
gold medal
फटे जूते-मौजों में भी उसने अपने सपनों को कुलांचे भरने से नहीं रोका। पक्के इरादे और बुलंद हौसलों की बदौलत रीवा के पैरा एथलीट सचिन ने सफलता का सोना प्रदेश की झोली में डाला। खेलो इंडिया की नेशनल चैम्पियनशिप में 12 दिसंबर को सचिन ने 400 मीटर की रेस 1.11 मिनट में पूरी कर न सिर्फ रिकॉर्ड बनाया, बल्कि स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया। उसने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के 8 पैरा एथलीट को मात देकर मप्र का नाम रोशन किया है।
सचिन का जन्म उमरिया जिले के असोढ गांव में हुआ। 2010 में पिता रामनरेश साहू 4 बहन व 2 भाई को लेकर रीवा के ढेकहा आ गए। यहां कुल्फी का ठेला चलाकर जीवनयापन करने लगे। माली हालत देख बुआ व फूफा ने आश्रय दिया।
कोरोनाकाल में मिली निराशा
ग्वालियर में पैरा एथलेटिक्स ट्रायल में उनका चयन स्टेट टीम में हुआ। टीटी नगर भोपाल में कई दौर के प्रशिक्षण के बाद 2020 में नेशनल के लिए क्वालिफाई किया पर कोरोना के कारण प्रतियोगिताएं रुक गई। कई माह इंतजार के कारण हताश हो गया। हालांकि यह प्रतियोगिता 2021 में हुई, तब 100 मीटर की रेस में चौथी रैंक मिली। 2022 में भुवनेश्वर में हुई नेशनल चैंपियनशिप में 400 मीटर की रेस 1.17 मिनट में पूरी की और ब्रॉन्ज मेडल जीता।
सचिन ने बताया, पहले क्रिकेटर बनना चाहता था। बायां पैर छोटा था, इसलिए आगे नहीं बढ़ सका। एथलेटिक्स कोच बीके धवन (ग्वालियर) के संपर्क में आए तो उन्होंने पैरा एथलीट बनने की सलाह दी। दिन में कुल्फी का ठेला लगाकर परिवार की मदद की। रीवा में एथलेटिक्स मैदान नहीं था, तो सुबह-रात रेलवे स्टेशन पर दौड़ने लगे।
Published on:
18 Dec 2023 01:54 pm
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