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वाह रे मध्यप्रदेश: किसानों को देना था तकनीकी जानकारी, दे दिए सांपों का प्रशिक्षण

आत्मा परियोजना में मिली व्यापक अनियमितता, नवाचार के नाम पर किसानों को दिलवा दिया सांपों का प्रशिक्षण
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सतना

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Suresh Mishra

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Updated: 6 Oct 2018, 11:34 AM IST

Snake of 55 lakh rupees

Snake of 55 lakh rupees

सतना। शासन द्वारा कृषि के विकास को स्थायित्व प्रदान करने के लिए आत्मा परियोजना का संचालन 2007 से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य कृषि प्रसार एवं अनुसंधान कार्य को एकीकृत रूप से किसानों के बीच लाना है। लेकिन, जिले में आत्मा परियोजना की मैदानी स्थिति तो जनसामान्य को कभी पता ही नहीं चली। कार्यालयीन निरीक्षण में हालात काफी खराब मिले। परियोजना में चल रही मनमानी का आलम यह है कि नवाचार के लिए 4 लाख रुपए जिले को मिले थे। इसके तहत यहां के अधिकारियों ने जिले में पाए जाने वाले सांपों से संबंधित प्रशिक्षण प्रत्येक विकासखंड में देना बताया है।

जबकि नवाचार में किसानों को विशेष संसाधन और तकनीक से जुड़े मसले शामिल हैं। संयुक्त संचालक किसान कल्याण तथा कृषि विकास रीवा द्वारा आत्मा परियोजना सतना के कार्यालय के निरीक्षण में व्यापक स्तर पर अनियमितताएं पाई गई हैं। आत्मा परियोजना में गंभीर किस्म का गड़बड़झाला पाया गया। जांच में मिला कि कार्यालय प्रमुख द्वारा क्रय की गई सामग्रियों का स्टॉक इंट्री में सत्यापन नहीं किया गया है। इसके पहले के दो निरीक्षणों के दौरान सत्यापन के निर्देश दिए गए थे।

कैश बुक का संधारण नहीं
रोकड़ पुस्तिका के निरीक्षण में मिला कि 28 अप्रैल 2018 को अवशेष राशि 1.32 करोड़ रुपए है। दिनांक 30 जुलाई 2018 की स्थिति में भी अवशेष 1.32 करोड़ मिला। जांच अधिकारी ने इस पर गंभीर आपत्ति की है कि अप्रैल के बाद आज दिनांक तक कैश बुक का लेखांकन ही नहीं किया जो वित्तीय अनियमितता के दायरे में आता है। इस पर परियोजना संचालक को शोकाज जारी करते हुए जवाब तलब किया गया है कि एडवांसेस कब से कितने लंबित हैं? इसके लिए कौन जिम्मेदार है और वसूली क्यों नहीं की गई? यह भी जानकारी तलब की है कि इतनी अधिक अवशेष राशि किस मद, प्रयोजन तथा लंबित क्यों हैं? कंटीजेंट पंजी, चालान पंजी संधारित नहीं मिली। वर्ष 2017-18 का सीए द्वारा आडिट कराया जाना भी नहीं पाया गया।

लक्ष्य पूर्ति में पीछे
आत्मा कैफेटेरिया के तहत कराए गए कार्यों की समीक्षा में पाया गया कि परियोजना संचालक की कार्यप्रणाली की वजह से लक्ष्य के विरुद्ध विभिन्न घटकों में काफी व्यय किया गया है। मसलन किसान मित्रों के मानदेय का भौतिक लक्ष्य 898 किसान तथा वित्तीय लक्ष्य 59.88 लाख तय था पर इनके द्वारा महज 231 किसानों को 45.96 लाख का भुगतान किया गया। नवाचार में 4 लाख तथा इनोवेटिव टेक्नालाजी में 3.90 लाख का लक्ष्य तय था लेकिन व्यय शून्य रहा। इसी तरह अन्य कई घटकों में लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। जिस पर कार्यालय प्रमुख को शो-कॉज जारी करते हुए सवाल किया गया कि लक्ष्य की पूर्ति क्यों नहीं हो सकी।

गायब मिले अधिकारी
आत्मा परियोजना के निरीक्षण के दौरान परियोजना संचालक एवं उप परियोजना संचालक कार्यालय में अनुपस्थित पाए गए। इतना ही नहीं जिले में पदस्थ एटीएम व बीटीएम को निरीक्षण के दौरान अभिलेखों का निरीक्षण नहीं कराया गया। जिसे कार्य के प्रति लापरवाही माना गया है। इस संबंध में इन्हें शो-कॉज जारी करने कहा गया है। कृषि विकास की महती परियोजना आत्मा के गवर्निंग बोर्ड की बैठक हर तीन माह में होनी चाहिए लेकिन 2018-19 की बैठक आयोजित नहीं की गई। इस पर परियोजना संचालक आत्मा को शो-कॉज जारी किया गया है। स्थिति यहां तक खराब मिली कि ब्लॉक टेक्नोलॉजी टीम के गठित होने और इसकी बैठक होने के कोई अभिलेख ही नहीं पाए गए।

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