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satna election: किसी ने की पूजा तो कोई पहुंचा मंदिर दर्शन करने, कुछ को भाया माता का दुपट्टा

पर्चा दाखिल करने से पहले प्रत्याशियों ने धर्मपथ के जरिये चली राजनीति की चाल योगेश घर से पूजा करके निकले तो सिद्धार्थ ने राह के हर मंदिर में मत्था टेका, सईद ने गले में डाल लिया माता का दुपट्टा

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satna election: किसी ने की पूजा तो कोई पहुंचा मंदिर दर्शन करने, कुछ को भाया माता का दुपट्टा

satna: Candidate in God's refuge for mayor election

सतना। महापौर चुनाव के लिए शनिवार का दिन नामांकन दाखिले का आखिरी दिन था। प्रत्याशियों ने नामांकन को भी भुनाने की पूरी कोशिश की। पर्चा दाखिल करने जहां रैली के जरिये शक्ति प्रदर्शन तो किया ही वहीं धर्म के जरिये भी मतदाताओं को संकेत देने की कोशिश की। इनका यह तरीका अच्छा खासा चर्चा में भी रहा। यह अलग बात है कि इसका असर आगे क्या होगा। लेकिन इस बार की चुनावी लड़ाई काफी रंग देखने को मिलेंगे यह तो अब समझ में आने लग गया है।

शनिवार को नामांकन दाखिल करने के लिए भाजपा प्रत्याशी योगेश ताम्रकार अपनी पार्टी के सभी पार्षदों और पदाधिकारियों के साथ अच्छी खासी रैली लेकर नामांकन दाखिल करने निकले। लेकिन इसके पहले उन्होंने भगवान के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। यह तस्वीर भी खूब वायरल हुई।

वहीं कांग्रेस प्रत्याशी सिद्धार्थ कुशवाहा ने भी रैली की भारी भरकम भीड़ के जरिये अपनी ताकत का प्रदर्शन तो किया। लेकिन रैली की राह में पड़ने वाले हर धर्म के मंदिर और देवताओं के सामने पहुंच कर मत्था टेका। वे जहां शिवालय में जाकर शंकर जी की पूजा किये तो भगवान महावीर के सामने भी शीश नवाया। कोतवाली चौक में अग्रसेन प्रतिमा पर माल्यार्पण किया तो सेमरिया चौक में बजरंग बली की भक्ति करते नजर आए।

इनसे इतर बसपा से अपना नया सफर शुरू करने वाले पूर्व मंत्री सईद अहमद ने भी धर्म की अलग राह पकड़ी। अपने पिता की तरह साफ्ट हिन्दुत्व का संकेत देने उन्होंने जय माता दी वाला दुपट्टा ही गले में लटका लिया। बसपा के नीले दुपट्टे पर केसरिया रंग का पट्टा अलग से नजर आ रहा था जो एक मुस्लिम प्रत्याशी की सामाजिक समरसता का संदेश देने का प्रयास था।

धर्म पड़ेगा हावी या मुद्दे?

शुरुआती दौर में ही प्रत्याशियों ने जिस तरीके से धर्मपथ की राह पकड़ी है उससे अब यह कयास लगने शुरू हो गए हैं कि इस बार के चुनाव प्रचार में धर्म की राजनीति होगी या विकास के मुद्दे असर दिखाएंगे। शहर की जनता के सामने खराब सड़के, पड़ोस शहरों से पीछे होता सतना, स्मार्ट सिटी के विकास की तस्वीर, सीवर लाइन जैसे तमाम मुद्दे हैं लेकिन क्या ये असर डाल पाएंगे या फिर जाति धर्म की लड़ाई मैदान में होगी यह अब आगे समझ में आएगा। लेकिन चुनाव प्रचार इस बार नये-नये रंग दिखाएगा यह तो नजर आने लगा है।