6 अप्रैल 2026,

सोमवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Smart farming: सोयाबीन-गेहूं उत्पादन में मालवा को मात दे रहे यहां के किसान

छत्तीसगढ़ व उत्तर प्रदेश तक पहुंच रहा सतना का कैरेला, प्याज की डिमांड बांग्लादेश में

2 min read
Google source verification
Farmers suffering from Malwa in Soyabean-wheat production in satna

Farmers suffering from Malwa in Soyabean-wheat production in satna

सतना. सीमेंट उत्पादन के लिए प्रसिद्ध विंध्य की औद्योगिक राजधानी सतना का नाम अब अग्रणी कृषि उत्पादक जिलों में शामिल हो गया है। उन्नत तकनीक से खेती कर यहां के किसान सोयाबीन-गेहूं उत्पादन में मालवा को मात दे रहे हैं। खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए सरकार द्वारा चलाई गई योजनाओं से किसान स्मार्ट फार्मिंग अपना रहे हंै। सिंचाई संसाधनों के विकास व बिजली उपलब्धता से प्रति हेक्टेयर उत्पादन में वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि शहर के स्मार्ट सिटी बनने के बाद अब किसान स्मार्ट फार्मिंग की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे जहां कृषि आय बढ़ रही है, वहीं युवा नौकरी छोड़कर कृषि आधारित उद्योगों की ओर लौट रहा है। जिले की धरती कृषि उद्यानिकी के लिए उपयुक्त है। दुग्ध उत्पादन में भी जिले ने अलग छाप छोड़ी है।

यहां की मिट्टी एवं पर्यावरण कृषि आधारित उद्योगों के लिए अनुकूल है। कृषि प्रसंस्करण इकाइयां की जरूरत है। ताकि, किसानों को उपज का उचित दाम मिले सके। विंध्य का कृषि बाजार सतना से ही संचालित है। इसकी ताकत पहचानते हुए सरकार यहां उद्यानिकी, मसाला एवं औषधीय खेती को प्रोत्साहन दे रही है।

3. सोयाबीन
मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक सोयाबीन उत्पादक राज्य है। प्रदेश को सोया राज्य का दर्जा दिया गया है। मुख्यत: मालवा में बोई जाने वाली सोयाबीन की फसल विंध्य के किसानों के लिए वरदान साबित हुई है। विंध्य में पीला सोना के नाम से प्रचलित सोयाबीन की खेती ने जिले के किसानों को आर्थिक मजबूती प्रदान की है। बीते एक दशक में सोयाबीन की खेती का रकबा बढ़कर ८५ हजार हेक्टेयर तक पहुंच गया है।

2. दलहन एवं गेहूं
दलहनी फसलों के उत्पादन में विंध्य के जिले प्रदेश में सबसे आगे हैं। चना-मसूर के साथ जिले के किसान गेहूं की खेती में भी मालवा के किसानों को टक्कर दे रहे हैं। जिले में सिंचाई का रकबा बढऩे से गेहूं का प्रति हेक्टेयर उत्पादन ४४ क्विंटल तक पहुंच गया है। यह प्रदेश में एक रिकार्ड है। गेहूं की खेती से बंपर उत्पादन मिलने से किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।

3. अन्य फसलें
कृषि के साथ उद्यानिकी फसलों की खेती में भी जिले के किसान झंडा गाड़ रहे हैं। मैहर विकासखंड के बेरमा गांव में उत्पादित करैले की धमक प्रदेश के बाहर उत्तर प्रदेश एवं छत्तीसगढ़ की मंडियों तक है। जिले में उत्पादित प्याज की मांग देश के बाहर बांग्लादेश तक है। अब संतरा एवं लहसुन की खेती में भी जिले के किसान अपना हाथ आजमा रहे हैं।

चुनौतियां

मजबूत कदम