
Shiva Mahaprana is the book to destroy sins
सतना. शिव पुराण में प्रमुख रूप से शिव भक्ति और शिव महिमा का विस्तार से वर्णन है। लगभग सभी पुराणों में शिव को त्याग, तपस्या, वात्सल्य तथा करुणा की मूर्ति बताया गया है। शिव सहज ही प्रसन्न हो जाने वाले एवं मनोवांछित फ ल देने वाले हैं। शिव पुराण में शिव के जीवन चरित्र पर प्रकाश डालते हुए उनके रहन-सहन, विवाह और उनके पुत्रों की उत्पत्ति के विषय में विशेष रूप से वर्णन है।
यह उद्गार कथा व्यास श्रीनिधि शास्त्री महाराज ने ग्राम लौलाछ में मोहनलाल मिश्र के निवास में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के दौरान व्यक्त किए। शिव महिमा की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव सदैव लोकोपकारी और हितकारी हैं। त्रिदेवों में इन्हें संहार का देवता भी माना गया है। शिवोपासना को अत्यन्त सरल माना गया है।
अन्य देवताओं की भांति भगवान शिव को सुगंधित पुष्पमालाओं और मीठे पकवानों की आवश्यकता नहीं पड़ती। शिव तो स्वच्छ जल, बिल्व पत्र, कंटीले और न खाए जाने वाले पौधों के फ ल धूतरा आदि से ही प्रसन्न हो जाते हैं। ६ मई से चल रही शिव महापुराण की कथा सुनने कथा स्थल पर भक्तों की भीड़ उमड़ रही है।
Published on:
12 May 2019 12:46 pm
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