सतना। मझगवां तहसील की आदिवासी बाहुल्पंय चायत पड़वनिया जागीर के रामनगर खोखला गांव में रहने वाली रानी बाई का दो वर्षीय बेटा अतिकुपोषित होने पर मझगवां के पोषण पुनर्वास केन्द्र (एनआरसी) में भर्ती कराया जाता है। उसके साथ उनकी दादी और मां भी आती है। रानी गर्भवती है और नौवां महीना चल रहा है। इस दौरान प्रसव पीड़ा होने पर उसे एनआरसी से लगे सरकारी अस्पताल में लाया जाता है। लेकिन दर्द अपने आप कम हो जाता है, लिहाजा उसे प्रसव कक्ष से बाहर महिला वार्ड में ले आया जाता है। प्रसव पीड़ा कम होने पर रानी एनआरसी में भर्ती अपने बेटे के पास पहुंच जाती है।
एनआरसी में ताला लगा कर चला गया स्टाफ
इधर एनआरसी में सपोर्ट स्टाफ के रुप में बतौर कुक भूपेन्द्र सिंह जिसे राजू के नाम से जाना जाता है कि ड्यूटी केयर टेकर के रूप में रात में लगाई जाती है। लेकिन राजू पूरी रात ड्यूटी नहीं करता है। रात ज्यादा होने पर ताला लगाकर चाबी अंदर रुके लोगों को देकर चला जाता है। ऐसा ही उसने मंगलवार की रात को भी किया। ताला लगाकर चाबी रानी की सास को दे गया।
प्रसव पीड़ा हुई तो फिर पहुंची अस्पताल
इधर देर रात एक बजे के लगभग रानी को फिर से प्रसव पीड़ा हुई। वह अपनी सास से एनआरसी का ताला खुलवा कर बगल स्थित अस्पताल पहुंची। यहां पाया कि अस्पताल में कोई भी स्टाफ मौजूद नहीं है। खोज बीन करने पर पता चला कि स्टाफ सो रहा है। उन्हें उठाने की कोशिश प्रसूता की सास ने की लेकिन कोई सुना नहीं और न ही बाहर आया। लिहाजा सास और प्रसव पीड़ा से कराह रही बहू रानी वापस एनआरसी लौट आते हैं।
एनआरसी में हुआ प्रसव
रानी ने बताया कि अस्पताल में स्टाफ के नहीं उठने पर वापस एनआरसी आ गये। दर्द कम नहीं हो रहा था। तब सास और यहां मौजूद एक अन्य महिला की देखरेख में सामान्य प्रसव हुआ। सुबह जब एनआरसी की सुबह पाली वाले केयर टेकर आए तब अस्पताल पहुंचे। इसके बाद चिकित्सकीय परीक्षण शुरू हुआ और भर्ती किया गया। यहां जच्चा बच्चा की हालत ठीक बताई गई है।
पहली घटना नहीं
मझगवां अस्पताल की यह पहली घटना नहीं है जब रात का स्टाफ लापरवाही करते मिला है। कुछ महीने पहले रात्रि कालीन स्टाफ की लापरवाही के कारण एक प्रसूता की मौत भी हो चुकी है। तब हंगामा होने के बाद अस्पताल की व्यवस्था सुधारने का दावा सीएमएचओ ने किया था। लेकिन स्थिति अभी भी जस की तस ही है।