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चतुर्ग्रही योग में मनेगी शनिचरी हरियाली अमावस्या, वर्ष का अंतिम सूर्य ग्रहण भी इसी दिन

11 अगस्त को मनाई जाएगी शनिचरी हरियाली अमावस्या

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shanichari hariyali amavasya significance date and time

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सतना। सावन माह में पहला बड़ा त्योहार 11 अगस्त को शनिचरी हरियाली अमावस्या के रूप में मनाया जाएगा। इस बार शनिचरी अमावस्या चतुर्ग्रही योग में मनाई जाएगी। इस दिन कर्क राशि में सूर्य, बुध, चंद्र और राहु ग्रहों का एक साथ होने से चतुर्ग्रही योग बना रहा है। वहीं शनिचरी हरियाली अमावस्या के दिन इस वर्ष का अंतिम सूर्यग्रहण भी पड़ेगा, हालांकि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।

इसके चलते इसका प्रभाव शनिचरी अमावस्या पर नहीं पड़ेगा। सावन का माह हरियाली और प्रकृति को समर्पित रहता है। इस समय चहुंओर हरियाली छाई रहती है। इसी के चलते सावन माह में हरियाली और प्रकृति के पूजन का विधान बनाया गया है, जिसके अनुसार सावन माह में शनिचरी हरियाली अमावस्या मनाई जाती है।

इस तरह बन रहा अच्छा संयोग
पं. मोहन द्विवेदी ने बताया कि इस वर्ष प्रकृति के साथ-साथ हरियाली अमावस्या पर ग्रहों का भी अच्छा संयोग बन रहा है। शनिचरी अमावस्या पर त्रिवेणी संयोग होने के साथ-साथ चतुर्ग्रही योग भी बन रहा है। सूर्य, बुध, राहु व चंद्रमा कर्क राशि में रहेंगे। वहीं मंगल केतु मकर राशि में रहेंगे, जबकि शुक्र नीच राशि में रहेंगे। ग्रहों की यह गणना 11 अगस्त को सूर्यउदय के समय आश्लेष नक्षत्र के साथ रहेगी। हरियाली अमावस्या पर ग्रहों का यह संयोग शिव और शनि की कृपा प्राप्त करने के लिए उत्तम है।

क्या करें इस दिन
- शनि से पीड़ित व्यक्ति सरसों के तेल से भगवान शनि का अभिषेक करें इससे उन्हें स्वास्थ्य लाभ होगा वहीं शत्रुओं पर भी विजय मिलेगी।
- धन प्राप्ति के लिए: तुलसी, आँवला, केल, बिल्वपत्र का वृक्ष लगाएं।
- सौभाग्य प्राप्ति के लिए: अशोक, अर्जुन, नारियल, बरगद (वट) का वृक्ष लगाएं।
- संतान प्राप्ति के लिए: पीपल, नीम, बिल्व, नागकेशर, गुड़हल, अश्वगन्धा को लगाएं।
- मेधा और बुद्धि प्राप्ति के लिए शंखपुष्पी, पलाश, ब्राह्मी, तुलसी का पौधा लगाना चाहिए।
- सुख प्राप्ति के लिए नीम, कदम्ब, धनी छायादार पौधे लगाने चाहिए।
- आनन्द प्राप्ति के लिए हरसिंगार (पारिजात) रातरानी, मोगरा और गुलाब का पौधा लगाना चाहिए।