
rbi new rules for banks
रमाशंकर शर्मा @ सतना। केंद्र और राज्य सरकार शासकीय योजनाओं के हितग्राहियों को योजना लाभ की राशि उनके खाते में दे रही है। काफी संख्या में यह शिकायत भी सामने आती है कि हितग्राहियों के बैंक खाते बंद (निष्क्रिय) हो गए हैं। इससे अब उन खातों में कोई राशि नहीं ट्रांसफर हो सकती। ऐसे में शासन द्वारा हितग्राही को मिलने वाला योजना का लाभ नहीं मिल पाता है।
इन मामलों को देखते हुए शासन ने बैंकों को आदेशित किया है कि ऐसे सभी निष्क्रिय खातों को अलग प्रोडेक्ट कोड देकर सक्रिय किया जाए। इस कोड के आवंटित होने के बाद इन हितग्राहियों के खातों पर निष्क्रिय होने का प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
यह जारी हुए निर्देश
आयुक्त संस्थागत वित्त डॉ मनोज गोविल ने सभी राज्यस्तरीय बैंक प्रमुख, एलडीएम, राज्य सहकारी बैंक के एमडी को पत्र लिखा है। उसमें कहा है कि शासकीय योजना के हितग्राहियों के बैंक खाते निष्क्रिय होने के कारण विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली राशि ऐसे खातों में अंतरित नहीं हो पा रही है। जबकि केन्द्र और राज्य सरकार द्वारा अपनी योजनाओं के तहत डीबीटी, चेक क्रेडिट, इलेक्ट्रानिक ट्रांसफर के माध्यम से राशि हितग्राहियों के खाते में दी जाती है। ऐसे निष्क्रिय खातों में अंतरण में होने वाली समस्या को देखते हुए आरबीआइ के निर्देश हैं कि बैंक ऐसे खातों के लिए डिफरेंट प्रोडेक्ट कोड आवंटित करें। ताकि इन खातों में सरकार द्वारा दी जाने वाली राशि जमा हो सके। इसलिए सभी अधीनस्थ शाखाओं को निर्देशित किया जाए कि ऐसे निष्क्रिय बैंक खातों को चिह्नित कर डिफरेन्ट प्रोडेक्ट कोड आवंटित करें। ऐसा करने से कोर बैंकिंग सिस्टम में ऐसे हितग्राहियों के खाते में निष्क्रिय होने का प्रतिबंध लागू नहीं होगा। इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए गए हैं।
यह है मामला
सामान्य तौर पर बैंकिंग सिस्टम में अगर किसी खाताधारक द्वारा दो साल तक खाते से लेनदेन नहीं किया जाता है तो उस खाते को निष्क्रिय घोषित कर दिया जाता है। जिसे आम बोल-चाल की भाषा में खाता बंद होना भी कहते हैं। खाता निष्क्रिय होने के बाद इस खाते में किसी भी प्रकार की राशि न तो जमा हो सकती है और न ही निकाली जा सकती है। इस खाते को पुन: संचालित करने के लिए संबंधित खाता धारक को संबंधित बैंक शाखा में स्वयं प्रस्तुत होकर अपने जीवित होने का प्रमाण पत्र देना होता है। तब जाकर वह खाता वापस सक्रिय (चालू) होता है।
2013 के आदेश, बैंकों को जानकारी नहीं
आयुक्त संस्थागत वित्त ने आरबीआइ के जिस आदेश का हवाला दिया है वह आदेश 17 सितंबर 2012 और एक जुलाई 2015 के हैं। अर्थात आरबीआइ सरकारी हितग्राहियों के खाते निष्क्रिय होने से बचाने के आदेश काफी पहले कर चुका है। इससे साबित हो रहा है कि बैंक प्रबंधन इस आदेश की अनदेखी कर रहे हैं। इधर इस मामले में एलडीएम केके आर्या से बात की गई तो उन्होंने ऐसे किसी आदेश की जानकारी नहीं होने की बात कही और बताया कि इस आदेश को दिखवाया जाएगा। यह भी कहा कि अभी तक आरबीआइ द्वारा उन्हें शासकीय योजना के हितग्राहियों के लिये कोई पृथक कोड नहीं बताया गया है।
लाभ से वंचित हो रहे थे हितग्राही
सरकारी योजनाओं का ज्यादातर लाभ गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करने वाले लोगों, मजदूर वर्ग या पेंशन धारियों को मिलता है। इन्हें बैंकिंग सिस्टम की जानकारी नहीं होने अथवा अनपढ़ होने के कारण कई बार इनके खाते बंद हो जाते हैं। इससे शासन द्वारा जब इनके खाते में योजनाओं का लाभ डाला जाता है तो खाता बंद होने के कारण यह राशि उन्हें नहीं मिल पाती है।
Published on:
05 May 2018 10:51 am
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