
चौमुखनाथ : 1300 साल पुरानी हिन्दुस्तान की इकलौती विषपायी शिव की प्रतिमा
सतना। महादेव का नाम लेते ही मन में शिव का जो स्वरूप ध्यान में आता है वह है कैलाश पर्वत पर विराजमान शिव शंभू। जब हम शिवलिंग की पूजा कर रहे होते हैं तो कमोवेश जेहन में भगवान शिव की यही आकृति उभरती है और मंदिरों में भी शिव का यही स्वरूप भी देखने को मिलता है। लेकिन विराट, विकराल, त्रिनेत्रधारी, विन्ध्वसक रुद्रावतारी महादेव का चेहरा हिन्दुस्तान के इकलौते मंदिर में देखने को मिलेगा, वह है पन्ना जिले के नचना कोठार स्थित चौमुखनाथ मंदिर। यहां 1300 साल पुराने चौमुखनाथ मंदिर में बेहद दुर्लभ चौमुखी शिवलिंग है। हर मुख की अलग-अलग भाव भंगिमा है। कहने को तो यह मंदिर पन्ना जिले में है लेकिन सतना जिले से पहुंचना ज्यादा बेहतर है और ज्यादातर लोग इधर से ही दर्शन करने जाते हैं।
यह है शिवलिंग की खासियत
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग की खासियत देखें तो भोलेनाथ का पहला चेहरा समाधि में लीन सदाशिव भोलेनाथ का है। दूसरा चेहरा विषपान किए हुए शिव का है। यह चेहरा भारत में कहीं और नहीं है। तीसरा चेहरा दूल्हे के वेश में भगवान शंकर का है। चौथा चेहरा महादेव के अर्द्ध नारीश्वर अवतार का है। इनके बीच में शिवलिंग है। सभी चेहरों को पत्थर पर केश, कुंडल, मुकुट, सर्प, चंद्रमा, भाला, भाल से उकेरा गया है। पुरातत्व विभाग द्वारा संरक्षित यह मंदिर और प्रतिमा भारत में अपने आप में अनोखी और अकेली बताई जाती है।
सातवीं शताब्दी का मंदिर
यह मंदिर प्रतिहार राजवंश द्वारा बनवाया गया है। 7वीं शताब्दी में नागरा शैली में इसे बनाया गया है। शिव मंदिर का शिखर भी इसी शैली में है। लेकिन इस मंदिर के सामने चौथी शताब्दी में पार्वती मंदिर भी बनाया गया है। लेकिन यह मंदिर शिखर विहीन है। इस मंदिर का संरक्षण पुरातत्व विभाग करता है और इस परिसर का लगातार विकास कार्य भी हो रहा है।
इस तरह पहुंचे
पन्ना जिले के सलेहा नचना कोठार चौमुखनाथ मंदिर जाने के लिये सतना शहर से एनएच 75 से नागौद तक जाना होता है। इसके बाद नागौद से सलेहा रोड में एनएच 943 में जाना पड़ेगा। इस रोड से गंज गांव तक पहुंच कर यहां से चौमुखनाथ के लिए ग्रामीण रोड में जाना पड़ेगा।
Published on:
10 Jul 2023 12:26 pm
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