
सतना. जिले में आदिवासियों से छल का सनसनीखेज मामला सामने आया है। भू-कारोबारियों ने राजस्व महकमे की मदद से दो आदिवासी बहनों को मृत बताकर उनकी जमीनें दूसरे के नाम करा ली। इस फर्जीवाड़े में समीप की ग्राम पंचायत के सरपंच-सचिव ने भी साथ दिया। मृत्यु प्रमाण पत्र इन्होंने ही जारी किया था। मामला यहीं पर नहीं थमा। आरोपियों ने इस जमीन को बैंक में गिरवी रखकर केसीसी के जरिए 10 लाख का लोन ले लिया। मामले का खुलासा होने पर पुलिस ने मामला दर्ज कर दो आरोपी गिरफ्तार कर लिए हैं। सह आरोपी भी बनाए गए हैं। सरपंच, सचिव, पटवारी और तहसीलदार की भूमिका जांची जा रही है। पूरा घटनाक्रम मैहर तहसील के भदनपुर का है।
यह है मामला
भदनपुर के रिवारा गांव निवासी चुनबदिया कोल की उमड़ौर गांव में 4.254 हेक्टेयर जमीन थी। इसका आराजी नंबर 72/4, 74/1, 75/1 और 77/1 है। चुनबदिया और उनकी पत्नी के निधन के बाद यह जमीनें 2016 में उनकी दो बेटियों लल्ली और कौशल्या के नाम पर आ गईं। इधर लल्ली शादी के बाद अपने ससुराल देवरी और कौशल्या बंधी में रह रही थी। जमीनें सीमेंट फैक्ट्री की लीज एरिया में थीं। जब फैक्ट्री ने इन जमीनों को खरीदने के लिए भू-स्वामियों से संपर्क शुरू किया तो ये सभी जमीनें गिरधारी लाल और ओम प्रकाश के नाम पर दर्ज मिलीं। फैक्ट्री के बिचौलियों ने इनसे संपर्क कर खसरे देखे और सर्च किया तो नामांतरण संबंधी आदेश नहीं मिला। इससे इन्हें शंका हुई। लिहाजा इनसे जमीन नहीं ली गई, साथ ही लल्ली और कौशल्या से संपर्क किया। तब लल्ली और कौशल्या को पता चला कि उनकी जमीन दूसरे के नाम दर्ज हो गई है।
फिर हुआ खुलासा
यह पता चलते ही लल्ली और कौशल्या मैहर तहसीलदार मानवेंद्र सिंह के पास पहुंचीं। वहां बताया गया कि इनके नाम पर मृत्यु प्रमाण पत्र बनवा कर इनके वारिसों के नाम जमीन की गई है। इन्होंने जब मृत्यु प्रमाण पत्र देखा तो पाया कि यह मृत्यु प्रमाण पत्र उनकी पंचायत के सरपंच सचिव ने नहीं बल्कि किसी तीसरी पंचायत भदनपुर दक्षिण पट्टी अमगार की सरपंच सुमन सिंह ने बनाया है। इसमें इनकी मृत्यु होने की फर्जी जानकारी देने के साथ अमगार गांव की बस्ती नई दिल्ली निवासी दो युवकों गिरधारी लाल और ओमप्रकाश को वारिस बता दिया। इस सजरे का बिना परीक्षण किए पटवारी प्राची पाठक ने फर्द पुल्ली तैयार कर प्रस्ताव तहसीलदार को दे दिया, जहां से नामांतरण कर दिया गया। इस खेल में जब फर्जीवाड़ा सतह पर आ गया तो तहसीलदार ने अपनी कलम बचाने आनन-फानन में जमीनें वापस लल्ली और कौशल्या के नाम कर दीं।
सामने आया दूसरा खेल
लल्ली और कौशल्या ने जमीन अपने नाम होने पर जब फैक्ट्री से संपर्क किया तो फैक्ट्री ने जमीन लेने से इनकार कर दिया। कहा कि यह जमीन यूको बैंक में बंधक है। बैंक से पता चला कि इस बैंक से केसीसी के जरिए 10 लाख रुपए का लोन गिरधारीलाल और ओमप्रकाश ने लिया है। जब तक यह लोन जमा नहीं होगा जमीन बंधक रहेगी। इस पर दोनों बहनें फिर तहसीलदार के पास पहुंचीं। पहले से उलझ चुके तहसीलदार ने मामला निपटाने बदेरा पुलिस को दोनों युवकों के विरुद्ध एफआइआर दर्ज करने लिखा।
दर्ज नहीं हुआ प्रकरण
अगस्त 2022 को तहसीलदार के पत्र के बाद भी 8 माह तक जब एफआइआर दर्ज नहीं हुई तो दोनों बहनों ने जनपद सदस्य राजेश के साथ एसपी और आइजी को मामले की शिकायत की। तब गिरधारी लाल और ओमप्रकाश के खिलाफ एफआइआर दर्ज हुई।
सामने आया मास्टर माइंड
पुलिस ने दोनों आरोपियों पर धारा 417, 420, 467, 471, 120 बी सहित 3,2,5 एससी एसटी एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज किया। आरोपियों ने तब अपने बयान में बताया कि उन्हें कोई जानकारी नहीं है। उनसे रावेंद्र मिश्रा ने आधार कार्ड और दो फोटो लिए थे। फिर कहा कि तुमको जमीन बंटन में दिलाएंगे और 50-50 हजार रुपए दिए। शेष राशि उसने रख ली। इस तरह इस पूरे खेल का मास्टर माइंड रावेंद्र मिश्रा भी सह अभियुक्त बनाया गया। अब पुलिस फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों की पतासाजी कर रही है।
'' मामले में फर्जी दस्तावेज किसने और कैसे बनाए, फर्जी नामांतरण कैसे हो गया इसकी भी जांच की जा रही है। जल्द ही इसका भी खुलासा होगा '' - संतोष तिवारी, थाना प्रभारी बदेरा
Published on:
31 Jul 2023 10:36 am

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