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Success Story: ये है इंडियन सनसनी, डांस देख आप भी हो जाएंगे दीवाने, रुला देगी इसके संघर्ष की कहानी

माता-पिता चाहते थे डॉक्टर बने, अनुकृति ने डांस में बनाया मुकाम, सीधी की बेटी ने भरी हौसलों की उड़ान

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सतना

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Suresh Mishra

Jun 12, 2018

Sucess story of Dance teacher Anukriti Singh

Sucess story of Dance teacher Anukriti Singh

सीधी। हौसला हो तो गरीबी की बेडिय़ां तोड़ मुकाम तक पहुंचा जा सकता है। यह बात चरितार्थ कर दिखाया है जमोड़ी तिराहे के पास रहने वाली अनुकृति चौहान ने। उनके पिता अनिल सिंह चाहते थे कि बेटी डॉक्टर बने, लेकिन उसने डांस में अपना कॅरियर बनाया। इलाहाबाद और दिल्ली में डांस की बारीकियां सीखने के बाद वे अब फिटनेस और डांस क्लास से लाखों रुपए महीने कमाती हैं। अनुकृति इलाहाबाद के एक निजी स्कूल में प्रिंसिपल हैं।

उन्होंने सीधी में 10वीं तक पढ़ाई की। पांच वर्ष पूर्व मेडिकल की तैयारी के लिए इलाहाबाद गईं, लेकिन अपनी रुचि के अनुसार, नृत्य के आठ वर्षीय कोर्स में प्रवेश ले लिया, इसके पांच वर्ष पूरे हो चुके हैं। इस बीच दिल्ली में छह माह का अतिरिक्त कोर्स किया। इलाहाबाद में डांस क्लासेस का शुभारंभ फिल्म कलाकार आशुतोष राणा व राजपाल यादव ने किया था।

patrika IMAGE CREDIT: patrika

ऐसे आईं चर्चा में
अनिकृति जिला मुख्यालय से पांच किमी दूर गोरियरा बांध की प्राकृतिक छटाओं के बीच एक नृत्य फिल्माया है, जो शहर में चर्चा का विषय बना है। जल्द वे भंवरसेन घाट, बरचर आश्रम, परसिली रेस्ट हाउस के आस-पास डांस फिल्माने की तैयारी में हैं।

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आसान नहीं थी राह
अनुकृति सफल जिंदगी के बीच एक स्याह पक्ष भी है। वे पारिवारिक स्थिति बयां करते हुए कहती हैं कि, पिता पंचर की दुकान चलाते हैं। उनकी इतनी आय नहीं थी कि वे मुझे महानगर में रख पढ़ाई का खर्चा उठा सकें, लेकिन मां ने हौसला बढ़ाया तो अनुमति दे दी। इलाहाबाद में बीते पल याद करते हुए अनुकृति कहती हैं कि चौपाटी पर श्रमिकों को मिलने वाले 10 रुपए वाला खाना खाकर दिन-रात गुजार लेती थी। कई बार तो पानी पीकर ही काम चलाना पड़ा। किंतु मैंने ठान लिया था कि भूखे रह लूंगी, लेकिन हार मानकर घर नहीं लौटूंगी।

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लड़कियों को संदेश
अनुकृति ने लड़कियों से कहा, प्यार-मोहब्बत के चक्कर में न पड़ें। गोल्डेन समय बीत गया तो जिंदगी भर पछताना रह जाएगा। समय का सदुपयोग कर बेहतर कॅरियर बनाएं। अभिभावक भी बेटियों पर भरोसा करें। इच्छा शक्ति मजबूत है तो कामयाबी जरूर मिलेगी।

माता-पिता से मिला हौसला
पत्रिका से चर्चा के दौरान अनुकृति ने कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूं, अपने माता-पिता की बदौलत हूं। क्योंकि मैं पनवार गांव की रहने वाली हूं, मेरे गांव की कई लड़कियां ऐसी हैं जिन्हे मेरी उम्र में अभिभावकों द्वारा पढ़ाई तक छुड़वा दी जाती है, लेकिन मेरे माता-पिता को मुझ पर पूरा विश्वास था, और उनके विश्वास के कारण ही मैं इलाहाबाद जा पाई। मेरी कामयाबी के लिए परिजनों का बहुत बड़ा हाथ है। अनुकृति सिंह ने कहा, मै खुद के पैर पर खड़ी हूं।