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डेड बॉडी को छाती से चिपका 40 किमी. पैदल ले जा रहे थे मां-बाप, फिर भी प्रशासन नहीं उपलब्ध करा पाया शव वाहन

पुलिस व अस्पताल प्रबंधन उपलब्ध नहीं करा पाया शव वाहन, प्रशासन की नहीं जागी संवेदना, राहगीरों ने की मदद

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सतना

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Suresh Mishra

Oct 14, 2018

Story of satna District hospital shav vahan

Story of satna District hospital shav vahan

सतना। जिला अस्पताल में शनिवार को गरीब की बेबसी और प्रबंधन की असंवेदनशीलता देखने को मिली। शाम के वक्त एक नवजात की मौत हो गई। माता-पिता के पास गांव जाने के लिए पैसे नहीं थे। लिहाजा, वे कलेजे के टुकड़े के शव को सीने से लगाए पैदल ही चल दिए।

जबकि उन्हें करीब 40 किमी. दूर मझगवां के कवांर गांव तक जाना था। इस दौरान अस्पताल प्रबंधन व पुलिस को जानकारी भी दी गई पर कोई मदद नहीं कर सका। संयोग से एक स्थानीय व्यक्ति को जानकारी हुई और उन्होंने अपने अन्य साथियों के माध्यम से वाहन उपलब्ध कराया।

ये है मामला
बताया गया, कवांर गांव की चूममानी मवासी को प्रसव पीड़ा होने पर 10 अक्टूबर को मझगवां सामुदायिक केंद्र में भर्ती कराया गया। वहां उसने बच्चे को जन्म दिया। चिकित्सकों ने पाया कि मासूम की स्थिति गंभीर है। लिहाजा, उसे जिला अस्पताल एसएनसीयू के लिए रेफर कर दिया गया। शनिवार को रात आठ बजे मासूम की मौत हो गई। दूसरी ओर दुर्भाग्य यह था कि माता-पिता के पास खाने के लिए भी पैसे नहीं थे। उनके सामने मासूम के शव को मझगवां ले जाने का संकट आ पड़ा।

शव वाहन की जानकारी ली
उन्होंने आसपास कर्मचारियों से सरकारी शव वाहन की जानकारी ली पर कुछ हासिल नहीं हुआ। उसी दौरान अस्पताल प्रबंधन ने डिस्चार्ज कार्ड थमा दिया। मजबूर मां-बाप को समझ में नहीं आ रहा था कि वे क्या करें? उसके बाद वे पैदल ही मझगवां के लिए निकल गए। जब वे खजुराहो होटल मोड़ के पास पहुंचे, तो मां को थोड़ी तकलीफ हुई। वे शव को लेकर सड़क किनारे बैठ गए। उसी दौरान किसी ने पुलिस को सूचना दे दी कि दो लोग मासूम के शव को लेकर फेंकने जा रहे हैं। आनन-फानन पुलिस टीम मौके पर पहुंची।

पुलिस ने भी नहीं की मदद
जब उसे हकीकत समझ में आई तो कागजी कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम भी वापस लौट गई। लेकिन, उसने भी पीडि़त परिवार की मदद की नहीं सोची। संयोग से पास में ही दीपक भसीन की दुकान है। वे भी मौके पर पहुंचे। हकीकत जानकर हैरान रह गए। उन्होंने लायंस क्लब अध्यक्ष पवन मलिक व डॉ. प्रकाश सिंह को फोन किया। तीनों ने खुद के स्तर पर एम्बुलेंस की और पीडि़त माता-पिता को शव के साथ मझगवां भेजा।

अस्पताल परिसर में चार शव वाहन
गरीबों की मदद के लिए अस्पताल में सेवा संकल्प नामक संस्था काम करती है। उसके पास चार शव वाहन हैं, जिसे स्थानीय नागरिकों ने मदद के लिए ही दान किया है। लेकिन, पीडि़त परिवार को इनकी भी मदद नहीं मिल सकी। अस्पताल प्रबंधन ने दो साल पहले पुराने वाहन को शव वाहन बनाया था। उसे बंद कर दिया गया। जबकि जिला अस्पताल में शव वाहन उपलब्ध रखने के निर्देश शासन के हैं।

दो संदिग्ध मासूम के शव को लेकर जा रहे हैं। जांच करने पर पता चला कि वे माता-पिता हैं। बच्चे की मौत अस्पताल में हुई है।
विद्याधर पांडेय, टीआइ, सिटी कोतवाली

किसी भी व्यक्ति ने प्रबंधन से संपर्क नहीं किया। अगर, वे अपनी समस्या बताते तो वाहन उपलब्ध कराया जाता।
इकबाल सिंह, प्रशासक, सतना जिला अस्पताल