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सांझा चूल्हा महाघोटाला रिटर्न: मासूमों का राशन डकार गया विभाग, आदर्श ग्राम में नहीं पहुंचा गेहूं-चावल

जनवरी से नहीं पहुंचा राशन, एक-दूसरे पर मढ़ रहे दोष
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सतना

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Suresh Mishra

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Updated: 6 Jun 2018, 10:45 AM IST

sanjha chulha maha ghotala in satna madhya pradesh

sanjha chulha maha ghotala in satna madhya pradesh

सतना। वही तहसील, वही आंगनबाडिय़ां, वही समूह और वही सिस्टम...! सांझा चूल्हा महाघोटाले की फिर वही कहानी दोहराई गई है। बड़ा खेल कर आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों का खाद्यान्न विभाग डकार गए। कोटर तहसील के 90 फीसदी समूहों में सांझा चूल्हा का खाद्यान्न जनवरी माह से नहीं बंटा है। महिला बाल विकास विभाग चुप्पी साधे बैठा है। छह माह से बच्चों को खाना नहीं मिला और इसकी खबर जिम्मेदार अफसरों को नहीं लगी। इसी से साबित हो रहा है कि इस पूरे खेल में सभी संबंधितों की मिलीभगत है।

महिला बाल विकास के अधिकारी अपना पल्ला झाड़कर नान को दोषी बता रहे हैं। नान के अधिकारी बता रहे कि खाद्यान्न उनके यहां से जारी हो गया। राशन दुकानों से बताया जा रहा कि खाद्यान्न पहुंचा नहीं। अब सवाल यह खड़ा हो रहा कि आखिर खाद्यान्न जमीन निगल गई या आसमान खा गया। यह सब तब हो रहा जब तत्कालीन कलेक्टर नरेश पाल ने पत्रिका के ऐसे ही खुलासे के बाद व्यवस्था तय करते हुए सभी स्तर पर जिम्मेदारी तय की थी।

ये है मामला
कोटर क्षेत्र के स्व-सहायता समूह (जिनके पास आंगनबाड़ी में आने वाले बच्चों को सांझा चूल्हा योजना के तहत खाद्यान्न बना कर देने की जिम्मेदारी है) का कहना है कि उन्हें महिला बाल विकास विभाग ने आरओ दे दिया है और इंट्री भी कर दी है। लेकिन, राशन दुकान जाने पर बताया जा रहा कि खाद्यान्न नहीं आया है। लिहाजा जनवरी से वे अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं। मामले में यहां के समूह संचालकों ने कहा कि वे लगातार राशन दुकानों और अधिकारियों के चक्कर लगाकर थक गए। कोई सुनवाई नहीं हो रही। खाद्यान्न नहीं पहुंचने से जनवरी से बच्चों को भोजन नहीं बना कर दे पा रहे हैं।

अभिलेखों में खाद्यान्न की इंट्री

मामले में ज्ञानदायिनी महिला स्वसहायता समूह अबेर के संचालक ने बताया कि उनके अभिलेखों में खाद्यान्न की इंट्री कर दी गई और आरओ भी जारी कर दिया गया। लेकिन, राशन दुकान में खाद्यान्न ही नहीं पहुंचा जिससे उन्हें खाद्यान्न नहीं दिया गया। यही कहना है जय गुरुदेव महिला स्वसहायता समूह माधौपुर लखनवाह, प्रतिमा स्वसहायता समूह बिहरा क्रमांक 1, सद्भावना स्वसहायता समूह अबेर का। कोटर क्षेत्र के सभी स्वसहायता समूह यही जानकारी दे रहे हैं।

राशि दी, मुक्ति पाई
महिला बाल विकास विभाग ऑनलाइन सिस्टम से समूह वार खाद्यान्न जनरेट करने के बाद आरओ जारी करता है। उसकी एक्जाई सूची नागरिक आपूर्ति विभाग को देने के साथ राशि आवंटित करता है। विभाग की जिम्मेदारी है कि वह देखे कि जारी की गई राशि से खाद्यान्न संबंधित समूहों तक पहुंचा या नहीं। निगरानी के लिए विभाग के पास आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, सहायिका, सुपरवाइजर से लेकर परियोजना अधिकारी तक शामिल हैं।

हास्यास्पद सफाई
महिला बाल विकास अधिकारी मनीष सेठ सफाई दे रहे कि कोटर क्षेत्र के कुछ समूहों की मैपिंग नहीं होने की जानकारी सामने आई है। नान को पत्र लिखा गया है। राजधानी के अधिकारियों का कहना है कि अगर मैपिंग नहीं होती तो आरओ कैसे जारी होता। दूसरा मैपिंग नहीं भी हुई तो यह जिम्मा भी महिला बाल विकास विभाग का ही है। उधर, खाद्य विभाग के डीएम जीपी तिवारी का कहना है कि उनके यहां से लगातार खाद्यान्न जारी हुआ है।

अबेर में नहीं पहुंचा खाद्यान्न
सांसद आदर्श ग्राम अबेर में भी खाद्यान्न नहीं पहुंचा है। यहां के समूह भी परेशान घूम रहे हैं। अब पता यह भी चला है कि मामले को निपटाने के लिये राशन दुकान संचालक को यह कहा जा रहा है कि जो भी आपके स्टाक में है उससे खाद्यान्न पहुंचा दें आगे देख लिया जाएगा।

लाखों का खेल
सूत्रों का कहना है कि सांझा चूल्हा के नाम पर मिलीभगत से लाखों का खेल होता है। इसके केन्द्र में ट्रांसपोर्टर होता है। खाद्यान्न तीन माह का एडवांस रिलीज होता है। ऐसे में पूरा सिस्टम एक बार का खाद्यान्न गायब कर देता है और हो हल्ला होने पर अगले तीन माह का खाद्यान्न पहुंचा दिया जाता है। इस सर्किल में तीन माह के खाद्यान्न का बंदरबांट कर लिया जाता है। जिसकी राशि महिला बाल विकास विभाग, नागरिक आपूर्ति निगम, ट्रांसपोर्टर सभी को बंटती है।

गंभीर मामला है। तत्काल जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा कर रहा हूं। साथ ही इसमें जिसने भी गफलत की होगी उस पर कार्रवाई करवाई जाएगी।
गणेश सिंह, सांसद