
बच्ची को देते थे नशीली दवाई
सतना. मासूम बच्चियों के साथ यौन दुराचार नई बात नहीं है, बेचारी बच्चियां हर कहीं इस शोषण का शिकार हो रहीं हैं। उनके साथ घरवाले ही ऐसी हरकत करते रहते हैं। यहां तक कि अब तो बच्चियों के पिता या भाई ही उन्हें अपनी हवस का शिकार बना रहे हैं। मजबूर बच्चियां शिकायत भी नहीं कर पातीं और कई बार तो शिकायत के बाद कोई कार्रवाई भी नहीं होती। बच्चियों के साथ दुराचार का एक मामला तो ऐसा आया कि एकबारगी कोई विश्वास ही नहीं कर पाया। महज नौ साल की एक मासूम से उसकी मां का प्रेमी ही दुराचार कर रहा था। मां ने खुद इस काम में प्रेमी की सहायता की। अब पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।
जानकारी के अनुसार युवती अपने प्रेेमी के साथ भाग गई थी। वह अपनी बेटी को भी ले गई और प्रेमी के साथ पुणे में रहने लगी। यहां कुछ दिनों तक तो ठीकठाक चला लेकिन बाद में उसके प्रेमी ने नौ साल की बच्ची के साथ गलत हरकत करना शुरु कर दिया। वह इस अबोध बच्ची के साथ दुराचार करने लगा।
सबसे बुरी बात तो यह है कि पति को रोकने—टोकने की बजाए महिला ने इस हैवानियत में उसका पूरा साथ दिया। पुलिस ने बताया कि महिला अपने प्रेमी से अपनी ही नौ साल की बेटी का रेप कराती थी। इसके लिए ये दोनों बच्ची को नशीली दवाई देते थे। मजबूर बच्ची के समक्ष यह सबकुछ सहने के अलावा और कोई चारा नहीं था।
कुछ समय बाद बच्ची उसकी ननिहाल पहुंची तो उसने हिम्मत जुटाई और मां व उसके प्रेमी की इस दरिंदगी का खुलासा किया। यह बात जानकर हर कोई कांप उठा। खबर मिलने के बाद पीडि़ता का पिता भी आया और बच्ची के साथ हुई गलत हरकत की शिकायत करने थाने पहुंचा, पर उसकी कोई सुनवाई ही नहीं हुई। इस पर पिता ने वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की जिसके बाद महिला और उसके प्रेमी के खिलाफ केस दर्ज किया है।
ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की जाती है। पॉक्सो एक्ट के तहत उम्रकैद की सजा मिलने पर दोषी जेल से जिंदा बाहर नहीं आ सकता। यानि उसे जिंदगी भर जेल में ही रहना होगा।
पॉक्सो एक्ट क्या है
यह एक्ट 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ यौन अपराधों से संबंधित है। 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के साथ यौन दुराचार के सभी केस पॉक्सो एक्ट के तहत ही दर्ज किए जाते है।
इसमें मुख्यत 2 श्रेणियां हैं—
12 साल से कम उम्र के बच्चो के साथ दुराचार- पॉक्सो एक्ट में 12 वर्ष से कम आयु के बच्चों के रेप या दुराचार सिद्ध होने पर आजीवन कारावास और मौत की सजा देने का प्रावधान है।
12 साल से अधिक उम्र के बच्चो के यौन अपराध- 12 साल से अधिक उम्र के बच्चो के साथ यौन अपराध सिद्ध होने पर न्यूनतम 10 साल और अधिकतम 20 साल की कड़ी सजा का प्रावधान है।
प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट यानि पॉक्सो को 2012 में लागू किया गया था। ये एक्ट 18 साल से कम उम्र के लड़के और लड़कियों, दोनों पर एक समान रूप से लागू होता है। पॉक्सो एक्ट में पहले मौत की सजा का प्रावधान नहीं किया गया था। इसमें संशोधन कर सन 2019 में मौत की सजा का प्रावधान किया गया।
Published on:
18 May 2023 09:51 am
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