
Satna: A heated argument between MP Ganesh and MLA Nilanshu
सतना. बंद कमरे में हो रही खनिज प्रतिष्ठान मद की बैठक के दौरान उस वक्त स्थिति तनाव पूर्ण हो गई जब सांसद गणेश सिंह ने चित्रकूट विधायक पर सरकारी जमीनों को कब्जे में लेकर विकास में बाधक बनने का आरोप लगा दिया। इससे शुरू हुई तल्ख बहस यहां तक पहुच गई कि सांसद ने यह तक कह दिया कि अगली बार आप चित्रकूट विधायक नहीं बनोगे।
हैण्डपंप से बिगड़ी बात
बैठक में डीएमएफ फंड के बंटवारे की बात चल रही थी। जिसमें प्रभारी मंत्री अपने हिस्से के दस करोड़ रुपये अन्य कार्य में उपयोग कर दिये जाने पर असंतुष्ट रहे। कहा कि जो 10 करोड़ रुपये अपने हिस्से में लिये थे वे तो भगवान के लिये थे। इस राशि से चित्रकूट में विकास कार्य होने थे। इसके लिये उन्होंने चित्रकूट विधायक से हामी भी भरवाई। जिस पर नीलांशु ने सहमति भी जताई। इस दौरान चर्चा शुरू हो गई कि पूरा पैसा चित्रकूट में ही खर्च होगा क्या। ऐसे में तो अलग से फिर विधायक को क्यों दें। इस बीच नीलांशु ने कहा कि उनके यहां बाणसागर के पानी की ओपन चैनल परियोजना नहीं है लिहाजा हैण्ड पंप चाहिए होंगे। इस पर सांसद ने कहा कि मैने चित्रकूट के लिए भी स्वीकृत करवा ली है। जल्द काम भी शुरू हो जाएगा। अभी प्रपोजल गया है। नीलांशु ने कहा कि प्रपोजल कब होगा कब नहीं होगा, अभी तो आदमी प्यासे मर रहा है। छोटे छोटे पुरवा है। होते होते टाइम लगेगा। सांसद बोले की, नई-नई 2024 में मैं कराऊंगा। बहस को आगे बढ़ाते हुए नीलांशु ने कहा कि 24 में बहुत टाइम है। कौन रहे कौन न रहे। अब सांसद को गुस्सा आ चुका था। उन्होंने कहा कि 24 में मैं तो रहूंगा आप 23 में नहीं रहोगे। इस पर नीलांशु ने चुटकी ली कि ये तो समय बताएगा कि कौन रहेगा कौन नहीं।
बात बदली लेकिन फिर उलझे
इसके बाद नीलांशु ने बात बदलते हुए कहा कि चित्रकूट के अंदर की रोड टूटी है कोई व्यवस्था नहीं है। इस पर सांसद ने तंज कसते हुए कहा कि दो बार से आप ही अध्यक्ष थे। जवाब में नीलांशु ने कहा कि 20 साल से आप सांसद हो क्या किया है चित्रकूट के लिए। जिस पर सांसद ने कहा मैने काम किये हैं लेकिन आप सरकारी जमीन पर रोड नहीं बनने दे रहे हो। सरकारी जमीनें अपने नाम करवाते जा रहे हो। इस पर नीलांशु भड़क गए और कहा कि किसी के बाप की जमीन नहीं है। प्रभारी मंत्री 1956 से जाकर जांच करा लें। बात बिगड़ती देख प्रभारी मंत्री ने मामला शांत कराया।
राशि बंटवारे पर भी विवाद
डीएमएफ की राशि वंटवारे पर भी जमकर विवाद हुआ। बैठक में जिपं सीईओ ने बताया कि 18 करोड़ रुपये आ चुका है। मार्च तक शेष राशि भी आ जाएगी। 23 करोड़ रुपए और आएंगे। इस तरह की चर्चा में यह पूछा गया कि कार्ययोजना कितने की बननी है। बताया गया कि 33 करोड़ रुपये की। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि मेरे हिस्से का 10 करोड़ रुपए अलग कर दें। इस राशि में मेरे बताए काम होंगे। इसके बाद 23 करोड़ के बंटवारे पर चर्चा शुरू हुई।
मेरी सात विधानसभा मुझे चाहिए 7 करोड़
बंटवारे पर तय किया गया कि विधायकों को 3-3 करोड़ रुपये दे दिये जाएं। 2 करोड़ रुपये सांसद को दिये जाएंगे। इस पर सांसद नाराज हो गए। कहा कि मेरी तो सात विधानसभा है इस हिसाब से मुझे तो सात करोड़ रुपए चाहिए। तभी जिला पंचायत की प्रधान सुधा सिंह ने कहा कि उनका भी कार्यक्षेत्र पूरा जिला है। मुझे भी चाहिए। इसी बीच लगातार तल्ख बहसें होती रहीं। अंत में तय किया गया कि सभी विधायकों के हिस्से 2-2 करोड़, सांसद को 4 करोड, जिपं प्रधान को 2 करोड़, 1 करोड़ रुपये से सीसीटीवी कैमरे और शेष राशि कलेक्टर के तय कामों के लिये निर्धारित किया गया।
Published on:
31 Jan 2022 10:53 am
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