
satna smart city Awara sadak news in hindi
सतना। स्मार्ट सिटी के विकास पर नगर निगम प्रशासन और राज्य सरकार करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। जनता को ग्रीन और क्लीन सिटी का सब्जबाग दिखाया जा रहा है। लेकिन, शहर की स्वच्छता, यातायात व्यवस्था में बाधक बने आवारा पशुओं से निजात दिलाने के लिए निगम प्रशासन के पास कोई कार्ययोजना नहीं है। शहर की एेसी कोई कॉलोनी या सड़क नहीं, जहां पर आवारा पशु विचरण न कर रहे हों।
प्रमुख सड़कों, सार्वजनिक स्थलों तथा कॉलोनियों में धमाचौकड़ी मचाते आवारा पशुओं का आतंक बढ़ता जा रहा है। कभी-कभी तो ये आवारा मशेवी राह चलते लोगों पर हमला भी कर देते हैं। ट्रैफिक व्यवस्था में बाधक बने इन पशुओं को देखकर लोग बस यही कहते हैं... यह स्मार्ट सिटी है या पशुओं का चारागाह।
ऐसी है शहर की सूरत
1: गहरानाला से बस स्टैण्ड
सतना शहर में जैसे ही कोई वाहन रीवा की ओर से प्रवेश करता है तो उसे गहरानाला के पास ही सड़क पर बैठे जानवरों को देखकर अहसास हो जाता है कि अब वह सतना शहर की सीमा में प्रवेश कर गया है। इसके बाद पशुओं का अगला जमावड़ा हवाई अड्डा मोड़ के पास मिलता है। यहां से कुछ आगे जाने पर कोलगवां थाने के सामने भी काफी संख्या में जानवर मिल जाते हैं। जो लगातार सेमरिया चौराहे तक मौजूद रहते हैं।
2: सेमरिया चौक से बिड़ला रोड
कोलगवां क्षेत्र में जगह-जगह जानवरों का झुंड मिलता है। यहां से मंडी मोड़ से लेकर संतोषी माता चौराहे पर भी पशुओं का जमावड़ा रहता है। बदखर में भी जानवर सड़क पर काबिज रहते हैं। यहां स्थिति यह होती है कि पहले वाहन चालक उतर कर जानवरों को सड़क से दूर हटाते हैं तब आगे जा पाते हैं।
3: बस स्टैंड से सर्किट हाउस चौक
शहर की सबसे व्यस्त मानी जाने वाली यह सड़क भी जानवरों से मुक्त नहीं कराई जा सकी। यहां हालात यह हैं कि हर 500 मीटर की दूरी पर कोई न कोई जानवर यातायात बाधित करता नजर आ जाता है। रात में तो हालात और बुरे हो जाते हैं। सड़क पर ही जानवर अपनी आरामगाह बना लेते हैं। ऐसे में रात को गुजरने वाले वाहनों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
4: सर्किट हाउस से कोठी तिराहा
सर्किट हाउस से जब सिविल लाइन चौराहे की ओर बढ़ेंगे तो मास्टर प्लान से ओवर ब्रिज को आने वाली सीढिय़ों के ठीक सामने बीच सड़क पर जानवरों ने अपना अस्थाई आवास बना रखा है। यहां दिनभर झुंड में वे खड़े नजर आ जाते हैं। इससे आगे जाने पर हर 200 मीटर की दूरी पर जानवर नजर आ जाएंगे।
5: कोठी तिराहे से बगहा
यह मार्ग तो जानवरों के आश्रय स्थल के रूप में उभरा है। यहां कोठी तिराहे से लेकर बगहा तक लगभग तीन सौ की संख्या जानवर सड़क पर ही जुगाली करते नजर आ जाएंगे। 60 किमी प्रति घंटा की निर्धारित गति सीमा पर यहां वाहन शायद ही नजर आते हैं बल्कि यहां की गति सीमा थम-थम कर ही चलती है।
6: कोठी तिराहे से पतेरी मोड़
कोठी तिराहे से पतेरी तक की भी सड़क जानवरों से मुक्त नहीं है। यहां भी कोई वाहन सामान्य गति ने नहीं निकल सकता है। पन्नानाका, विराट नगर और पतेरी मोड़ पर तो हमेशा जानवरों के झुंड नजर आ जाते हैं। अक्सर जानवरों की धमाचौकड़ी दुर्घटना का कारण भी बन जाती है।
7: सिविल लाइन से कलेक्ट्रेट
शहर के सबसे संवेदनशील माने जाने इस मार्ग में जिसमें जिले के सभी आला अधिकारियों का आना-जाना होता है, जानवरों की धमाचौकड़ी से अछूता नहीं है। मजे की बात तो यह है कि इसे रोज देखने के बाद भी अधिकारियों ने इस ओर किसी तरह की पहल नहीं की है।
ठंडे बस्ते में निगम का हांका अभियान
आवारा पशुओं को पकडऩे की जिम्मेदारी नगर निगम की है लेकिन उसका हांका अभियान ठंडे बस्ते में है। अस्पताल के अंदर इधर-उधर भटक रहे आवारा पशु न केवल लोगों को चोटिल कर रहे हैं बल्कि गंभीर रूप से बीमार लोगों को कई संक्रमित बीमारियां भी दे रहे हैं।
शहर में पांच हजार से अधिक पशु
निगम प्रशासन का पूरा ध्यान शहर को सुंदर व स्मार्ट बनाने में है। पर शहर के लिए सबसे बड़ी समस्या बन चुके आवारा जानवरों की धरपकड़ के लिए निगम प्रशासन के पास कोई कारगर योजना नहीं। सड़कों पर रात-दिन दुर्घटनाओं को आमंत्रण दे रहे ५ हजार से अधिक आवारा पशुओं को जब पकडऩे की बात आती है तो निगम के अधिकारी असहाय हो जाते हैं। स्मार्ट सिटी बनने की कगार पर खड़े शहर की निगम सरकार के पास न आवारा पशुओं को पकडऩे हांका गैंग है और न इसका कोई स्थाई हल।
जिला अस्पताल में पशुओं ने जमाया डेरा
जिला अस्पताल भी अघोषित गोशाला बना हुआ है। पूरे अस्पताल परिसर में खुलेआम घूम रहे आवारा पशु लोगों की परेशानी का सबब बने हैं। बड़ी तादाद में यहां अपना घर बना चुके आवारा पशु आए दिन किसी न किसी को चोटिल कर रहे हैं। हाल तो यह हैं कि अब यह आवारा पशु अस्पताल के अंदर भी धमा-चौकड़ी मचाने लगे हैं। इन आवारा जानवरों की आवारगी यहां मरीजों और उनके परिजनों को परेशान कर रही है लेकिन जिम्मेदारों की नजर इन पर नहीं पड़ रही है।
सड़कों पर घूमते आवारा पशु शहर की यातायात व्यवस्था एवं स्वच्छता में सबसे बड़ी बाधा हैं। इनकी धर-पकड़ के लिए जल्द ही योजना बनाकर कार्रवाई की जाएगी। शहर के अंदर संचालित डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट किया जाएगा, ताकि सड़कें खाली हो सकें।
प्रवीण सिंह, निगमायुक्त, नगर पालिक निगम सतना
Published on:
21 Jul 2018 12:05 pm
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