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sidhi: संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगे गांवों में हाथियों का तांडव

फि र एक आदिवासी के घर कहर बनकर टूटा हाथियों का झुंड-खपरैल मकान क्षतिग्रस्त कर खा गए अनाज, बाल-बाल बची महिला

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सीधी/पथरौला। जिले के संजय टाइगर रिजर्व एरिया अंतर्गत पतझड़ का सीजन शुरू होने के कारण यहां विगत कई वर्षों से स्वछंद विचरण करने वाले हाथियों का झुंड फिर एक बार आदिवासी परिवारों के ऊपर कहर बनकर टूट रहा है। हाथियों का यह झुंड जंगल से उतरकर गांवों की ओर रूख कर रहा है। जहां ग्रामीणों का घर क्षतिग्रस्त कर अनाज हजम कर रहे हैं।
ऐसा ही एक मामला आदिवासी बाहुल्य जनपद पंचायत कुसमी अंतर्गत ग्राम पंचायत खैरी के हैकी गांव का प्रकाश में आया है। जहां बीते रविवार की शाम 7 बजे फु लझर के जंगलों से निकल कर राममिलन बैगा पिता बीकू बैगा 50 वर्ष निवासी हैकी के घर को हाथियों ने निशाना बनाते हुए खपरैल मकान को ध्वस्त कर घर में रखे अनाज गेहूं, धान, आटा आदि खा गए और बोरियों में भरे अनाज को उठा ले गए। घटना के संबंध में मिली जानकारी के मुताबिक शाम 7 बजे राममिलन बैगा की पत्नी हैंडपम्प में पानी भरने गई थी। हैंड पम्प से पानी लेकर जैसे ही आंगन में पहुंची तो अंधेरे में एक हाथी आंगन में खड़ा था। हाथी को देख महिला की चीख निकल गई। महिला ने सिर पर रखे पानी के तबेले को छोडक़र भागने का प्रयास करने लगी। उसी समय हाथी ने महिला को धक्का दे दिया, जिससे महिला जमीन पर गिर गई। इसके बाद हाथी ने महिला को कुचलने का प्रयास किया। लेकिन इस पहले महिला गुलाटी मारते हुए हाथी के पेट के नीचे से भाग कर अपनी जान बचाई। जबकि हाथी का पैर सिल्वर के तबेले में पड़ा, जिससे तबेला पिचक गया। बताया गया कि रात 10 बजे तक हाथियों का तांडव लगातार चलता रहा। तत्पश्चात ग्रामीणों तथा वन विभाग द्वारा हल्ला गुल्ला कर हाथी को भगाने का प्रयास किया गया। हल्ला गुल्ला सुनकर हाथी श्यामसुंदर यादव पिता नोहर यादव के घर पहुंच गए। लेकिन पहले से सजग परिवार वालों ने हाथियों को जंगल की तरफ खदेड़ दिया। घटना की सूचना पर हल्का पटवारी राजीव सिंह एवं राहुल प्रसाद सुबह घटना स्थल पर पहुंच कर मौका मुआयना करते हुए पीडि़त परिवार के क्षतिपूर्ति का प्रकरण तैयार किया गया।
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10 हाथी चले गए सीमा पार-
विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक हाथियों के इस झुंड में कुल 13 सदस्य हैं। जिसमें से बीते सप्ताह ताल गांव की घटना के बाद 10 हाथियों का झुंड सीमा पार कर छत्तीसगढ़ के जंगलों में चले गए हैं। जबकि झुंड के 3 सदस्य अभी भी संजय टाइगर रिजर्व एरिया के जंगलों में स्वछंद विचरण कर रहे हैं और वनवासियों के दहशत का पर्याय बने हुए हैं।
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