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किसानों को 250 लाख करोड़ रुपए का लाभ, खाद में करना होगा ये बदलाव

जैविक खेती पर जोर, यूरिया-डीएपी के प्रयोग से उर्वरा शक्ति घटी, ग्लोबल वार्मिंग भी जिम्मेदार

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सतना

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deepak deewan

Oct 12, 2022

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जैविक खेती पर जोर

सतना. ग्रामोदय मेले के तीसरे दिन रसायनमुक्त प्राकृतिक खेती पर राष्ट्रीय संवाद हुआ। विशेषज्ञों ने प्राकृतिक खेती के फायदे बताए। खेती में रसायनों के दुष्प्रभाव पर चिंता व्यक्त की। यहां गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने अहम बात कही. उन्होंने कहा कि कैंसर जैसे रोग रासायनिक खादों का प्रतिफल है। रसायनिक खाद का अंधाधुंध इस्तेमाल रोक दें तो किसानों को करोड़ों रूपए का लाभ हो सकता है.

राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि यूरिया डीएपी के प्रयोग से खेत की उर्वरा शक्ति घटी है। ग्लोबल वार्मिंग का आधार रासायनिक उर्वरक है। प्राकृतिक एवं पारंपरिक खाद को बढ़ावा दें और प्रकृति की ओर लौट चलें। इससे देश का 250 लाख करोड़ रुपए विदेशों में जाने से रोक सकते हैं। यह राशि किसानों को ही देनी होती है. इसलिए केमिकल खाद का प्रचलन बदलने से वे ये भारी भरकम राशि बचा सकते हैं.

उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने बताया कि पंजाब में सर्वाधिक रासायनिक खाद प्रयोग की जाती है। इससे सर्वाधिक असाध्य रोगी भी वहीं से आते हैं। उत्तर प्रदेश सरकार बुंदेलखंड के सातों जिलों के 47 विकास खंडों में प्राकृतिक खेती का कार्य आरंभ कर चुकी है। इस अवसर पर बताया गया कि प्राकृतिक खेती का स्वरूप नानाजी देशमुख ने पूर्व में ही स्पष्ट कर दिया था, जो पूर्णतया गौ आधारित है।

डॉ हरिओम कृषि वैज्ञानिक कुरुक्षेत्र ने कहा कि जैविक खेती नहीं की गई तो 1.1 से 6.4 डिग्री सेल्सियस ताप बढ़ सकता है। जैविक खेती में सूक्ष्म जीवाणुओं की वृद्धि होती है जो पौधों की जड़ों पर नाइट्रोजन का स्थिरीकरण करके हानिकारक पदार्थों को नष्ट करते हैं। देसी गाय के गोबर एवं उसके आमाशय में जो द्रब्य निकलता है उसमें ऑक्सीजन बहुत अधिक होती है। इससे जैविक खेती की गुणवत्ता बढ़ जाती है।

पुरानी दोस्ती को...
कार्यक्रम के तीसरे दिन कुमार विश्वास की महफिल सजी। उन्होंने जैसे ही पुरानी दोस्ती को इस नई ताकत से मत तोलो... से कविता पाठ शुरू किया, पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा। कविताओं का सिलसिला देररात तक चला। मेला के तीसरे दिन भाषण प्रतियोगिता भी हुई। इसमें आदर्श दिनचर्या एवं स्वास्थ्य, चित्रकूट के विकास में सामाजिक संगठनों की भूमिका, आत्मनिर्भर भारत में स्वावलंबी ग्रामों का योगदान विषय पर छात्रों ने भाषण प्रस्तुत किया। इसमें 34 स्कूलों के विद्यार्थी शामिल हुए।