपर अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की गई। इसमें चौहान ट्रेवल्स के आफिस को तो गिरा दिया गया पर यहां के कई अन्य रसूखदारों के अवैध कब्जे नहीं हटाए जा सके। श्रीसाइन से लेकर एक कपड़ा कारोबारी तक के अतिक्रमण नहीं गिरे। उधर आगे भी नाले के उपर का अवैध कब्जा नहीं हटा। यहांं एक भट्ठी हटाई गई तो एक दुकान में बिना अनुमति दूध के कारोबार को बंद कराया गया लेकिन नाले का पूरा अतिक्रमण नहीं हटने को लेकर लोगों में आक्रोश साफ नजर आ रहा है।