
Special on National Consumer Day
सतना। उपभोक्ताओं के विभिन्न हितों को ध्यान में रखते हुए प्रत्येक वर्ष 24 दिसंबर को राष्ट्रीय उपभोक्ता संरक्षण दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों या उपभोक्तों को अपने-अपने हितों की जानकारी रहे। लेकिन इसकी जमीनी हकीकत कुछ और ही है। खुलेआम सतना सहित प्रदेशभर की बाजारों में मिलावटी सामग्री, बिना मानक वस्तुओं की बिक्री, एमआरपी से ज्यादा वसूली हो रही है।
फिर भी 80 प्रतिशत उपभोक्ता लूट का शिकार होता रहता है और आगे बढ़ जाता है। बढ़ते बाजारवाद के दौर में उपभोक्ताओं में टेक्नालॉजी तो देखने को मिल रही है, लेकिन जागरूकता की आज भी कमी है।
दरअसल, मुनाफाखोरी ने उपभोक्ताओं के लिए कई तरह की परेशानियां पैदा कर दी हैं। वस्तुओं में मिलावट और निम्न गुणवत्ता की वजह से जहां उन्हें परेशानी होती है, वहीं सेवाओं में व्यवधान या पर्याप्त सेवा न मिलने से दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हालांकि भारत सरकार कहती है, जब आप पूरी कीमत देते हैं तो कोई भी वस्तु वजन में कम न लें। बात सही है या नहीं, यह सुनिश्चित करने के लिए कानून है। यह स्लोगन सरकारी दफ्तरों में भी खूब देखने को मिल जाएगा। सरकार ने उपभोक्ताओं को संरक्षण देने के लिए कई कानून बनाए हुए हैं। बावजूद उपभोक्ताओं से पूरी कीमत वसूलने के बाद उन्हें सही वस्तुएं और वाजिब सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं।
ऐसे करें अपने अधिकारों का उपयोग
जब किसी उपभोक्ता को लगे कि वस्तु या सेवा में कोई अनुचित या खराब है, जिसके कारण उसे हानि पहुंचती है। तब वह कानून का प्रयोग कर उपभोक्ता फोरम में अपनी शिकायत दर्ज करा सकता है। इसके अलावा आपको दी गई सेवाओं और वस्तुओ में आपको किसी भी प्रकार की अशंतुष्टी हो तो आप अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान संगठन के पदाधिकारियों के माध्यम से और सीधे भी उपभोक्ता फोरम में न्याय पाने के लिए जा सकते है।
कौन है उपभोक्ता
बता दें कि, जो भी व्यक्ति वस्तुओं या सेवाओं का दैनिक जीवन में उपभोग करता है। वह उपभोक्ता कहलाता है। जैसे कोई वस्तुओं या सेवाओं का मूल्य चुकाता हो या चुकाने का वादा करता हो अथवा आधा चुकाता हो या आधा चुकाने का वादा करता हो वह उपभोक्ता की श्रेणी में ही माना गया है।
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 1986 के तहत भारत के संविधान की धारा 14 से 19 बीच उपभोक्ता को कुछ अधिकार दिए गए है जिनसे उनको होने वाली हानि से उन्हें बचाया जा सके। इन अधिकारों की जानकारी होना हर उपभोक्ता के लिए बेहद जरुरी है। उपभोक्ता कानून में बकायदा इसका जिक्र किया गया है।
ये है अधिकार
1. सुरक्षा का अधिकार: प्रत्येक उपभोक्ता खरीदे गए उत्पाद से किसी भी तरह की हानि न हो ये उसका अधिकार है। वह न ही मानसिक, न भौतिक और न ही आर्थिक।
2. सूचना पाने का अधिकार: किसी भी वस्तु और सेवाओं को लेने से पहले उनसे संबंधित सभी जानकारी पाने का उन्हें अधिकार है।
3. चुनने का अधिकार: उन्हें किसी भी वस्तु और सेवा को लेने के लिए दबाव नहीं डाला जा सकता है उनको पूरी स्वतंत्रता है कि वह अपने पसंद की वस्तु और सेवा का चुनाव खुद करें।
4. सुने जाने का अधिकार: उपभोक्ता के किसी भी अधिकार के खंडन होने पर उसको हक है कि वो कानून का दरवाजा खटखटाए और उसकी समस्याओं को सुना जाए और उनका समाधान भी किया जाए।
5. उपभोक्ता शिक्षा का अधिकार: उपभोक्ता को अधिकार है कि उसे उसके अधिकारों के बारें में शिक्षित किया जाए और सरकार का दायित्व है कि हर उपभोक्ता को जागरूक करे।
आए दिन ग्राहक बाजार मूल्य से ज्यादा रुपए चुकाकर बस्तुएं खरीदतें है। लेकिन 80 प्रतिशत से ज्यादा ग्राहक इसका विरोध नहीं करते है। जबकि ये उनका अधिकार है। सबको लगत सामग्री या मूल्य ज्यादा होने पर विरोध करना चाहिए। अभी कुछ दिन पहले ही खाने में बटन मिलने पर 50 हजार रुपए का जुर्माना जेट एयरवेज पर हो चुका है।
मुकेश पाण्डेय, राष्ट्रीय संगठन सचिव, अखिल भारतीय उपभोक्ता उत्थान
Published on:
24 Dec 2017 02:01 pm
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